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टोंक नगर परिषद में कांग्रेस का परचम, 38 वोटों के साथ मयंक गोयल बने नए सभापतिराजस्थान
21 सित॰ 2026, 6:40 pm (4 दिन पहले)· 2

टोंक नगर परिषद में कांग्रेस का परचम, 38 वोटों के साथ मयंक गोयल बने नए सभापति

राजस्थान के टोंक में कांग्रेस ने निर्दलीयों की मदद से 38 मत हासिल कर नगर परिषद में बोर्ड बना लिया है, जहां मयंक गोयल सभापति बने। दूसरी ओर जिले की 8 नगरपालिकाओं में से 7 पर बीजेपी ने कब्जा जमाया है।

राजस्थान के बहुचर्चित स्थानीय निकाय चुनावों में टोंक जिले की सियासत में दिलचस्प शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला है। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के राजनीतिक प्रभाव वाले इलाके टोंक नगर परिषद की शीर्ष कुर्सी पर आखिरकार कांग्रेस ने अपना कब्जा बरकरार रखा। 59 सदस्यों वाले नगर परिषद सदन में पार्टी के युवा चेहरे मयंक गोयल ने सभापति पद की शपथ ली। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के खुद के 32 पार्षदों के अलावा 6 निर्दलीय सदस्यों ने भी उनका साथ दिया, जिससे पार्टी का कुल आंकड़ा 38 पर पहुंच गया और उसने स्पष्ट बहुमत से अपना बोर्ड गठित कर लिया। इस मुकाबले में कांग्रेस संगठन के साथ-साथ सचिन पायलट के सियासी रसूख की भी कड़ी परीक्षा मानी जा रही थी।

युवा चेहरे पर दांव और अंदरूनी सियासी समीकरण

टोंक नगर परिषद के सभापति पद के लिए कांग्रेस खेमे में कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा के केंद्र में थे। दावेदारों की लंबी फेहरिस्त के बीच पार्टी नेतृत्व ने अंतिम समय में नौजवान चेहरे मयंक गोयल के नाम पर मुहर लगाकर सबको चौंका दिया। स्थानीय राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम और रणनीति के पीछे हंसराज चौधरी की भूमिका को बेहद निर्णायक माना जा रहा है। टिकट वितरण की प्रक्रिया से लेकर सभापति के अंतिम चयन तक चौधरी लगातार सक्रिय रहे। स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि उनकी ठोस लामबंदी की वजह से ही पार्टी निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में एकजुट रखने में पूरी तरह सफल रही। नव निर्वाचित सभापति मयंक गोयल के कंधों पर अब शहर के विकास, आधारभूत ढांचे की मजबूती और नागरिक सुविधाओं को सुधारने की मुख्य जिम्मेदारी आ गई है।

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जिले की आठ नगरपालिकाओं में चला बीजेपी का दबदबा

टोंक शहर में भले ही कांग्रेस ने अपनी साख बचा ली हो, लेकिन जिले की छोटी नगरपालिकाओं की तस्वीर पूरी तरह उलट रही। जिले की कुल 9 नगरपालिकाओं में से जिन 8 निकायों के अध्यक्ष पद के चुनावी नतीजे घोषित हुए, उनमें से 7 पर भारतीय जनता पार्टी ने एकतरफा परचम लहरा दिया। कांग्रेस केवल उनियारा नगरपालिका में ही अपनी जीत दर्ज कराने में सफल रही, जबकि बाकी सभी जगह भगवा खेमे का दबदबा देखने को मिला। कई नगरपालिकाओं में कड़े मुकाबले हुए, जहां मामूली वोटों के अंतर और आंतरिक उठापटक ने नतीजों का रुख तय कर दिया।

उनियारा और डिग्गी के सीधे चुनावी मुकाबले

जिले की उनियारा नगरपालिका में कांग्रेस के उम्मीदवार नरेश गुर्जर ने अध्यक्ष पद के चुनाव में जीत हासिल की। चुनावी गणना में नरेश गुर्जर के पक्ष में 12 मत पड़े, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी बीजेपी प्रत्याशी अभय सिंह को 8 पार्षदों का ही समर्थन मिल सका। इस परिणाम के साथ उनियारा में कांग्रेस अपना स्वतंत्र बोर्ड गठित करने में सफल रही। इसके विपरीत डिग्गी नगरपालिका में बीजेपी के अरविंद शर्मा ने बाजी मारी। अरविंद शर्मा को 15 पार्षदों का समर्थन हासिल हुआ, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार करमचंद मीणा 10 वोटों पर ही सिमट गए। इस जीत के साथ डिग्गी की सत्ता बीजेपी के हाथों में चली गई।

निवाई में उलटफेर और लांबाहरिसिंह का नतीजा

निवाई नगरपालिका का चुनाव राजनीतिक विश्लेषकों के लिए सबसे चौंकाने वाला रहा। 40 वार्डों वाली इस पालिका में कांग्रेस के 19 और बीजेपी के 18 पार्षद चुनाव जीतकर आए थे। संख्या बल के आधार पर कांग्रेस आगे दिख रही थी, लेकिन क्रॉस वोटिंग ने पूरा खेल पलट दिया। बीजेपी के नरेंद्र शर्मा ने कांग्रेस की प्रत्याशी रेखा जैन को 2 मतों के अंतर से पराजित कर अध्यक्ष की कुर्सी छीन ली। वहीं लांबाहरिसिंह नगरपालिका में बीजेपी प्रत्याशी सोनिया सोनी ने जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार को 8 मतों के अंतर से मात दी। इस चुनाव में बीजेपी को 14 वोट हासिल हुए, जबकि कांग्रेस के खाते में महज 6 वोट ही दर्ज हुए। जीत की औपचारिक घोषणा होते ही बीजेपी कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया।

टोडारायसिंह, देवली, पीपलू और दूनी के चुनावी परिणाम

टोडारायसिंह नगरपालिका में बीजेपी के संत कुमार जैन ने एकतरफा जीत दर्ज की। रिटर्निंग अधिकारी जयंत कुमार द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार संत कुमार जैन को 28 वोट प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी सत्यनारायण सैनी को केवल 7 मतों से संतोष करना पड़ा। देवली नगरपालिका में भी बीजेपी ने जोरदार जीत हासिल की, जहां कजोड़ी देवी ने 24 मत लेकर कांग्रेस के बनवारी बेरवा (11 वोट) को 13 मतों के बड़े अंतर से मात दी। पीपलू नगरपालिका अध्यक्ष पद के मुकाबले में बीजेपी के रमेश वर्मा ने 13 मत हासिल कर कांग्रेस के पंकज बैरवा को 6 मतों से हराया, जिन्हें कुल 7 वोट मिले थे। वहीं दूनी नगरपालिका में मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जहां बीजेपी की अर्चना बलाई को 10 मत मिले और कांग्रेस प्रत्याशी 9 मतों पर अटक गए। इस तरह दूनी में बीजेपी ने महज 1 वोट के अंतर से अध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया।

सवाल-जवाब

टोंक नगर परिषद में कांग्रेस के मयंक गोयल को कुल कितने वोट मिले?
मयंक गोयल को कुल 38 वोट मिले, जिनमें 32 कांग्रेस के और 6 निर्दलीय पार्षदों के मत शामिल थे।
टोंक नगर परिषद में कुल कितने वार्ड हैं?
टोंक नगर परिषद में कुल 59 वार्ड हैं।
टोंक जिले की 8 नगरपालिकाओं में से कितनी पर बीजेपी ने कब्जा जमाया?
बीजेपी ने जिले के 8 में से 7 नगरपालिका अध्यक्ष पदों पर जीत दर्ज की।
कांग्रेस को किस नगरपालिका में जीत हासिल हुई और वहां कौन अध्यक्ष बना?
कांग्रेस ने उनियारा नगरपालिका में जीत हासिल की, जहां नरेश गुर्जर अध्यक्ष चुने गए।
निवाई नगरपालिका में अध्यक्ष पद का चुनाव किसने जीता?
निवाई में बीजेपी के नरेंद्र शर्मा ने कांग्रेस की रेखा जैन को 2 वोटों से हराकर अध्यक्ष पद जीता।
दूनी नगरपालिका में अध्यक्ष का फैसला कितने मतों के अंतर से हुआ?
दूनी में बीजेपी की अर्चना बलाई ने महज 1 वोट के अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी को हराकर जीत दर्ज की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·3 दिन पहले

टोंक नगर परिषद में कांग्रेस की जीत और जिले की अन्य नगरपालिकाओं में भाजपा के एकतरफा दबदबे के बीच का यह विरोधाभास स्थानीय शहरी अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय निवेश के लिहाज से बेहद अहम है। एक ओर जहां महानगर और जिला मुख्यालय स्तर पर राजनीतिक स्थिरता विकास परियोजनाओं को गति दे सकती है, वहीं ग्रामीण-शहरी सीमा पर स्थित छोटी नगरपालिकाओं में सत्ता परिवर्तन से व्यापारिक नीतियों, स्थानीय ठेकों और बुनियादी ढांचे के बजट आवंटन पर सीधा असर पड़ेगा। निवेशकों और स्थानीय कारोबारियों को अब देखना होगा कि इन दोनों राजनीतिक दलों की प्रशासनिक प्राथमिकताएं उनके व्यावसायिक हितों को कैसे प्रभावित करती हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

टोंक नगर परिषद में कांग्रेस की यह जीत सचिन पायलट के राजनीतिक रसूख और हंसराज चौधरी की रणनीतिक लामबंदी का स्पष्ट प्रमाण है, जहाँ 38 मतों के साथ पार्टी ने बोर्ड तो बचा लिया। हालांकि, जिले की 8 में से 7 नगरपालिकाओं पर बीजेपी का एकतरफा कब्जा यह दर्शाता है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में भगवा दल की पकड़ मजबूत हो रही है। आने वाले समय में शहरी निकाय की इस बढ़त और ग्रामीण इलाकों की हार के बीच पार्टी को अपनी जमीनी रणनीति की समीक्षा करनी होगी।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

यह परिणाम राजनीतिक रूप से दोतरफा तस्वीर पेश करता है। एक तरफ जहां टोंक नगर परिषद में कांग्रेस ने सफलता हासिल की है, वहीं जिले की अन्य नगरपालिकाओं में बीजेपी का भारी बहुमत स्थानीय स्तर पर आर्थिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं के बदलाव का संकेत देता है। निवेशकों और स्थानीय व्यावसायिक हलकों के दृष्टिकोण से, शहरी और अर्ध-शहरी निकायों में इस प्रकार का सत्ता विभाजन भविष्य की विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के बजट आवंटन को प्रभावित कर सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

टोंक नगर परिषद में कांग्रेस का यह बहुमत पार्टी के लिए राहत की बात है, खासकर तब जब जिले की अन्य नगरपालिकाओं में भाजपा ने सात सीटों पर एकतरफा बढ़त बनाई है। सचिन पायलट के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में निर्दलीयों को साधना और युवा चेहरे मयंक गोयल को आगे करना रणनीति का हिस्सा रहा। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि यह समीकरण जिले के बाकी शहरी निकायों में भाजपा के मजबूत होते वर्चस्व के बीच पार्टी संगठन को कितनी मजबूती दे पाता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

रोहन ने जिस राजनीतिक समीकरण और निर्दलीयों की लामबंदी की बात उठाई है, वह प्रशासनिक और चुनावी प्रबंधन का एक अहम पहलू है। हालांकि टोंक नगर परिषद में 38 वोटों के साथ मयंक गोयल का सभापति बनना और हंसराज चौधरी की रणनीतिक भूमिका पार्टी के लिए राहत जरूर है, लेकिन जिले की अन्य 7 नगरपालिकाओं में भाजपा का एकतरफा दबदबा यह संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर विपक्षी दल की पकड़ काफी मजबूत है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि कांग्रेस इस शहरी और ग्रामीण-निकाय के इस राजनीतिक असंतुलन के बीच अपनी प्रशासनिक पकड़ कैसे बनाए रखती है।

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