देशभर में मानसूनी हवाओं का मिजाज तेजी से बदल रहा है और अधिकांश उत्तरी व मध्यवर्ती इलाकों में बादलों की सक्रियता कम होने लगी है। दक्षिण-पश्चिम मानसून अब देश के एक बड़े भूभाग से अपनी औपचारिक विदाई के मुहाने पर पहुंच चुका है। हालांकि, जहां उत्तर और पश्चिम के बड़े हिस्से में मौसम शुष्क होने की दिशा में बढ़ रहा है, वहीं दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में मेघ अभी भी जमकर बरसने के संकेत दे रहे हैं। अगले चौबीस घंटे के भीतर प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ चुनिंदा हिस्सों में तेज पानी गिरने और खास तौर पर केरल में बेहद भारी वर्षा दर्ज किए जाने की संभावना बनी हुई है।
इन 13 राज्यों से अगले 48 घंटों में विदा होगा मानसून
मौसम विभाग के ताजा आकलन के अनुसार, अगले दो दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां पूरी तरह मुफीद बन चुकी हैं। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के शेष इलाकों और गुजरात से मानसूनी हवाएं विदा होने वाली हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों, पूरे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से भी मानसून वापस लौटेगा। पूर्वी और मध्य भारत के दायरे में आने वाले बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में भी अगले 48 घंटों में मानसून की वापसी रेखा तेजी से आगे बढ़ने के अनुकूल माहौल बना हुआ है।
इस साल जून से सितंबर के दौरान 87.4 प्रतिशत बारिश दर्ज
मौसम विभाग (IMD) की ओर से जारी मानसूनी सत्र के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून से सितंबर की चार महीने की मियाद में पूरे भारत में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) की तुलना में महज 87.4 प्रतिशत बारिश रिकॉर्ड की गई। आमतौर पर मानसूनी सीजन की सामान्य बारिश का पैमाना 868.6 mm माना जाता है, मगर इस दफा देश भर में कुल 759.4 mm बारिश ही दर्ज हो पाई। विभाग का स्पष्ट कहना है कि इस साल का मानसूनी आंकड़ा वर्ष 2001 के बाद से अब तक का चौथा सबसे कम वर्षा वाला सत्र रहा है। समग्र तौर पर 1 जून से 30 सितंबर के बीच पूरे देश में सामान्य के मुकाबले तकरीबन 13 प्रतिशत की कमी देखी गई है।
पूर्वोत्तर और पूर्वी राज्यों में बारिश और आंधी का अनुमान
पूर्वोत्तर के सातों राज्यों में बादलों का पहरा आगे भी बना रहने वाला है। 2 से 7 अक्टूबर के दौरान अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में रुक-रुक कर बारिश होने का पूर्वानुमान लगाया गया है। मध्य और पूर्वी भारत की बात करें तो 2 और 3 अक्टूबर के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य महाराष्ट्र और बंगाल के इलाकों में वर्षा हो सकती है। इसी तरह 2 और 3 अक्टूबर के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और ओडिशा में गरज-चमक के साथ आंधी-तूफान आने, बिजली गिरने और 30 से 40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है, जो कुछ चुनिंदा स्थानों पर बढ़कर 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार भी पकड़ सकती हैं।
केरल के तीन जिलों में ऑरेंज अलर्ट, दिल्ली में साफ रहेगा आसमान
दक्षिण में केरल के कई इलाकों में गुरुवार को हुई बरसात ने लोगों को हफ्तों से परेशान कर रही उमस और चढ़ते पारे से बड़ी राहत दिलाई। बारिश की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने पथानामथिट्टा, कोट्टायम और इडुक्की जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि राज्य के छह अन्य जिलों में येलो अलर्ट प्रभावी किया गया है। राजधानी दिल्ली में मौसम का रुख बिल्कुल अलग रहने वाला है, जहां आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा। दिल्ली में अधिकतम तापमान 33°C से 35°C और न्यूनतम तापमान 21°C से 23°C के आसपास रहने के आसार हैं। दिल्ली के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम पारा सामान्य से नीचे और अधिकतम पारा सामान्य के करीब दर्ज होगा, जबकि दिन के वक्त 20 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने का अनुमान है।


















