राजस्थान के सियासी हलकों में शुक्रवार को उस समय बड़ी हलचल मच गई, जब राज्य सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह के कांग्रेस छोड़ने का मामला सामने आया। पिछले काफी समय से संगठन के कामकाज और फैसलों को लेकर चल रहा उनका असंतोष आखिरकार इस कठोर निर्णय के रूप में परिणित हुआ है। इस कदम ने मुख्य विपक्षी दल के भीतर आंतरिक खींचतान को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।
प्रदेश नेतृत्व पर लगाए थे गंभीर आरोप
इस बड़े घटनाक्रम से ठीक पहले विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा चयन और अध्यापक पात्रता परीक्षा भर्ती में हुई गड़बड़ियों को लेकर सीधे नेतृत्व की भूमिका पर उंगलियां उठाई थीं। उनका स्पष्ट तौर पर कहना था कि पार्टी आलाकमान को ऐसे नेताओं के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उन्हें संगठन से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।
संगठन की प्रतिक्रिया और भावी रणनीति
विश्वेंद्र सिंह के इस कड़े रुख के बाद पार्टी के भीतर बैठकों और चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से अभी तक इस इस्तीफे पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्य के प्रमुख क्षेत्रीय समीकरणों में मजबूत पकड़ रखने वाले इस कद्दावर नेता के अलग होने से संगठन को आने वाले दिनों में जमीनी स्तर पर खासी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।



















