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उल्दन बांध की भेंट चढ़ा ढाई सौ साल पुराना सलैया गांव, अपने ही हाथों से मकान गिरा रहे लोग, 3 लाख में ना प्लॉट मिला ना छतमध्य प्रदेश
18 जून 2026, 1:04 am (87 दिन पहले)· 2

उल्दन बांध की भेंट चढ़ा ढाई सौ साल पुराना सलैया गांव, अपने ही हाथों से मकान गिरा रहे लोग, 3 लाख में ना प्लॉट मिला ना छत

सागर जिले के सलैया गांव को उल्दन बांध सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र में आने पर रातों-रात खाली कराया गया, जहां ग्रामीणों को मात्र 3 लाख रुपए मुआवजा देकर बेघर कर दिया गया।

मिट्टी, ईंट और गारे से खड़ा किया गया एक घर बाहर वाले की नजर में भले ही महज एक ढांचा हो, पर जो उसमें रहता है उसके लिए वह पूरी जिंदगी का हिसाब होता है। उसी आंगन में बचपन गुजरता है, उसी छत के नीचे बच्चे बड़े होते हैं और दिन-रात की मेहनत से जोड़ी गई एक-एक ईंट में सपने बसते हैं। ऐसे ही आशियाने को जब किसी को अपने ही हाथों से ढहाना पड़े, तो उस पल का दर्द किसी भाषा में नहीं समाता। सागर जिले के सलैया गांव के लोग इन दिनों ठीक इसी टीस से गुजर रहे हैं, जहां एक झटके में पूरा परिवार बेघर हो गया और किसी को यह तक नहीं मालूम कि अब जाना कहां है और करना क्या है।

रातों-रात खाली कराए गए मकान

उल्दन बांध सिंचाई परियोजना के चलते सलैया गांव डूब क्षेत्र में आ गया, और यहां पीढ़ियों से बसे लोगों को आनन-फानन में घर खाली करने के आदेश थमा दिए गए। बरसों से जिस छत के नीचे जिंदगी कटी, वह एक ही झटके में सिर से छिन गई। मुआवजे के नाम पर इन परिवारों को सिर्फ 3 लाख रुपए दिए गए हैं, जो इतने नाकाफी हैं कि इतनी रकम में ना तो कोई प्लॉट खरीदा जा सकता है और ना ही कहीं तैयार मकान। बसने के लिए कोई स्थायी जमीन भी नहीं दी गई। ऊपर से गृहस्थी का सामान ढोने और टूटे मकानों का मलबा हटाने में भी इन्हीं की जेब से पैसा खर्च हो रहा है। अब इन लोगों के पास आंसू बहाने के सिवा कोई चारा नहीं बचा।

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400 गांवों के लिए वरदान, 27 के लिए सजा

उल्दन बांध परियोजना का एक चेहरा उम्मीद भरा है तो दूसरा बेहद कड़वा। यह परियोजना जहां 400 गांवों के लिए वरदान साबित होने वाली है, वहीं 27 गांवों के लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ गई है। इन्हीं अभागे गांवों में एक है ढाई सौ साल पुराना सलैया, जहां लोगों का सिर्फ घर और गांव ही नहीं छूटा, बल्कि बरसों से साथ रह रहे परिवार भी बिखर गए।

सावित्रीबाई की आपबीती

गांव से विस्थापित हुईं सावित्रीबाई की कहानी इस त्रासदी की गवाह है। वे बताती हैं कि उनके दो बेटे हैं, बहुएं हैं, बड़े बेटे के तीन बच्चे और छोटे बेटे के दो बच्चे हैं। इतने बड़े परिवार के बावजूद किसी को कुछ नहीं मिला।

ना तो हमारे लड़कों के लिए कोई मुआवजा दिया गया है ना मेरे लिए कुछ मिला है। मकान तोड़ने से पहले सरकार के लोग कह रहे थे कि ढुलाई के लिए अलग से ₹60000 देंगे लेकिन कुछ नहीं दिया है। अब हम लोग क्या करें, कुछ समझ में नहीं आ रहा है। अभी यहां से कुछ दूरी पर जो सरकारी जमीन है वहां पर गृहस्थी का सामान ले जा रहे लेकिन वहां भी प्रशासन के लोग कह रहे कि पक्का घर मत बनाना, यहां से भी हटा सकते हैं।

खून-पसीने से बना घर, अब खुद ही गिरा रहे

70 साल के बुजुर्ग देव सिंह राजपूत का दर्द भी कम नहीं। उनका कहना है कि ग्रामीणों के साथ सरासर अन्याय हुआ है और मुआवजा बेहद कम तय किया गया। जमीन के बदले उन्हें 2 लाख 80 हजार रुपए मिले, पेड़-पौधों को जोड़कर यह राशि 3 लाख तक पहुंची, और जिनके अपने ही जमीन पर मकान थे उन्हें भी मनमाने भाव पर पैसा थमा दिया गया।

हम लोगों ने खून पसीने की कमाई से अपने बच्चों के लिए जो घर बनाए थे अब वह खुद ही अपने हाथों से तोड़ने पड़ रहे हैं और इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है। हम लोगों की सरकार से प्रार्थना है कि उन्होंने मकान तोड़ने से पहले जो वादा किया था कि डेढ़ लाख सहायता राशि और 60 हजार ढुलाई के पैसे देंगे, वह पूरा हो। हम लोगों का मुआवजा भी बढ़ाया जाए, ऐसे बुढ़ापे में कौन हम लोगों को खिलाएगा यही चिंता सता रही है।

सरकार ने मकान गिराने से पहले डेढ़ लाख रुपए सहायता राशि और 60 हजार रुपए ढुलाई के देने का भरोसा दिया था, पर ग्रामीणों के मुताबिक वह वादा अब तक अधूरा है। बुढ़ापे की दहलीज पर खड़े इन लोगों को सबसे बड़ी चिंता यही सता रही है कि छत और जमा-पूंजी दोनों छिन जाने के बाद उनका पेट कौन भरेगा।

सवाल-जवाब

सलैया गांव के लोगों को घर क्यों खाली करने पड़े?
उल्दन बांध सिंचाई परियोजना के कारण सलैया गांव डूब क्षेत्र में आ गया, जिससे यहां के लोगों को रातों-रात मकान खाली करने के आदेश दिए गए।
ग्रामीणों को कितना मुआवजा मिला है?
इन परिवारों को मुआवजे के नाम पर सिर्फ 3 लाख रुपए दिए गए हैं, जिसमें ना प्लॉट खरीदा जा सकता है और ना ही कोई तैयार मकान।
उल्दन बांध परियोजना से कितने गांव प्रभावित हो रहे हैं?
यह परियोजना 400 गांवों के लिए वरदान बताई जा रही है, जबकि 27 गांवों के लोग इससे विस्थापित हो रहे हैं, जिनमें ढाई सौ साल पुराना सलैया गांव भी शामिल है।
सरकार ने ग्रामीणों से क्या वादा किया था?
मकान गिराने से पहले सरकार ने डेढ़ लाख रुपए सहायता राशि और 60 हजार रुपए ढुलाई के देने का वादा किया था, जो ग्रामीणों के अनुसार अब तक पूरा नहीं हुआ।
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