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राजस्थान में आधी ग्रामीण सरकार संभालेंगी महिलाएं, पंचायत चुनाव 2026 में 7,200 महिला सरपंच रचेंगी इतिहासराजस्थान
25 सित॰ 2026, 10:41 am (27 मिनट पहले)· 0

राजस्थान में आधी ग्रामीण सरकार संभालेंगी महिलाएं, पंचायत चुनाव 2026 में 7,200 महिला सरपंच रचेंगी इतिहास

राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 में परिसीमन और पचास फीसदी आरक्षण के चलते करीब 7,200 ग्राम पंचायतों की कमान महिला सरपंचों के हाथ होगी। वार्ड पंच स्तर पर भी पैंसठ हजार से अधिक महिलाएं चुनी जाएंगी।

राजस्थान की ग्रामीण सियासत में आगामी पंचायत चुनाव 2026 एक ऐतिहासिक परिवर्तन की नींव रखने जा रहा है। गांवों की प्रशासनिक व्यवस्था और चौपालों के फैसले अब बड़े पैमाने पर महिला नेतृत्व के इर्द-गिर्द घूमेंगे। हालिया परिसीमन और पचास प्रतिशत महिला आरक्षण के कठोर क्रियान्वयन के बाद प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में से लगभग 7,200 पंचायतों में सरपंच की कुर्सी पर महिलाएं आसीन होंगी। यह बदलाव केवल चुनावी सांख्यिकी तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर सामाजिक ताने-बाने और निर्णय प्रक्रिया को पूरी तरह नया रूप देने वाला साबित होगा।

बीते चुनावी चक्र से तुलना की जाए तो यह उछाल बेहद उल्लेखनीय नजर आता है। पिछले पंचायत चुनावों के दौरान राज्य भर में लगभग 5,670 महिला सरपंच चुनी गई थीं। नई सीमाओं के निर्धारण और बढ़े हुए पंचायत दायरों की वजह से यह आंकड़ा छलांग लगाकर सीधे 7,200 के करीब पहुंच रहा है। इसका व्यवहारिक प्रभाव यह होगा कि राजस्थान के हर दूसरे गांव का प्रशासनिक और विकासात्मक नेतृत्व सीधे एक महिला सरपंच के जिम्मे होगा। ग्राम सभाओं की बैठकों, बजट आवंटन और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े निर्णयों की बागडोर अब पूरी तरह महिला प्रतिनिधियों के हाथों में केंद्रित रहेगी।

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परिसीमन के नए समीकरण और श्रेणियों का आरक्षण

पंचायतों के पुनर्गठन और परिसीमन के फलस्वरूप राजस्थान में ग्राम पंचायतों की समग्र संख्या बढ़कर 14,403 तक पहुंच चुकी है। इस प्रशासनिक विस्तार ने जमीनी राजनीति के पुराने समीकरणों को उलट दिया है। कुल 14,403 सरपंच पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति के लिए तय किए गए हैं। वहीं अनुसूचित जाति के खाते में 2,493 पद और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 1,961 पद सुरक्षित किए गए हैं। इन सभी आरक्षित श्रेणियों के भीतर महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत आरक्षण की अनिवार्यता को पूरी मुस्तैदी से अमल में लाया गया है, जिससे हर वर्ग की महिलाओं को समुचित भागीदारी मिली है।

वार्ड पंचों में भी दिखेगा महिलाओं का व्यापक प्रतिनिधित्व

ग्राम पंचायतों के मुख्य पद यानी सरपंच के साथ-साथ वार्ड स्तर पर भी महिला प्रतिनिधियों की संख्या में बड़ा इजाफा देखा जा रहा है। पिछले कार्यकाल में जहां राज्य भर में लगभग 54 हजार महिला वार्ड पंच निर्वाचित होकर आई थीं, वहीं आगामी चुनावों में इनकी तादाद 65 हजार के आंकड़े को पार करने का अनुमान है। पूरे प्रदेश में वार्ड पंचों के कुल करीब 1.30 लाख पद मौजूद हैं। इनमें से 21,962 पद अनुसूचित जाति, 19,117 पद अनुसूचित जनजाति और लगभग 15 हजार पद अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रखे गए हैं। इन सभी श्रेणियों में भी महिलाओं के पचास फीसदी कोटे को यथावत लागू किया गया है।

जनजातीय बेल्ट में सभी पद आरक्षित, लॉटरी प्रक्रिया पूरी

आरक्षण की इस नई व्यवस्था का सर्वाधिक गहरा असर राजस्थान के आदिवासी बहुल जिलों में सामने आया है। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जैसे पूर्ण जनजातीय इलाकों में सरपंच और वार्ड पंच के शत-प्रतिशत पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए ही आरक्षित किए गए हैं। इन जिलों की स्थानीय राजनीति और सामुदायिक फैसले पूरी तरह जनजातीय आरक्षण ढांचे के तहत संचालित होंगे। हालांकि आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान श्रीगंगानगर जिले के घड़साना क्षेत्र में स्थानीय असंतोष और विरोध की स्थिति बनी थी, जिसके चलते लॉटरी प्रक्रिया को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा था, जिसे बाद में प्रशासन ने सफलतापूर्वक संपन्न करा लिया।

ग्रामीण चौपालों पर वास्तविक अधिकार की ओर कदम

राष्ट्रीय फलक पर लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के सशक्त प्रतिनिधित्व के लिए संसद द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया है, लेकिन राजस्थान ने स्थानीय स्वशासन के स्तर पर पचास फीसदी आरक्षण का प्रावधान पहले से ही लागू कर रखा है। पंचायत भवनों में अब महिला प्रतिनिधियों की उपस्थिति केवल प्रतीकात्मक या कागजी नहीं रहेगी, बल्कि वे सीधे तौर पर सत्ता और विकास योजनाओं का संचालन करेंगी। राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 गांवों में महिला स्वावलंबन और नीतिगत नेतृत्व का एक नया अध्याय लिखने के लिए तैयार खड़ा है।

सवाल-जवाब

राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 में कुल कितनी ग्राम पंचायतों में चुनाव होंगे?
हालिया परिसीमन के बाद राज्य में कुल 14,403 ग्राम पंचायतों में चुनाव कराए जाएंगे।
कितनी पंचायतों की कमान महिला सरपंचों के पास होगी?
पचास प्रतिशत आरक्षण लागू होने के कारण प्रदेश की करीब 7,200 ग्राम पंचायतों में महिला सरपंच चुनी जाएंगी।
पिछले चुनावों की तुलना में महिला सरपंचों की संख्या में कितना बदलाव आया है?
पिछले चुनाव में करीब 5,670 महिला सरपंच चुनी गई थीं, जो इस बार बढ़कर लगभग 7,200 हो जाएंगी।
वार्ड पंच के पदों पर महिलाओं की संख्या कितनी रहने की उम्मीद है?
राज्य में वार्ड पंच के करीब 1.30 लाख पदों में से 65 हजार से अधिक पदों पर महिलाएं चुनी जाएंगी।
किन जिलों में सरपंच और वार्ड पंच के सभी पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं?
बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जैसे आदिवासी बहुल जिलों में सभी पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किए गए हैं।
आरक्षण प्रक्रिया के दौरान किस क्षेत्र में विरोध देखा गया था?
श्रीगंगानगर के घड़साना क्षेत्र में स्थानीय विरोध के कारण आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था, जिसे बाद में पूरा किया गया।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 मिनट पहले

राजस्थान के गांवों में महिलाओं को इतनी बड़ी कमान मिलना वाकई बड़ा बदलाव है। क्या इन महिला सरपंचों को फैसलों में असली आज़ादी मिलेगी या काम सिर्फ कागज़ों पर पतियों के नाम पर चलेगा?

Rohan Verma@rohan-verma·5 मिनट पहले

करण भाई, 'पति-सरपंच' वाली बात हर जगह नहीं होती। कई जगहों पर महिलाएं अब खुद फैसले ले रही हैं और गांव की तस्वीर बदल रही हैं।

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