राजस्थान में किसानों की समस्याओं और खाद की कमी को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब तेज होता जा रहा है। बारां से राजधानी जयपुर के लिए पैदल कूच पर निकले किसान नेता नरेश मीणा के आमरण अनशन का पांचवां दिन टोंक में बीता। पांच दिनों से बिना अन्न-जल के पदयात्रा कर रहे नरेश मीणा जैसे ही टोंक पहुंचे, बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और किसान उनके समर्थन में उमड़ पड़े। इस दौरान जुटी भीड़ में ग्रामीण महिलाओं की मौजूदगी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिन्होंने किसान नेता की बिगड़ती शारीरिक स्थिति को देखकर बेहद भावुक अपील की।
टोंक में महिलाओं की भावुक अपील और एकजुटता
टोंक पड़ाव के दौरान माहौल उस समय बेहद भावुक हो गया जब स्थानीय महिलाओं ने नरेश मीणा से मिलकर अनशन समाप्त करने की गुहार लगाई। महिलाओं ने कहा कि भले ही खाद न मिले, लेकिन आप खाना खा लीजिए। ग्रामीण महिलाओं ने उनके साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव दिखाते हुए यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि वे भोजन नहीं करेंगे, तो गांव की महिलाएं भी अन्न ग्रहण नहीं करेंगी। मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारी और समर्थक इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए। महिलाओं का यह रुख दिखाता है कि खाद की अनुपलब्धता का संकट भले ही खेतों में गहरा हो, लेकिन उनके लिए इस हक की लड़ाई लड़ रहे नेता की जान सबसे ज्यादा कीमती है।
बारां से जयपुर कूच और शहीद स्मारक पर बड़े प्रदर्शन की तैयारी
नरेश मीणा ने राज्य में किसानों को समय पर खाद की आपूर्ति सुनिश्चित कराने और खेती से जुड़ी अन्य समस्याओं को लेकर यह आंदोलन छेड़ा है। सरकार का ध्यान इन जमीनी दिक्कतों की ओर खींचने के लिए उन्होंने बारां से जयपुर तक की लंबी पदयात्रा शुरू की है। टोंक में कुछ समय रुकने के बाद उनका कारवां अब राजधानी जयपुर के शहीद स्मारक की ओर आगे बढ़ रहा है। किसान नेता ने घोषणा की है कि वे जयपुर स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर राज्यव्यापी स्तर पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे। लगातार पांच दिनों की भूख-प्यास के बावजूद जारी यह पदयात्रा अब ग्रामीण इलाकों में किसानों के बीच व्यापक समर्थन जुटा रही है।
तीसरे मोर्चे के नेताओं का मिला खुला साथ
इस आंदोलन को व्यापक राजनीतिक और सामाजिक दबाव में बदलने के लिए नरेश मीणा ने राजस्थान के तीसरे मोर्चे से जुड़े तमाम सियासी दलों और नेताओं से एक मंच पर आने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि किसानों के हक में सभी गैर-सत्तारूढ़ ताकतों को मतभेद भुलाकर एकजुट होना चाहिए। उनकी इस मांग को विपक्षी खेमे से मजबूत समर्थन भी मिला है। सांसद हनुमान बेनीवाल और पूर्व मंत्री या विधायक का कोई पद जोड़े बिना राजेंद्र गुढ़ा सहित कई प्रमुख नेताओं ने खुले तौर पर आंदोलन को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। इन प्रमुख नेताओं के साथ आने से आंदोलन को नई ताकत मिली है और अब प्रशासन की नजरें जयपुर में प्रस्तावित प्रदर्शन पर टिकी हैं।



















