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सूरतगढ़ में कांग्रेस पार्षद कृष्ण कुमार के अचानक गायब होने पर भड़का आक्रोश, परिजनों ने किया चक्काजामराजस्थान
19 सित॰ 2026, 3:09 pm (6 दिन पहले)· 1

सूरतगढ़ में कांग्रेस पार्षद कृष्ण कुमार के अचानक गायब होने पर भड़का आक्रोश, परिजनों ने किया चक्काजाम

सूरतगढ़ नगर पालिका में वार्ड नंबर 43 के कांग्रेस पार्षद कृष्ण कुमार के लापता होने पर परिजनों ने पुलिस उपाधीक्षक दफ्तर के सामने सड़क रोककर प्रदर्शन किया।

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ इलाके में एक नवनिर्वाचित स्थानीय जनप्रतिनिधि के अचानक लापता होने की घटना ने भारी राजनीतिक और सामाजिक तनाव पैदा कर दिया है। वार्ड नंबर 43 से चुनाव जीतने वाले कांग्रेस पार्षद कृष्ण कुमार जब बीती रात बीकानेर से अपने घर लौट रहे थे, तब वह संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गए। इस घटना की जानकारी मिलते ही उनके परिवार के लोग और स्थानीय वार्डवासी सड़कों पर उतर आए हैं और उनकी सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं।

पुलिस उपाधीक्षक कार्यालय के बाहर चक्काजाम

लापता पार्षद का सुराग न मिलने से आक्रोशित परिजनों और समर्थकों ने पुलिस उपाधीक्षक (डिप्टी एसपी) कार्यालय के बाहर मुख्य मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। सड़क के बीचों-बीच धरना देकर बैठ जाने से इलाके में यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई और गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक कृष्ण कुमार को सुरक्षित खोजकर सामने नहीं लाया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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गंभीर आरोप और पुलिस पर सवाल

पार्षद के परिजनों ने सत्ताधारी दल पर आगामी पालिकाध्यक्ष चुनाव की वोटिंग को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए पार्षद को गायब कराने की साजिश रचने का सीधा आरोप लगाया है। दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर सत्ताधारी दल की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कृष्ण कुमार की बहन मोनिका बेनीवाल ने स्थिति को लेकर बेहद गंभीर दावे किए हैं। उनका कहना है कि करीब 20 से 25 पुलिसकर्मी उनके भाई को अपने साथ ले गए थे और उसी के बाद से उनका कोई अता-पता नहीं है। मोनिका का आरोप है कि पुलिस अधिकारी उनकी कोई बात सुनने को तैयार नहीं हैं, जबकि परिवार की केवल एक ही मांग है कि उनके भाई को फौरन सुरक्षित घर पहुंचाया जाए।

सूरतगढ़ नगर पालिका में राजनीतिक संतुलन और तनाव

इस पूरे मामले ने इतना गंभीर रुख इसलिए भी ले लिया है क्योंकि सूरतगढ़ नगर पालिका बोर्ड के चुनाव बेहद नाजुक मोड़ पर खड़े हैं। नगर पालिका में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही प्रमुख दलों के 16-16 पार्षद जीतकर आए हैं। इनके अलावा एक पार्षद माकपा का है और दो निर्दलीय पार्षद जीतकर सदन में पहुंचे हैं। इस बेहद कांटे के मुकाबले के बीच 21 सितंबर को पालिकाध्यक्ष पद के लिए मतदान होना तय है, जहां एक-एक वोट की कीमत निर्णायक साबित होने वाली है। कृष्ण कुमार के लापता होने से चुनावी गणित और समीकरणों को लेकर राजनीतिक गहमागहमी चरम पर पहुंच गई है।

सवाल-जवाब

सूरतगढ़ में लापता हुए पार्षद का क्या नाम है?
लापता हुए जनप्रतिनिधि का नाम कृष्ण कुमार है, जो कांग्रेस के टिकट पर वार्ड नंबर 43 से पार्षद चुने गए हैं।
कृष्ण कुमार कब और कहां से गायब हुए?
वे बीती रात बीकानेर से सूरतगढ़ लौटते समय संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे।
परिजनों ने सड़क जाम कहां और क्यों किया?
परिजनों और वार्डवासियों ने पुलिस उपाधीक्षक कार्यालय के बाहर सड़क जाम कर कृष्ण कुमार की सकुशल वापसी की मांग की।
पार्षद की बहन मोनिका बेनीवाल ने क्या आरोप लगाए हैं?
मोनिका बेनीवाल का आरोप है कि 20 से 25 पुलिस वाले उनके भाई को लेकर गए थे और पुलिस परिवार की कोई सुनवाई नहीं कर रही है।
सूरतगढ़ नगर पालिका में दोनों प्रमुख पार्टियों की क्या स्थिति है?
सूरतगढ़ नगर पालिका में कांग्रेस और भाजपा दोनों के 16-16 पार्षद हैं, जबकि एक पार्षद माकपा और दो निर्दलीय हैं।
पालिकाध्यक्ष पद के लिए मतदान कब होना निर्धारित है?
सूरतगढ़ में पालिकाध्यक्ष पद का चुनाव 21 सितंबर को होना निर्धारित है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·5 दिन पहले

सूरतगढ़ नगर पालिका चुनाव में सोलह-सोलह पार्षदों के टाई और इक्कीस सितंबर को होने वाले अध्यक्ष पद के मतदान से ठीक पहले इस तरह की घटना से चुनावी गणित पूरी तरह प्रभावित हो गया है। एक-एक वोट के इस कांटे के मुकाबले में इस तरह के तनाव से कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता पर बड़े सवाल खड़े होते हैं, जिसका सीधा असर आने वाले मतदान परिणामों पर पड़ना तय है।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

सूरतगढ़ नगर पालिका बोर्ड के इस बेहद कांटे के मुकाबले में, जहाँ कांग्रेस और भाजपा दोनों के पास 16-16 पार्षद हैं और चेयरमैन पद के लिए 21 सितंबर को मतदान होना है, एक पार्षद का इस तरह गायब होना केवल स्थानीय स्तर पर तनाव पैदा नहीं करता, बल्कि यह वित्तीय और कॉर्पोरेट जगत के उन जोखिमों की याद दिलाता है जहाँ अनिश्चितता और राजनीतिक अस्थिरता अचानक बाजार के समीकरणों को हिला कर रख देती है। जब स्थानीय निकाय चुनाव जैसे मामलों में ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो यह सीधे तौर पर निवेशकों और व्यापारिक समुदाय के बीच गवर्नेंस की स्थिरता पर सवाल खड़े करता है, जिसका असर दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक विकास की गति पर पड़ सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

सूरतगढ़ की यह घटना दिखाती है कि कैसे स्थानीय निकायों के कड़े राजनीतिक समीकरणों में प्रशासनिक मशीनरी और पुलिस की संदिग्ध भूमिका लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव को हिला देती है। जब 16-16 के टाई वाले सदन में चेयरमैन चुनाव से ठीक पहले एक पार्षद गायब हो जाए और पुलिस पर उठापटक के गंभीर आरोप लगें, तो यह केवल कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं है, बल्कि यह शासन और संस्थागत निष्पक्षता पर एक गहरा संकट है। यदि इस मामले की न्यायिक या निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो आगामी 21 सितंबर का मतदान न केवल विवादों में घिर जाएगा, बल्कि यह स्थानीय स्वशासन और चुनावी शुचिता पर हमेशा के लिए एक बड़ा दाग छोड़ जाएगा।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

सूरतगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के पास 16-16 पार्षदों की बराबरी और 21 सितंबर को होने वाले मतदान से पहले एक पार्षद का इस तरह संदिग्ध परिस्थितियों में गायब होना केवल स्थानीय अपहरण का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी शुचिता पर सीधा प्रहार है। यदि इस कांटे के मुकाबले में पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर लगे आरोप सही साबित हुए, तो यह प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण होगा, जिसका असर दूरगामी क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

यह मामला सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था और निष्पक्ष जांच की मांग करता है। जब परिवार सीधा आरोप लगा रहा हो कि पुलिसकर्मी पार्षद को साथ ले गए थे, तब गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय को तुरंत न्यायिक या उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच के आदेश देने चाहिए। 21 सितंबर के नजदीक आते मतदान के बीच यह घटना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिस पर चुनाव आयोग को भी स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।

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