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संगरूर प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंदरूनी कलह उजागर करने पर भाजपा अनुशासन समिति ने 3 पंजाब नेताओं से मांगा 7 दिन में जवाबपंजाब
29 अग॰ 2026, 8:50 am (24 दिन पहले)· 2

संगरूर प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंदरूनी कलह उजागर करने पर भाजपा अनुशासन समिति ने 3 पंजाब नेताओं से मांगा 7 दिन में जवाब

संगरूर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संगठन पर पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी के आरोप लगाने वाले भाजपा के तीन नेताओं को पंजाब अनुशासन समिति ने कारण बताओ नोटिस थमाया है।

पंजाब में भारतीय जनता पार्टी की अनुशासन समिति ने संगरूर में पार्टी की स्थापित नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पर तीन प्रमुख स्थानीय नेताओं के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। समिति ने पूर्व संगरूर भाजपा अध्यक्ष रणदीप सिंह देओल, पूर्व संगरूर भाजपा अध्यक्ष मनिंदर सिंह कपिल और पूर्व पंजाब सेल समन्वयक जतिंदर कालरा को कारण बताओ नोटिस थमाया है। इन नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने 25 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर आंतरिक संगठनात्मक मामलों पर सार्वजनिक रूप से बयानबाज़ी की, जिससे पार्टी की छवि और साख पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

संगरूर प्रेस कॉन्फ्रेंस और उठाये गए सवाल

यह पूरा मामला 25 अगस्त को संगरूर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन से जुड़ा है, जहाँ इन तीनों नेताओं ने दो अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर पार्टी नेतृत्व के समक्ष अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेताओं का मुख्य आरोप था कि भाजपा के हालिया संगठनात्मक फेरबदल और पद आवंटन में पुराने और अनुभवी कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है। नेताओं का कहना था कि वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित भाव से काम करने वाले निष्ठावान सदस्यों की अनदेखी कर नए या बाहरी चेहरों को तवज्जो दी जा रही है। सार्वजनिक मंच से इस तरह पार्टी के अंदरूनी फैसलों पर सवाल उठाने को अनुशासन समिति ने गंभीर उल्लंघन माना है।

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सोम प्रकाश की अध्यक्षता वाली समिति का सख्त रुख

भाजपा अनुशासन समिति के अध्यक्ष तथा पूर्व केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने 27 अगस्त 2026 को आधिकारिक पत्र जारी कर इस मामले में जवाब तलब किया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि नेताओं का यह आचरण प्रथम दृष्टया भारतीय जनता पार्टी की प्रतिष्ठा, विश्वसनीयता और सांगठनिक अनुशासन के खिलाफ है। पार्टी के अनुसार, संगठनात्मक मुद्दों को आंतरिक बैठकों के बजाय मीडिया के सामने उठाना पार्टी के संविधान और कार्यशैली के विपरीत है। अनुशासन समिति ने नेताओं को अपनी बात रखने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की है।

सात दिन का अल्टीमेटम और कार्रवाई की चेतावनी

जारी किए गए नोटिस में तीनों नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वे नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण समिति को प्रस्तुत करें। स्पष्टीकरण में नेताओं को यह स्पष्ट करना होगा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य क्या था, उसमें उनकी व्यक्तिगत भूमिका क्या थी और उन्होंने कौन से विशिष्ट बयान दिए थे। पार्टी नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से लिया है। नोटिस में यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि तय सात दिनों की समयावधि के भीतर संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो पार्टी संविधान और नियमों के तहत बिना किसी अग्रिम सूचना के उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

बीएल संतोष के पंजाब दौरे के बीच बढ़ा राजनीतिक तापमान

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री और पंजाब प्रदेश प्रभारी बीएल संतोष राज्य के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं। बीएल संतोष का यह दौरा पंजाब में आगामी सांगठनिक तैयारियों, जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और पार्टी के कामकाज का मूल्यांकन करने के उद्देश्य से तय किया गया था। ऐसे समय में संगरूर में स्थानीय नेताओं द्वारा उठाई गई आवाज और उसके बाद अनुशासन समिति की यह कार्रवाई दर्शाती है कि पार्टी नेतृत्व अनुशासनहीनता के मामलों में कोई ढील देने के मूड में नहीं है और संगठन के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

सवाल-जवाब

किन तीन भाजपा नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है?
पूर्व संगरूर अध्यक्ष रणदीप सिंह देओल, पूर्व संगरूर अध्यक्ष मनिंदर सिंह कपिल और पूर्व पंजाब सेल समन्वयक जतिंदर कालरा को नोटिस दिया गया है।
नेताओं को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए कितना समय दिया गया है?
नेताओं को नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर अपनी लिखित भूमिका और बयानों का विवरण देते हुए जवाब देना अनिवार्य है।
25 अगस्त को संगरूर में नेताओं ने क्या बयान दिए थे?
नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि पार्टी के हालिया सांगठनिक फेरबदल में अनुभवी और पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है।
अनुशासन समिति का नोटिस किसने जारी किया है?
अनुशासन समिति के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने 27 अगस्त 2026 को यह आधिकारिक पत्र जारी किया।
यदि 7 दिनों के भीतर जवाब नहीं दिया जाता तो क्या होगा?
तय समय में जवाब न देने पर पार्टी संविधान और नियमों के तहत बिना किसी अग्रिम सूचना के तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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