लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में सामने आए कथित धर्मांतरण मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। स्पेशल टास्क फोर्स ने इस पूरे नेटवर्क की पड़ताल करते हुए अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। मामले में आरोपी डॉक्टर रमीज को 48 घंटे की पुलिस रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की गई। इस दौरान जांच अधिकारियों ने आरोपी के सामने 100 से ज्यादा सवाल रखे, जिनसे इस पूरे प्रकरण से जुड़े कई बेहद अहम सुराग और साक्ष्य हाथ लगे हैं। पूछताछ से पहले पुलिस ने डॉक्टर रमीज के कब्जे से एक मोबाइल फोन और दो लैपटॉप भी बरामद किए थे, जिनका तकनीकी परीक्षण कराया जा रहा है।
जांच के दायरे में आए कई विभाग और कर्मचारी
स्पेशल टास्क फोर्स की पड़ताल में विश्वविद्यालय के कई डॉक्टरों, रेजिडेंट डॉक्टरों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की कथित संलिप्तता सामने आई है। जांच में महिला डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को प्रेम संबंध और शादी के झांसे में फंसाकर उन पर धर्म परिवर्तन कराने के गंभीर आरोपों की गहराई से छानबीन की गई। जांच रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के विभिन्न चिकित्सा विभागों से जुड़े मामलों और घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा दर्ज किया गया है। इनमें गांधी वार्ड, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग से संबंधित विशेष प्रकरण शामिल हैं, जहां इन गतिविधियों के संचालित होने के आरोप लगे हैं।
कई अन्य नामों का भी रिपोर्ट में हुआ खुलासा
एसटीएफ द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में केवल मुख्य आरोपी ही नहीं, बल्कि परिसर से जुड़े अन्य व्यक्तियों की गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में नफीस, मुस्तफा और एक रेजिडेंट डॉक्टर आदिल से जुड़े कथित मामलों का भी स्पष्ट जिक्र है। जांच एजेंसी ने शासन को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में धर्मांतरण और लव जिहाद से संबंधित बेहद गंभीर आरोपों की एक पूरी फेहरिस्त पेश की है, जिससे संस्थान के भीतर सक्रिय इस कथित नेटवर्क के कामकाज के तौर-तरीकों का पता चलता है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
जांच रिपोर्ट सामने आने के तत्काल बाद प्रशासनिक अमले में हलचल बढ़ गई है। एसटीएफ के इन निष्कर्षों के आधार पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने संस्थान स्तर पर सख्त कदम उठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी ने केजीएमयू के कुलसचिव को आधिकारिक पत्र भेजकर पूरे मामले में अब तक की गई कार्रवाई और प्रस्तावित कदमों का विस्तृत ब्यौरा तलब किया है। अब शासन और चिकित्सा शिक्षा विभाग की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आरोपियों के खिलाफ की जाने वाली अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।























