केरल के तिरुवनंतपुरम तट पर भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं ने साझा युद्धाभ्यास ‘ऑस्ट्राहिंद 2026’ के दौरान समुद्र से तटीय जमीन पर सैन्य टुकड़ियों को त्वरित रूप से उतारने का व्यापक अभ्यास सफलतापूर्वक पूरा किया। इस अभियान में भारतीय नौसेना के अपतटीय गश्ती पोत INS शारदा और सी किंग हेलीकॉप्टर ने भारतीय सेना एवं ऑस्ट्रेलियाई सेना के सैनिकों के साथ मिलकर संयुक्त मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) की प्रक्रियाओं को अंजाम दिया। यह अभ्यास समुद्री मार्ग से थल सीमा तक राहत और बचाव दलों को बिना किसी रुकावट के तुरंत पहुंचाने की तकनीकी क्षमता पर केंद्रित था।
जल, थल और नभ के समन्वय से परखी गई परिचालन क्षमता
इस संयुक्त ड्रिल के दौरान तटीय क्षेत्र में जल, थल और नभ तीनों माध्यमों का एकीकृत इस्तेमाल देखने को मिला। समुद्र में तैनात भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS शारदा से सैनिकों को सी किंग हेलीकॉप्टर और विशेष नौकाओं के सहयोग से सीधे जमीन पर उतारा गया। इस जटिल प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य किसी भी प्राकृतिक आपदा, समुद्री दुर्घटना अथवा आपातकालीन स्थिति में विभिन्न सैन्य अंगों के मध्य निर्बाध तालमेल स्थापित करना और राहत कार्यों को तेजी से संचालित करना है। तीनों बलों ने साझा मिशन के तहत त्वरित कार्रवाई और बेहतर संचार तंत्र का सफल प्रदर्शन किया।
आपसी तालमेल और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा
‘ऑस्ट्राहिंद 2026’ का प्राथमिक लक्ष्य भारत और ऑस्ट्रेलियाई सशस्त्र बलों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, संयुक्त सैन्य संचालन और साझा परिचालन तैयारियों को सुदृढ़ बनाना है। दोनों देशों की टुकड़ियों ने एक-दूसरे की मानक कार्यप्रणाली, रणनीति और जटिल मिशनों के दौरान अपनाए जाने वाले संचालन नियमों को बारीकी से समझा। इस तरह के संयुक्त प्रशिक्षण से दोनों देशों की सेनाओं को भविष्य में किसी भी बहुपक्षीय अथवा द्विपक्षीय संकट के समय एक साथ मिलकर अभियान चलाने की व्यावहारिक क्षमता हासिल होती है।
तटीय आपदा प्रबंधन में संयुक्त रणनीतिक तैयारी
यह ड्रिल विशेष रूप से तटीय इलाकों में मानवीय संकट और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। किसी भी बड़े समुद्री संकट या आपदा के दौरान प्रभावित इलाकों तक समय रहते पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती होती है, जहां सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच त्वरित समन्वय जीवन रक्षक साबित होता है। इस अभ्यास में सैनिकों की त्वरित लैंडिंग, समुद्री परिवहन के सुरक्षित उपयोग और हवाई सुरक्षा तथा सहायता के समन्वित प्रयोग का अभ्यास किया गया, जिससे भविष्य के राहत अभियानों की प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी को नई मजबूती
‘ऑस्ट्राहिंद 2026’ के इस सफल चरण ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक एवं रक्षा साझेदारी को और अधिक मजबूत किया है। ऐसे नियमित युद्धाभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी विश्वास, रणनीतिक समझ और साझा समुद्री सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को गहरा करते हैं। तिरुवनंतपुरम में समुद्र से जमीन तक सैनिकों की त्वरित और सुरक्षित तैनाती दोनों देशों की पेशेवर सैन्य दक्षता और उत्कृष्ट अंतर-सेवा समन्वय का ठोस प्रमाण बनकर सामने आई है।

















