राजस्थान के रास्ते दौड़ेंगी 3 नई रेल गाड़ियां, तीर्थ यात्रियों और व्यापारियों को मिलेगा सीधा लाभमध्य एशिया में भारत का बड़ा रक्षा सौदा, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान खरीदेंगे स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणालीमेवाड़ की गवरी में धधकती बातियों के बीच अग्नि परीक्षा, 40 दिनों की साधना के बाद होता है अनूठा समापन अनुष्ठानझारखंड में मानसून की रवानगी के बीच 13 जिलों में आंधी और आकाशीय बिजली का सायाजेडी वेंस ने युद्ध खत्म करने के लिए ईरान के सामने रखी यूरेनियम संवर्धन घटाने की शर्त, कच्चे तेल और वैश्विक बाजारों पर दिखा असरराजस्थान में खाद संकट पर नरेश मीणा का अनशन पांचवें दिन टोंक पहुंचा, महिलाओं ने की खाना खाने की भावुक गुहारसेपोलिया टेस्टनेट पर शुरू हुआ एथेरियम का ग्लैमस्टर्डम अपग्रेड, 200 मिलियन तक बढ़ाई गई गैस लिमिटचुनाव आयोग मार्च के दौरान राहुल गांधी को हिरासत में लेने पर बर्लिन से बोले शशि थरूर, सरकार के रवैये को बताया शर्मनाकअमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और कच्चे तेल के नरम पड़ने से सोने में उछाल, $4,165 के करीब पहुंचा भावकर्ज की ईएमआई से लेकर टैक्स रिफंड तक, लगातार दो दिन होंगे आम जनता की जेब से जुड़े फैसले
मध्य एशिया में भारत का बड़ा रक्षा सौदा, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान खरीदेंगे स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणालीभारत
7 अक्तू॰ 2026, 6:06 am (55 मिनट पहले)· 1

मध्य एशिया में भारत का बड़ा रक्षा सौदा, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान खरीदेंगे स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणाली

भारत अपनी स्वदेशी आकाश एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली का निर्यात ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को करेगा, जिससे मध्य एशियाई रक्षा बाजार में देश का रणनीतिक प्रभाव और मजबूत हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में भारत के स्वदेशी सैन्य साजो-सामान की मांग तेजी से बढ़ रही है। हाल के वर्षों में रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के बाद अब भारत ने प्रमुख निर्यातक देशों की सूची में अपनी स्थिति सुदृढ़ करनी शुरू कर दी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय रक्षा उपकरणों के उत्कृष्ट प्रदर्शन ने दुनिया भर के सुरक्षा विश्लेषकों और खरीदार देशों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इसके बाद से ही विभिन्न मित्र देशों द्वारा भारत में निर्मित आधुनिक हथियारों की खरीद में गहरी रुचि दिखाई जा रही है। फिलीपींस द्वारा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदे जाने के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया के कई अन्य देश भी इस प्रणाली को हासिल करने की प्रक्रिया में हैं, जिनमें से कुछ के साथ बातचीत चल रही है तो कुछ के साथ सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। इसी कड़ी में अब भारत की सतह से हवा में मार करने वाली स्वदेशी आकाश एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली ने मध्य एशिया के सामरिक बाजार में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है।

आर्मेनिया को आकाश मिसाइल की आपूर्ति किए जाने के बाद अब ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान ने भी इस आधुनिक रक्षा प्रणाली को अपनी सेनाओं में शामिल करने का फैसला किया है। भारत ने इन दोनों मध्य एशियाई देशों के साथ हुए सौदों की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने हाल ही में इन महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों की पुष्टि करते हुए आकाश मिसाइल को भारत के रक्षा निर्यात अभियान की सबसे बड़ी कामयाबियों में से एक करार दिया। यह निर्यात समझौता भारत की उस दीर्घकालिक वैश्विक रणनीति को दर्शाता है, जिसका मकसद दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातकों के समूह में शामिल होना है। पारंपरिक रूप से इस पूरे क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले पड़ोसी देशों के लिए भारतीय रक्षा प्रणालियों का यह प्रसार एक नई कूटनीतिक और रणनीतिक चुनौती बन रहा है।

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आकाश मिसाइल प्रणाली की तकनीकी विशेषताएं और मारक क्षमता

आकाश मिसाइल प्रणाली को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ द्वारा पूरी तरह घरेलू तकनीक से तैयार किया गया है। यह सतह से हवा में मार करने वाली एक अत्यंत विश्वसनीय रक्षा प्रणाली है, जो किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, आकाश प्रणाली 100 मीटर की न्यूनतम ऊंचाई से लेकर 20 किलोमीटर की अधिकतम ऊंचाई तक उड़ने वाले दुश्मन के हवाई लक्ष्यों को बेहद सटीकता से नष्ट कर सकती है। इसकी प्रभावी ऑपरेशनल मारक दूरी 4.5 किलोमीटर से 25 किलोमीटर तक दर्ज की गई है।

शारीरिक संरचना और वजन की बात करें तो आकाश मिसाइल की कुल लंबाई लगभग 5.87 मीटर है, जबकि इसका वजन तकरीबन 710 किलोग्राम है। यह मिसाइल अत्याधुनिक कमांड गाइडेंस तकनीक के आधार पर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है और पलक झपकते ही उसे ढेर कर देती है। हाल के दिनों में इस प्रणाली के और उन्नत संस्करण तैयार किए गए हैं, जिनमें आकाश प्राइम और नेक्स्ट जेनरेशन आकाश-एनजी शामिल हैं। इन नए संस्करणों में अधिक संवेदनशील सेंसर और आधुनिक तकनीक जोड़ी गई है, जिससे मिसाइल की मारक क्षमता और सटीक हो गई है। घरेलू स्तर पर लड़ाकू विमान तेजस के निर्माण के साथ-साथ इस तरह के एयर डिफेंस सिस्टम ने भारत के विनिर्माण कौशल को दुनिया के सामने साबित किया है।

पांच मुख्य बिंदुओं में समझिए आकाश एयर डिफेंस सिस्टम की ताकत

आकाश प्रणाली की कार्यप्रणाली और उसकी रणनीतिक मजबूती को पांच प्रमुख तकनीकी पहलुओं से समझा जा सकता है

  • स्वदेशी और पूरी तरह गतिशील ढांचा: आकाश मिसाइल प्रणाली को भारत में महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्रों और संवेदनशील ठिकानों को हवाई हमलों से बचाने के लिए तैयार किया गया है। यह प्रणाली लड़ाकू विमानों, हमलावर हेलीकॉप्टरों, मानव रहित ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों जैसे खतरों को आसमान में ही खत्म करने की पूरी क्षमता रखती है।
  • 25 किलोमीटर तक मारक सीमा और उच्च गतिशीलता: आकाश 4.5 से 25 किलोमीटर की दूरी में किसी भी खतरे को भांपकर नष्ट कर सकती है। इसके नए उन्नत संस्करणों में मारक रेंज को और ज्यादा विस्तारित किया गया है। इसके अलावा, 100 मीटर से 20 किलोमीटर की ऊंचाई तक मार करने के साथ-साथ इसकी मोबाइल लॉन्चर तकनीक इसे युद्ध के मैदान में एक स्थान से दूसरे स्थान पर बेहद तेजी से तैनात करने की सहूलियत देती है।
  • एक साथ 12 ठिकानों पर प्रहार: आकाश की एक बैटरी प्रणाली एक समय में 64 विभिन्न हवाई लक्ष्यों की लगातार निगरानी और ट्रैकिंग कर सकती है। इनमें से 12 सबसे खतरनाक लक्ष्यों पर यह प्रणाली एक साथ मिसाइलें दागकर सटीक कार्रवाई करने में सक्षम है। इस पूरी प्रक्रिया में लक्ष्य की शिनाख्त और ट्रैकिंग का मुख्य दायित्व राजेंद्र 3डी फेज्ड-एरे रडार निभाता है, जो बेहद अचूक माना जाता है।
  • डीआरडीओ का डिजाइन और बीडीएल-बीईएल का निर्माण: डीआरडीओ द्वारा विकसित इस मिसाइल प्रणाली के उत्पादन का जिम्मा भारत डायनेमिक्स लिमिटेड यानी बीडीएल और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी बीईएल संभालते हैं। इसका मोबाइल लॉन्चर, निगरानी रडार, बैटरी कंट्रोल सेंटर और ग्रुप कंट्रोल सेंटर मिलकर इसे एक बेहद मजबूत नेटवर्क-आधारित संचालन क्षमता प्रदान करते हैं।
  • वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूत पकड़: भारत के रक्षा निर्यात पोर्टफोलियो में आकाश अब सबसे प्रमुख उत्पाद बन चुकी है। आर्मेनिया, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे देशों में इसकी आपूर्ति से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका कद बढ़ा है। शुरुआती मॉडल के बाद आकाश-1एस, आकाश प्राइम और नई पीढ़ी के आकाश-एनजी के आने से वैश्विक रक्षा खरीदारों के बीच इसकी विश्वसनीयता और मांग में जबर्दस्त इजाफा हुआ है।

मध्य एशिया के सामरिक संतुलन में आकाश का बढ़ता महत्व

मध्य एशिया के देशों में भारतीय आकाश प्रणाली का प्रवेश सिर्फ एक वाणिज्यिक सौदा नहीं है, बल्कि इसके गहरे सामरिक और भू-राजनीतिक निहितार्थ हैं। लंबे समय से यह क्षेत्र बड़े देशों के रणनीतिक और सैन्य प्रभाव का केंद्र रहा है। यूक्रेन संकट शुरू होने के बाद से रूस द्वारा हथियारों के निर्यात में कुछ कमी दर्ज की गई है, जिसका लाभ उठाकर चीन ने मध्य एशिया में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की थी। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी सिपरी के जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, रूस अभी भी मध्य एशियाई क्षेत्र का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता देश बना हुआ है, लेकिन चीन विशेष रूप से उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे देशों में अपना पैर पसारने का प्रयास कर रहा है।

ऐसे नाजुक रणनीतिक माहौल में भारत की सशक्त एंट्री ने क्षेत्रीय देशों को अपने रक्षा विकल्पों में विविधता लाने का एक सुरक्षित और भरोसेमंद मंच दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान द्वारा आकाश प्रणाली को चुनना इस बात का संकेत है कि वे हथियार आपूर्ति के मामले में केवल रूस या चीन पर अपनी निर्भरता को सीमित नहीं रखना चाहते। तुर्कमेनिस्तान पहले ही चीनी एयर डिफेंस सिस्टम का उपयोग कर रहा है, और ऐसे में भारतीय आकाश मिसाइल प्रणाली उसके मौजूदा सुरक्षा तंत्र में मध्यम स्तर के हवाई खतरों से निपटने के लिए एक संतुलित और प्रभावी एयर शील्ड की भूमिका निभाएगी।

सवाल-जवाब

भारत किन दो नए देशों को आकाश मिसाइल प्रणाली निर्यात कर रहा है?
भारत मध्य एशिया के दो प्रमुख देशों, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को स्वदेशी आकाश एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली निर्यात कर रहा है।
आकाश मिसाइल प्रणाली का विकास और निर्माण किसने किया है?
इस प्रणाली को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है, जबकि इसका निर्माण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) द्वारा किया जाता है।
आकाश मिसाइल की मारक दूरी और परिचालन ऊंचाई कितनी है?
आकाश मिसाइल की मारक क्षमता 4.5 से 25 किलोमीटर तक है और यह 100 मीटर से 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ रहे लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है।
आकाश मिसाइल प्रणाली एक साथ कितने हवाई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है?
इस प्रणाली का राजेंद्र 3डी रडार एक समय में 64 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और इनमें से 12 लक्ष्यों पर एक साथ मिसाइलें दागकर कार्रवाई कर सकता है।
मध्य एशिया में आकाश मिसाइल का यह निर्यात सौदा रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सौदा मध्य एशियाई देशों को हथियारों के लिए रूस और चीन पर अपनी निर्भरता कम करने का अवसर देता है और क्षेत्र में भारत के कूटनीतिक प्रभाव को मजबूत करता है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 मिनट पहले

ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान तक हथियार पहुंचना बड़ी बात है, पर डिलीवरी समय पर होगी या नहीं, इस पर शक है।

Ravikash Gupta@ravikash·19 मिनट पहले

करन भाई, डिलीवरी लेट होने की बात पुरानी हो गई। अब फिलीपींस और आर्मेनिया वाले मामलों में समय पर काम हुआ है, तो इस बार भी शक करना ठीक नहीं लगता।

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