हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के जलक्षेत्र को सुरक्षित रखने की दिशा में एक अहम अध्याय जुड़ गया है। केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार की राजधानी श्री विजयपुरम में सात देशों के समूह बिम्सटेक का पहला औपचारिक समुद्री सुरक्षा अभ्यास शुरू हो चुका है। यह बहुपक्षीय आयोजन 3 नवंबर तक चलेगा, जिसका मुख्य मकसद खाड़ी से सटे पड़ोसी मुल्कों के बीच साझा सुरक्षा ढांचे, त्वरित सूचना तंत्र और राहत अभियानों की आपसी तालमेल क्षमता को मजबूत करना है।
शिखर सम्मेलन के संकल्प को जमीन पर उतारने की पहल
इस संयुक्त कवायद की नींव पिछले साल थाईलैंड में संपन्न हुए छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान पड़ी थी, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए इस तरह के व्यापक समुद्री अभ्यास का प्रस्ताव रखा था। सदस्य राष्ट्रों के रणनीतिक समन्वय को धार देने के लिए तैयार की गई यह कार्ययोजना अब धरातल पर क्रियान्वित की जा रही है। आयोजन के कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से बांटा गया है, जिसके शुरुआती तीन दिनों में विचार-विमर्श आधारित टेबलटॉप मंथन रखा गया है और इसके फौरन बाद दो दिनों का बंदरगाह चरण संचालित होगा। सदस्य देशों के नौसैनिक पोत भी इस पूरे अभ्यास का सक्रिय हिस्सा बने हैं।
उद्घाटन सत्र में जुटे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी
शुक्रवार को विधिवत रूप से शुरू हुए इस अभ्यास के शुभारंभ अवसर पर अंडमान एवं निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल विनीत मैककार्टी मौजूद रहे। इस दौरान राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक वाइस एडमिरल बिस्वजीत दासगुप्ता के अलावा श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने भी अपनी औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराई। मंच का मुख्य ध्येय सातों देशों के नेतृत्व द्वारा तय किए गए साझा विजन को जमीन पर ठोस रक्षा सहयोग में तब्दील करना है, ताकि समूचे समुद्री दायरे में स्थिरता और शांति बनी रहे।
दिल्ली घोषणा और सुरक्षा प्राथमिकताओं का दायरा
अंडमान एवं निकोबार कमान के अनुसार, दिल्ली घोषणा के तय लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए यह बहुपक्षीय अभ्यास आयोजित किया जा रहा है। इसके एजेंडे में केवल सामान्य गश्त ही नहीं, बल्कि कई गंभीर सीमा पार चुनौतियों का मुकाबला शामिल है। इसमें समुद्री क्षेत्र की वास्तविक समय पर निगरानी, खुफिया इनपुट साझा करना और आतंकवाद जैसे संगठित अपराधों के खिलाफ संयुक्त प्रतिक्रिया तैयार करना मुख्य रूप से शामिल है। इसके अतिरिक्त, समुद्र में जहाजों से अचानक होने वाले तेल रिसाव, घातक रासायनिक प्रदूषण की रोकथाम तथा चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) उपलब्ध कराने के तौर-तरीकों का गहन पूर्वाभ्यास किया जा रहा है।
सात देशों की रणनीतिक एकजुटता का महत्व
बिम्सटेक समूह के भीतर भारत के साथ थाईलैंड, म्यांमार, श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान और नेपाल जैसे राष्ट्र परस्पर जुड़े हैं। भले ही इनमें कुछ देश सीधे तटीय सीमा साझा नहीं करते, लेकिन पूरे उपमहाद्वीप का व्यापार और पारगमन बंगाल की खाड़ी के समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर ही टिका है। एक स्वतंत्र, सुरक्षित और स्थिर जलमार्ग सुनिश्चित करने की यह पहल सदस्य देशों के बीच रक्षा स्तर पर भरोसा गहरा करने और क्षेत्रीय संप्रभुता को अवांछित दखल से सुरक्षित रखने में बेहद निर्णायक मानी जा रही है।



















