उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचल में सरकारी कृषि सहायता योजना के तहत बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। फर्रुखाबाद और कन्नौज जिलों में चलाए गए विशेष जांच अभियान के दौरान यह पाया गया कि अनेक अपात्र व्यक्तियों के साथ-साथ नाबालिग बच्चों के नाम पर भी वित्तीय सहायता हासिल की जा रही थी। नियमों की अनदेखी करके अतिरिक्त लाभ पाने के चक्कर में कई परिवारों ने अपने अन्य परिजनों के दस्तावेज दर्ज करा दिए थे। प्रशासन ने मामलों की गंभीरता को देखते हुए संदिग्ध खातों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है और अनुचित तरीके से प्राप्त की गई राशि की वापसी के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।
केंद्र सरकार की योजना और निर्धारित नियम
केंद्र सरकार की तरफ से 2019 के आम चुनाव से ठीक पहले किसान सम्मान निधि योजना को लागू किया गया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करना है, ताकि वे फसल की बुवाई और खेती से जुड़ी जरूरी सामग्री समय पर जुटा सकें। योजना के प्रावधानों के अनुसार पात्र किसान को प्रत्येक वर्ष कुल 6000 रुपये की राशि तीन बराबर किस्तों में सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है। दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि एक परिवार से केवल एक ही सदस्य इस वित्तीय मदद का लाभ ले सकता है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कई लोगों ने अतिरिक्त धन पाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया।
फर्रुखाबाद में जांच के दौरान नाबालिग भी मिले लाभार्थी
कृषि मंत्रालय के पास जब इस सहायता योजना में अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतें पहुंचीं, तो व्यापक स्तर पर दस्तावेजों के सत्यापन का कार्य शुरू किया गया। फर्रुखाबाद जिले में जब अभिलेखों की पड़ताल की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिले के अंदर 147 ऐसे लाभार्थी पाए गए जो नाबालिग थे। यहां तक कि एक आठ साल की बच्ची के नाम पर भी नियमित रूप से सहायता राशि जारी हो रही थी। इसके अलावा 4 हजार से अधिक ऐसे खाते मिले जिनमें आवश्यक औपचारिकताएं अधूरी थीं। कई मामलों में आधार कार्ड बैंक खाते से नहीं जुड़े थे, तो कुछ स्थानों पर जमीन से संबंधित खतौनी के रिकॉर्ड जमा नहीं किए गए थे। अनियमितताएं पुख्ता होने के बाद प्रशासन ने कुल 4 हजार 297 लाभार्थियों की सम्मान निधि रोकने का आदेश दिया। अब इन फर्जी लाभार्थियों से पूर्व में दी गई धनराशि वसूलने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
कन्नौज में 40 हजार से अधिक मामलों में अनियमितता
पड़ोसी जिले कन्नौज में भी जांच के दौरान व्यापक गड़बड़ियां देखने को मिली हैं। इस जिले में साल 2019 से लेकर अब तक कुल 2 लाख 26 हजार 601 किसान इस योजना से जुड़े रहे हैं, जिन्हें 23 किस्तों के माध्यम से लगभग 1 हजार 41 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। कृषि विभाग ने जब गांव स्तर पर सघन भौतिक सत्यापन और रिकॉर्ड की जांच कराई, तो 40 हजार 823 ऐसे मामले चिन्हित हुए जहां नियमों का उल्लंघन हुआ था। इस सूची में 61 नाबालिगों के नाम भी शामिल थे जो अवैध रूप से योजना का धन ले रहे थे। इसके साथ ही कई किसानों की ई-केवाईसी, भूमि विवरण का अंकन यानी लैंड सीडिंग और बैंक खातों से आधार लिंक होने की प्रक्रिया अधूरी पाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि एक ही परिवार के दो सदस्य अथवा पति और पत्नी दोनों अलग-अलग आवेदन करके सालों से सम्मान निधि ले रहे थे। खामियां उजागर होते ही कृषि विभाग ने इन सभी मामलों में आगामी किस्तों के भुगतान पर तुरंत रोक लगा दी है।
कृषि विभाग ने दी चेतावनी और वसूली की बनाई रणनीति
कन्नौज के उप निदेशक कृषि संतोष कुमार ने स्पष्ट किया है कि जिन पात्र किसानों की औपचारिक प्रक्रियाएं अधूरी हैं, वे अपनी ई-केवाईसी और जरूरी दस्तावेज तत्काल पूरे करवा लें। वहीं जानबूझकर फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ विभाग कड़े कदम उठा रहा है। कृषि अधिकारियों के अनुसार गलत तरीके से लाभ लेने वाले परिवारों के अन्य पात्र सदस्यों की भविष्य की किस्तें तब तक रोकी जा सकती हैं, जब तक कि अवैध रूप से निकाली गई पूरी रकम की भरपाई नहीं हो जाती। प्रशासन इस वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए सरकारी खजाने से निकाली गई राशि की शत-प्रतिशत रिकवरी सुनिश्चित करने में जुटा हुआ है।
























