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तमिलनाडु में टीएएसएमएसी की ऑनलाइन शराब बुकिंग और क्यूआर कोड प्रणाली पर रोक की मांग, मद्रास हाईकोर्ट में जनहित याचिकाभारत
14 अग॰ 2026, 6:33 pm (42 दिन पहले)· 2

तमिलनाडु में टीएएसएमएसी की ऑनलाइन शराब बुकिंग और क्यूआर कोड प्रणाली पर रोक की मांग, मद्रास हाईकोर्ट में जनहित याचिका

तमिलनाडु में सरकारी निगम द्वारा शुरू की गई ऑनलाइन शराब बुकिंग व्यवस्था के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में उम्र के सत्यापन और क्यूआर कोड के दुरुपयोग से जुड़ी खामियों को उजागर करते हुए इसे असंवैधानिक ठहराने की गुहार लगाई गई है।

तमिलनाडु में शराब की उपलब्धता को डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाने के लिए शुरू की गई नई व्यवस्था कानूनी विवाद में घिर गई है। तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (टीएएसएमएसी) द्वारा संचालित ऑनलाइन शराब बुकिंग और दुकानों से संग्रहण की सुविधा को चुनौती देते हुए मद्रास हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। एडवोकेट्स फोरम फॉर सोशल जस्टिस के अध्यक्ष अधिवक्ता के. बालू द्वारा दायर इस याचिका में मांग की गई है कि क्यूआर कोड के जरिए शराब वितरण करने की इस प्रक्रिया पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि राज्य सरकार का संवैधानिक कर्तव्य शराब के सेवन पर नियंत्रण पाना है, जबकि इस नई ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से इसे खरीदना और अधिक आसान और सुलभ बनाया जा रहा है।

क्यूआर कोड से पिकअप और ऑनलाइन बुकिंग की पूरी प्रक्रिया

टीएएसएमएसी की ओर से शुरू की गई इस डिजिटल प्रणाली के तहत 21 वर्ष या उससे अधिक आयु के ग्राहकों को ऑनलाइन पोर्टल पर शराब की उपलब्धता जांचने की सुविधा दी गई है। ग्राहक अपने मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से किसी भी संबंधित आउटलेट में उपलब्ध शराब की किस्मों और उनकी कीमतों की पूरी जानकारी देख सकते हैं। इसके बाद ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार ऑनलाइन भुगतान करके बुकिंग पूरी कर सकता है। भुगतान सफल होने के बाद ग्राहक को एक डिजिटल क्यूआर कोड प्राप्त होता है। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में होम डिलीवरी का कोई प्रावधान शामिल नहीं किया गया है। इसका अर्थ यह है कि शराब को ग्राहक के घर तक नहीं पहुंचाया जाएगा, बल्कि ग्राहक को खुद चिन्हित टीएएसएमएसी दुकान पर जाकर काउंटर पर क्यूआर कोड दिखाकर अपनी बुक की गई शराब हासिल करनी होगी।

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उम्र के सत्यापन और क्यूआर कोड के दुरुपयोग पर उठे गंभीर सवाल

जनहित याचिका में ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया के दौरान उम्र की जांच के लिए अपनाए जा रहे तरीकों पर सबसे ज्यादा सवाल खड़े किए गए हैं। वर्तमान में ग्राहक की उम्र 21 वर्ष से अधिक है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए केवल सेल्फ डिक्लेरेशन और मोबाइल पर आने वाले ओटीपी वेरिफिकेशन का सहारा लिया जा रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह सुरक्षा जांच बेहद कमजोर है और यह नाबालिगों को शराब खरीदने से रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित होगी। याचिका में यह भी आशंका जताई गई है कि कोई भी नाबालिग आसानी से किसी वयस्क रिश्तेदार या परिचित के अकाउंट का उपयोग करके ऑनलाइन ऑर्डर दे सकता है। इसके अलावा क्यूआर कोड के हस्तांतरण से जुड़ी एक बड़ी तकनीकी खामी की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। याचिका के अनुसार यदि किसी ऑर्डर का क्यूआर कोड किसी अन्य व्यक्ति के पास पहुंच जाता है, तो वह व्यक्ति काउंटर पर जाकर बिना किसी अतिरिक्त पहचान जांच के शराब का संग्रह कर सकता है।

नियमों में बिना संशोधन सर्कुलर जारी करने का आरोप

अदालत में दायर याचिका में टीएएसएमएसी द्वारा 7 अगस्त को जारी किए गए सर्कुलर की वैधता को भी सीधी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार ऑनलाइन शराब बिक्री जैसी नई और व्यापक व्यवस्था को लागू करने से पहले तमिलनाडु शराब खुदरा बिक्री (दुकानों और बार में) नियम, 2003 में आवश्यक कानूनी संशोधन नहीं किए गए। अधिवक्ता का कहना है कि राज्य में शराब से संबंधित सभी कानूनों और नियमावलियों का मूल उद्देश्य इसकी बिक्री और उपभोग को सख्ती से विनियमित करना है। ऐसे में आवश्यक वैधानिक ढांचे में संशोधन किए बिना और बिना किसी नियामक बदलाव के केवल एक प्रशासनिक सर्कुलर के आधार पर ऑनलाइन बुकिंग चालू कर देना प्रक्रियात्मक और कानूनी रूप से गलत है।

संविधान के अनुच्छेद 47 और राज्य के संवैधानिक दायित्व की अनदेखी

कानूनी दलीलों के दौरान याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 47 का प्रमुखता से हवाला दिया गया है। संविधान का अनुच्छेद 47 राज्य सरकार को यह निर्देश देता है कि वह नागरिकों के पोषण स्तर, जीवन स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए निरंतर प्रयास करे तथा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मादक पेय पदार्थों के सेवन पर पूरी तरह रोक लगाने की दिशा में कदम उठाए। जनहित याचिका में जोर देकर कहा गया है कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से शराब की पहुंच को सुलभ और त्वरित बनाना इस संवैधानिक निर्देश का स्पष्ट उल्लंघन है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि जब राज्य की प्राथमिकता शराब के सेवन को धीरे-धीरे कम करने की होनी चाहिए, तब प्रशासनिक मशीनरी इसे अधिक सुविधाजनक बनाने वाली प्रणालियों को बढ़ावा क्यों दे रही है।

राजस्व संवर्धन समिति और सरकारी कमाई की मंशा पर कानूनी सवाल

यह अदालती विवाद केवल ऑनलाइन बुकिंग सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की राजस्व नीतियों तक फैला हुआ है। याचिका में राज्य सरकार द्वारा 24 जुलाई को जारी किए गए उस आदेश के हिस्से को भी निरस्त करने की मांग की गई है, जिसके तहत राजस्व संवर्धन समिति का गठन किया गया था। इस समिति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वह शराब के नियमन और आबकारी कर नीतियों में बदलाव करके मानव उपभोग की शराब से सरकार की आय और राजस्व को बढ़ाने के उपाय सुझाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि शराब की बिक्री बढ़ाकर सरकारी खजाना भरने की रणनीति बनाना संविधान के अनुच्छेद 47 के तहत सौंपे गए कल्याणकारी दायित्वों के पूरी तरह विपरीत है।

दो दिनों में 20 लाख की बिक्री और कर्मचारियों पर बढ़ता दबाव

जनहित याचिका में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इस ऑनलाइन व्यवस्था की शुरुआत के शुरुआती दो दिनों के भीतर यानी 8 अगस्त और 9 अगस्त के दौरान ही पोर्टल के माध्यम से लगभग 20 लाख रुपये मूल्य की शराब बुक की गई। याचिकाकर्ता ने टीएएसएमएसी आउटलेट्स पर कार्यरत कर्मचारियों की कामकाजी परिस्थितियों पर भी चिंता व्यक्त की है। आउटलेट्स में पहले से ही कर्मचारियों की कमी है, ऐसे में काउंटर बिक्री के साथ-साथ ऑनलाइन ऑर्डर प्रबंधित करने और क्यूआर कोड स्कैन करने का अतिरिक्त काम कर्मचारियों पर अत्यधिक मानसिक और शारीरिक दबाव बना रहा है। याचिका में यह चेतावनी भी दी गई है कि दुकानों के बाहर ऑनलाइन बुकिंग वाले ग्राहकों की अचानक भीड़ एकत्र होने से स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

अदालत से की गई मुख्य मांगें और कानूनी याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता ने मद्रास हाईकोर्ट से प्रार्थना की है कि वह टीएएसएमएसी की ऑनलाइन शराब बुकिंग प्रणाली और क्यूआर कोड के आधार पर शराब वितरण की प्रक्रिया पर तुरंत अंतरिम रोक लगाने का आदेश जारी करे। इसके साथ ही याचिका में ऑनलाइन बुकिंग योजना और राजस्व संवर्धन समिति से संबंधित प्रावधानों को तमिलनाडु निषेध अधिनियम, 1937 और संविधान के अनुच्छेद 47 के प्रतिकूल मानते हुए पूरी तरह असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एमआर एलवरसन और वी. सिवरमन उच्च न्यायालय में पक्ष रख रहे हैं।

सवाल-जवाब

मद्रास हाईकोर्ट में याचिका क्यों दायर की गई है?
टीएएसएमएसी की ऑनलाइन शराब बुकिंग और क्यूआर कोड के माध्यम से दुकान से शराब संग्रह की नई व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए यह जनहित याचिका दायर की गई है।
ऑनलाइन शराब बुकिंग की व्यवस्था कैसे काम करती है?
21 साल से अधिक उम्र के ग्राहक पोर्टल पर शराब की उपलब्धता और दाम देखकर भुगतान करते हैं, जिसके बाद प्राप्त क्यूआर कोड को दुकान पर दिखाकर शराब ली जाती है।
क्या इस सुविधा के तहत शराब की होम डिलीवरी की जा रही है?
नहीं, इस व्यवस्था में होम डिलीवरी का कोई प्रावधान नहीं है। ग्राहक को खुद दुकान पर जाकर ही शराब का संग्रह करना होता है।
क्यूआर कोड व्यवस्था पर क्या मुख्य आपत्ति जताई गई है?
याचिकाकर्ता का कहना है कि ओटीपी आधारित जांच नाबालिगों को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है और क्यूआर कोड किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ में जाने पर दुरुपयोग हो सकता है।
शुरुआती दो दिनों में कितनी शराब की बिक्री का दावा किया गया है?
याचिका में दावा किया गया है कि 8 और 9 अगस्त के बीच ऑनलाइन पोर्टल के जरिए लगभग 20 लाख रुपये की शराब की बिक्री हुई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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