सार्वजनिक सेवा में पच्चीस वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के भविष्य की विकास यात्रा को लेकर एक सशक्त दृष्टिकोण सामने रखा। सेवा ज्योति यात्रा के अंतर्गत आयोजित विकसित भारत संकल्प सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के समक्ष आने वाली हर मुश्किल का समाधान यहाँ की विशाल आबादी की सामूहिक शक्ति में निहित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर भारतीय वैमानिकों और पायलटों की प्रतिभा की सराहना हो रही है, उसी प्रकार आने वाले दिनों में देश में निर्मित वाणिज्यिक विमानों का लोहा भी पूरी दुनिया मानेगी।
दूरदर्शी नीतियों और विनिर्माण क्षमता से बदलेगा विमानन परिदृश्य
विमानन क्षेत्र के विस्तार पर चर्चा करते हुए यह बात रेखांकित की गई कि दूरगामी आर्थिक नीतियों और निरंतर किए जा रहे श्रम के दम पर ही आत्मनिर्भरता के इन बड़े लक्ष्यों को प्राप्त किया जाएगा। राष्ट्र के सामने मौजूद विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भले ही राह में बाधाएँ हों, लेकिन हमारे पास उनसे निपटने के लिए 140 करोड़ समाधान भी मौजूद हैं। घरेलू स्तर पर विमानों के निर्माण का यह सपना देश के औद्योगिक सामर्थ्य और आधुनिक तकनीकी क्षमता को वैश्विक पटल पर स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
दार्शनिक परंपरा और ऐतिहासिक संकल्पों की विरासत
देश के वैचारिक और आध्यात्मिक आधार का स्मरण करते हुए स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरबिंदो के ऐतिहासिक विचारों को सामने रखा गया। स्वामी विवेकानंद के उस कथन को उद्धृत किया गया जिसमें उन्होंने एक अद्भुत, अत्यंत गौरवशाली और सामर्थ्यवान राष्ट्र के पुनरुत्थान की बात कही थी। इसके साथ ही महर्षि अरबिंदो के उस विचार का भी उल्लेख हुआ, जिसके अनुसार राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का सूर्य निश्चित रूप से उदित होगा और उसका प्रकाश संपूर्ण विश्व को आलोकित करेगा। इस संदर्भ में यह बात जोड़ी गई कि वर्तमान पीढ़ी उन्हीं पूर्वजों की संतान है जिन्होंने अदम्य साहस और कभी न समाप्त होने वाली जिजीविषा के साथ कठिन तप, त्याग और बलिदान देकर इस आधुनिक स्वरूप की नींव रखी थी।
वैश्विक शीर्ष अर्थव्यवस्था और व्यापक विकास के महत्वाकांक्षी लक्ष्य
वर्तमान समय को बड़े और असाधारण लक्ष्य तय करने की उपयुक्त अवधि बताते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि अब राष्ट्र को हर क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका निभानी होगी। इन प्राथमिकताओं में देश को विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करना, प्रत्येक नागरिक को सशक्त बनाकर निर्धनता से पूरी तरह मुक्त करना और अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे का मान बढ़ाना शामिल है। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, मनोरंजन और सिनेमा हो, स्वास्थ्य एवं कल्याण हो, खेलकूद की दुनिया हो अथवा नवाचार और आधुनिक तकनीक का दायरा हो, लक्ष्य ऐसा होना चाहिए कि दुनिया हर मोर्चे पर भारत की ओर उम्मीद से देखे।
एक दशक में पच्चीस करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर आना
सामाजिक कल्याण और आर्थिक सुधारों की सफलता को दर्शाते हुए गरीबी उन्मूलन के आधिकारिक आँकड़ों को साझा किया गया। किसी समय जो कार्य सर्वथा असंभव जान पड़ता था, वह अब जमीनी हकीकत बन चुका है। पिछले एक दशक की अवधि में पच्चीस करोड़ नागरिकों को गरीबी रेखा के दायरे से सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया है। इस उपलब्धि को 140 करोड़ नागरिकों की असीम क्षमता का प्रमाण बताते हुए कहा गया कि ढाई दशक के प्रशासनिक और सार्वजनिक अनुभव के आधार पर यह स्पष्ट दिखता है कि देश अपनी आँखों के सामने एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है।
2047 के अमृत काल का संकल्प और सेवा ज्योति यात्रा
सौ वर्ष पहले की जनसांख्यिकी से तुलना करते हुए बताया गया कि उस दौर में देश की जनसंख्या 40 करोड़ से भी कम थी, जबकि आज 140 करोड़ से अधिक लोग एकजुट होकर आगे बढ़ रहे हैं। वर्ष 2026 में देखा जा रहा यह सपना 2047 तक पूर्ण रूप से साकार होकर रहेगा और देश को रुकने का कोई कारण नहीं है। इस सभा का मूल उद्देश्य केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ सभी पात्र लाभार्थियों तक सुनिश्चित करना और आम जनमानस को 2047 तक एक पूर्ण विकसित राष्ट्र के निर्माण के संकल्प से सक्रिय रूप से जोड़ना है।













