सार्वजनिक जीवन और जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वडनगर रेलवे स्टेशन पर एक विशेष आयोजन संपन्न हुआ, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुरुआती दिनों की स्मृतियों को ताजा किया गया। इस समारोह में उनके पुराने सहपाठियों के साथ-साथ उस दौर में रेलवे स्टेशन पर काम करने वाले चाय विक्रेताओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। इस ऐतिहासिक स्टेशन से जुड़े उनके जीवन के शुरुआती संघर्षों और अनुभवों को सभी उपस्थित लोगों ने बड़े आत्मीय भाव से याद किया।
सहपाठियों ने साझा की छात्र जीवन और नेतृत्व की यादें
आयोजन के दौरान मंच से बोलते हुए प्रधानमंत्री के पूर्व सहपाठियों ने उनके विद्यार्थी जीवन से जुड़े कई संस्मरण सामने रखे। उन्होंने बताया कि छात्र जीवन के दौरान ही उनके भीतर नेतृत्व की गहरी क्षमता साफ झलकती थी। वे केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहते थे, बल्कि सामाजिक अभियानों, सेवा कार्यों और विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। सहपाठियों ने यह भी रेखांकित किया कि उस समय भी उनके स्वभाव में असाधारण सादगी और एक तरह के वैराग्य का प्रभाव देखने को मिलता था।
वडनगर के चाय विक्रेताओं ने महसूस किया गर्व
वडनगर स्टेशन पर काम करने वाले चाय विक्रेताओं ने भी प्रधानमंत्री से जुड़ी अपनी पुरानी स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि देश के शीर्ष पद पर पहुंचे व्यक्ति से जुड़े इस आत्मीय कार्यक्रम का हिस्सा बनना उनके लिए अत्यंत गर्व और सम्मान की बात है। इसी अवसर पर ‘मोदी गवर्नेंस’ नामक एक नई पुस्तक का औपचारिक विमोचन भी संपन्न हुआ। पुस्तक के लेखक के अनुसार, इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक प्राथमिकताओं और शासन शैली का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इस पूरे कार्यक्रम के लगभग 10-11 मिनट के दृश्य डिजिटल मंचों के लिए भी तैयार किए गए हैं।
दिल्ली में सेवा ज्योति यात्रा और 2047 का विजन
राजधानी दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में भी इस अवसर पर विकसित भारत संकल्प सभा का भव्य आयोजन किया गया। मुख्य संबोधन से पूर्व उन्होंने ‘सेवा ज्योति यात्रा’ (सेवा संकल्प अभियान) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री भावुक हो उठे और उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी यह कल्पना नहीं की थी कि जीवन में ऐसा मुकाम आएगा जब वे समस्त देशवासियों के प्रति इस रूप में आभार व्यक्त कर सकेंगे।
इतने लंबे जनसेवा काल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे आज भी खुद को एक निरंतर सीखने वाला विद्यार्थी ही मानते हैं। वर्ष 2047 तक भारत को पूरी तरह विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने नया नारा दिया और कहा कि अंतरिक्ष में ऐतिहासिक प्रगति, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने और विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य देशवासी मिलकर हासिल करेंगे।



















