भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में एक क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है, क्योंकि ब्रह्मोस-एनजी यानी ब्रह्मोस-नेक्स्ट जनरेशन मिसाइल का नया और उन्नत संस्करण जल्द ही तैयार होने वाला है। ब्रह्मोस पहले से ही दुनिया की सबसे ताकतवर सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है, लेकिन अब इसके नए अवतार के जुड़ने से सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान की शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी। अब तक एक विमान केवल एक भारी मिसाइल ले जाने तक ही सीमित था, लेकिन ब्रह्मोस-एनजी के वजन में कमी के कारण अब एक ही विमान पांच ऐसी मिसाइलें लेकर उड़ान भर सकेगा। यदि इस क्षमता को पूरी तरह से लागू किया जाता है, तो भारतीय वायुसेना एक ही मिशन में दुश्मन के कमांड सेंटर, एयरबेस, रडार सिस्टम और युद्धपोतों पर एक साथ भारी तबाही मचाने में सक्षम होगी। यह क्षमता इतनी प्रभावी होगी कि पाकिस्तान के प्रमुख शहर जैसे कराची, लाहौर, पेशावर, रावलपिंडी और इस्लामाबाद एक ही हवाई हमले की जद में आ सकेंगे।
ब्रह्मोस-एनजी: आधुनिकता का नया मानक
ब्रह्मोस-एनजी मौजूदा ब्रह्मोस मिसाइल का अगली पीढ़ी का उन्नत संस्करण है। इसे पहले की तुलना में काफी छोटा और हल्का डिजाइन किया गया है, लेकिन इसके बावजूद इसकी सुपरसोनिक गति और मारक क्षमता में कोई कमी नहीं आएगी। वर्तमान में, मौजूदा एयर-लॉन्च ब्रह्मोस-ए का वजन लगभग 2.5 टन है, जिसके कारण इसे ले जाने के लिए केवल सुखोई-30 एमकेआई के सबसे मजबूत सेंटरलाइन हार्डप्वाइंट का ही उपयोग किया जा सकता है। विमान में इसे लगाने के लिए विशेष प्रकार के स्ट्रक्चरल बदलाव करना अनिवार्य होता है। इसके विपरीत, ब्रह्मोस-एनजी का वजन केवल 1.2 टन होगा, जो इसे मौजूदा मिसाइल से लगभग आधा बना देता है। यही वजन में कटौती भारतीय वायुसेना के लिए गेमचेंजर साबित होगी।
कैसे संभव होगा पांच मिसाइलों का संचालन?
सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना का प्रमुख हैवी मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसमें कुल 12 हार्डप्वाइंट दिए गए हैं, जिन्हें विशेष कॉन्फिगरेशन के जरिए 14 तक बढ़ाया जा सकता है। हालांकि हर हार्डप्वाइंट भारी मिसाइल ढोने के लायक नहीं होता, लेकिन सेंटरलाइन पायलन और इनबोर्ड विंग पायलन पर्याप्त मजबूती प्रदान करते हैं। ब्रह्मोस-एनजी के हल्के वजन के कारण अब इन खास पायलन पर विशेष लॉन्चर और ड्यूल-इजेक्टर रैक लगाए जा सकेंगे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सेंटरलाइन और दोनों इनबोर्ड विंग्स का उपयोग करके एक साथ पांच मिसाइलें तैनात करना संभव होगा, जिससे विमान के संतुलन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और उसकी उड़ान क्षमता बरकरार रहेगी।
पाकिस्तान के लिए बढ़ेगा खतरा
भविष्य में, जब एक सुखोई-30 एमकेआई पांच सुपरसोनिक मिसाइलों से लैस होकर निकलेगा, तो पाकिस्तान के सामने खतरे का स्तर कई गुना बढ़ जाएगा। अब तक उनकी रणनीति केवल एक आने वाली मिसाइल का सामना करने की होती थी, लेकिन अब उन्हें एक ही मिशन में अनेक ठिकानों पर होने वाले हमलों के लिए तैयार रहना होगा। भारतीय वायुसेना कम विमानों का उपयोग करके दुश्मन के रडार, हथियार डिपो, कमांड पोस्ट और एयरबेस को एक साथ निशाना बनाने की स्थिति में होगी। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह भारतीय एयर स्ट्राइक की रणनीति में सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव है।
बहु-लक्ष्य भेदने की क्षमता
ब्रह्मोस-एनजी का सबसे बड़ा लाभ इसकी मल्टी-टारगेट स्ट्राइक क्षमता है। पहले जहां एक विमान को एक बड़े लक्ष्य पर केंद्रित रहना पड़ता था, वहीं अब वह अलग-अलग दिशाओं में स्थित कई सैन्य ठिकानों को एक साथ निशाना बना सकेगा। यदि जरूरत पड़ी, तो एक ही विमान किसी अत्यंत सुरक्षित ठिकानों पर पांच मिसाइलें छोड़कर वहां के एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह से ओवरलोड और विफल कर सकता है।
चीन के J-20 को चुनौती
चीन लगातार पाकिस्तान को आधुनिक सैन्य साजो-सामान उपलब्ध करा रहा है, जिसमें उनका पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट J-20 भी शामिल है। हालांकि, ब्रह्मोस-एनजी की तैनाती इस समीकरण को बदल देगी। सुखोई-30 एमकेआई को दुश्मन के एयर डिफेंस जोन के बहुत अंदर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि वह अधिक दूरी से ही सुपरसोनिक ब्रह्मोस-एनजी दागने में सक्षम होगा। इस तरह, हमलावर विमान दुश्मन की पहुंच से बाहर रहकर ही प्रभावी स्ट्राइक कर सकेगा, जिससे J-20 जैसे विमानों की प्रभावशीलता सीमित हो जाएगी।
नौसेना के लिए भी उपयोगी
ब्रह्मोस-एनजी की उपयोगिता केवल वायुसेना तक सीमित नहीं रहेगी। इसका हल्का आकार इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और भविष्य के अन्य लड़ाकू विमानों पर तैनात करने के लिए भी आदर्श बनाता है। इससे भारत के पास एक ऐसा कॉमन सुपरसोनिक हथियार उपलब्ध होगा जिसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म से आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा। स्पष्ट है कि ब्रह्मोस-एनजी केवल एक मिसाइल नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा रणनीति का भविष्य बनने की राह पर है।













