अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक समीकरणों में इस समय एक बड़ा मोड़ देखने को मिल रहा है। एक तरफ वाशिंगटन में अमेरिकी संसद ने रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर आर्थिक दबाव डालने और टैरिफ बढ़ाने वाला बिल पारित किया है, तो वहीं दूसरी ओर भारत ने इन दबावों को दरकिनार करते हुए अपनी स्वतंत्र विदेश नीति की राह चुनी है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की हालिया मॉस्को यात्रा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं पर किसी बाहरी शक्ति के एजेंडे को हावी नहीं होने देगा। रूस की राजधानी में दोनों देशों के सैन्य नेतृत्व के बीच तैयार हुआ नया रक्षा खाका क्षेत्र के सामरिक संतुलन पर गहरा असर डालने वाला माना जा रहा है।
वाशिंगटन का टैरिफ कार्ड और नई दिल्ली की रणनीतिक स्वायत्तता
वैश्विक व्यापार राजनीति के तहत अमेरिका लंबे समय से अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार वैश्विक नियम तय करने की कोशिशें करता रहा है। हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस ने भारत और चीन जैसे देशों को लक्षित करते हुए टैरिफ से जुड़े सख्त नीतिगत कदम उठाए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य मॉस्को के साथ ऊर्जा व्यापार को सीमित करना है। इसके बावजूद भारत ने कड़े रुख के साथ स्पष्ट किया है कि उसकी विदेश नीति रणनीतिक स्वायत्तता के सिद्धांतों पर आधारित है। राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा आवश्यकताओं से जुड़े फैसले केवल देश के हितों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे, न कि किसी तीसरे पक्ष द्वारा तय की गई शर्तों के आधार पर।
आठ साल बाद भारतीय सेना प्रमुख का रूस दौरा
रूसी राजधानी मॉस्को में जनरल धीरज सेठ और रूसी सैन्य कमांडरों के बीच उच्च स्तरीय बैठकें संपन्न हुई हैं। पिछले 8 वर्षों के दौरान किसी सेवारत भारतीय सेना प्रमुख की यह पहली रूस यात्रा है, जिसे द्विपक्षीय रक्षा संबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। इस वार्ता का उद्देश्य केवल पूर्व में खरीदे गए सैन्य साजो-सामान के रखरखाव तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की आधुनिक युद्ध प्रणाली को लेकर लंबी साझेदारी विकसित करना है।
सैन्य साझेदारी के तीन प्रमुख आधार
मॉस्को में हुई इन बैठकों के दौरान द्विपक्षीय रक्षा तालमेल को आगे बढ़ाने के लिए कई ठोस बिंदुओं पर सहमति बनी है। इनमें जमीनी और हवाई सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से निम्नलिखित प्राथमिकताएं शामिल हैं
- सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति श्रृंखला: रूस से प्राप्त टैंकों, एयर डिफेंस प्रणालियों और बख्तरबंद वाहनों के स्पेयर पार्ट्स की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, जिससे सीमा पर सैन्य तैयारियों में किसी प्रकार की रुकावट न आए।
- पेंट्सिर-S1M एयर डिफेंस सिस्टम: रूस का उन्नत शॉर्ट-रेंज मोबाइल एयर-डिफेंस सिस्टम पेंट्सिर-S1M भारत के विशेष ध्यान में है। यह मोबाइल सिस्टम आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन और क्रूज मिसाइलों के खतरों को निष्प्रभावी करने में बेहद कारगर माना जाता है।
- भविष्य के टैंक और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स: भारत के फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल प्रोग्राम और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स (BMP-3) पर संयुक्त रूप से काम करने की योजना पर चर्चा हुई है, जिससे भारतीय थल सेना की मारक क्षमता में व्यापक इजाफा होगा।
पड़ोसी देशों के सामरिक गणित पर असर
नई दिल्ली और मॉस्को के बीच तकनीकी तालमेल और सैन्य आधुनिकीकरण की यह साझा योजना सीमा पार रणनीतिक हलचल बढ़ा रही है। चीन और पाकिस्तान दोनों ही इस रक्षा तालमेल पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। इन दोनों देशों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि अमेरिकी व्यापारिक पाबंदियों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर वाले दस्तावेजों के बावजूद भारत अपने सैन्य ढांचे को आधुनिक बनाने से पीछे हटने वाला नहीं है। वैश्विक मंच पर भारत की यह पहल प्रदर्शित करती है कि देश अपनी शर्तों और प्राथमिकताओं के आधार पर अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को आगे बढ़ा रहा है।




















