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उत्तराखंड के दरकोट में अंगोरा ऊन से पारंपरिक हथकरघा पर गर्म कपड़े बुन रहीं महिलाएंउत्तराखंड
4 अक्तू॰ 2026, 1:26 pm (33 दिन पहले)· 2

उत्तराखंड के दरकोट में अंगोरा ऊन से पारंपरिक हथकरघा पर गर्म कपड़े बुन रहीं महिलाएं

पिथौरागढ़ के मुनस्यारी स्थित दरकोट गांव में महिलाएं अंगोरा खरगोश और भेड़ की प्राकृतिक ऊन से हाथ से बुने शॉल, टोपी और स्वेटर तैयार कर अपनी आजीविका संवार रही हैं.

उत्तराखंड के सीमांत पर्वतीय अंचलों में पारंपरिक दस्तकारी आज भी परिवारों की जीवनशैली और पहचान का अहम हिस्सा बनी हुई है. पिथौरागढ़ जनपद के मुनस्यारी क्षेत्र में पीढ़ियों से चला आ रहा हथकरघा बुनाई का काम स्थानीय घरों को आर्थिक संबल दे रहा है. यहां की महिलाएं अपने घरों में स्थापित पारंपरिक करघों पर मेहनत से हाथ चलाकर शॉल, टोपी, स्वेटर, मफलर और दस्ताने जैसे गर्म कपड़े तैयार करती हैं. इन पहाड़ी वस्त्रों की खासियत केवल कड़ाके की ठंड से बचाना ही नहीं है, बल्कि इनके रेशे-रेशे में सदियों पुराना कारीगरी का हुनर और प्राकृतिक ऊन की गर्माहट रची-बसी है.

दरकोट गांव की हथकरघा परंपरा और अंगोरा ऊन

मुनस्यारी तहसील का दरकोट गांव इस ऊनी दस्तकारी के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचाना जाता है. इस गांव में रहने वाले स्थानीय परिवार मुख्य रूप से अंगोरा खरगोश और भेड़ से प्राप्त प्राकृतिक ऊन का उपयोग करके अलग-अलग परिधान तैयार करते हैं. घरों की महिलाएं लकड़ी के पारंपरिक हाथकरघों पर बैठकर धागों को एक-दूसरे में पिरोती हैं. मशीन की जगह हाथों से की गई यह बारीक बुनाई इन पहाड़ी उत्पादों को बाजार में मिलने वाले सामान्य गर्म कपड़ों से बिल्कुल अलग और टिकाऊ बनाती है.

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मुलायम रेशे और प्राकृतिक रंगों की विशेषता

स्थानीय जानकार संजय शाह जगाती के अनुसार, यहां तैयार होने वाले अधिकांश ऊनी वस्त्रों में अंगोरा खरगोश की अत्यंत कोमल ऊन का प्राथमिक रूप से उपयोग किया जाता है. इसके अतिरिक्त कुछ खास उत्पादों के निर्माण में स्थानीय पहाड़ी बकरियों से मिलने वाली ऊन भी मिलाई जाती है. अंगोरा ऊन अपनी असाधारण कोमलता, हल्के वजन और बारीक रेशों के लिए जानी जाती है. यही कारण है कि इससे बने वस्त्र शरीर पर बहुत हल्के महसूस होते हैं और बर्फीले मौसम में भी भरपूर गर्माहट प्रदान करते हैं. इनमें किसी भी प्रकार के कृत्रिम रंगों का अत्यधिक उपयोग करने के बजाय प्राकृतिक धूसर, भूरे और बादामी क्रीम रंगों की मूल चमक दिखाई देती है.

उत्पादों की विविधता और बाजार में उनकी कीमतें

कारीगर अंगोरा ऊन के रेशों से कई श्रेणियों के वस्त्र बुनते हैं. इनमें बड़े शॉल, सिर की टोपियां, कार्डिगन, स्वेटर, मफलर और हाथ के दस्ताने मुख्य रूप से शामिल हैं. किसी भी उत्पाद का आराम और गुणवत्ता उसमें प्रयुक्त ऊन के अनुपात, धागे के चयन और बुनाई की सघनता पर निर्भर करती है. दरकोट में तैयार इन उत्पादों की दरें उनके आकार, कलात्मक पैटर्न, प्रयुक्त ऊन की शुद्धता और हाथ की मेहनत के अनुसार तय होती हैं. साधारण ऊनी टोपियां और छोटे उत्पाद आमतौर पर 700 से 1000 रुपये के मूल्य वर्ग से शुरू हो जाते हैं. दूसरी ओर, शुद्ध अंगोरा ऊन से महीन बुनाई में तैयार किए गए शॉल और स्वेटर की कीमतें गुणवत्ता के आधार पर कई हजार रुपये तक पहुंच जाती हैं. खरीदारों को कोई भी सामान लेते समय उसमें इस्तेमाल ऊन के प्रकार, मिश्रण का प्रतिशत, आकार और बुनाई के काम की जानकारी पहले ले लेनी चाहिए.

कारीगरों से सीधी खरीदारी और आजीविका का साधन

मुनस्यारी आने वाले सैलानी सीधे दरकोट गांव जाकर इन दस्तकारों के घरों से सीधे उत्पाद खरीद सकते हैं. बिचौलियों के बिना होने वाली इस सीधी बिक्री से पूरी धनराशि स्थानीय बुनकर परिवारों तक पहुंचती है, जिससे उनकी आय में सुधार होता है. जो पर्यटक व्यक्तिगत रूप से पिथौरागढ़ नहीं पहुंच पाते, वे इन कपड़ों के डिजाइन, उपलब्धता और दरों की जानकारी प्राप्त करने के लिए 7078880336 पर WhatsApp के जरिए स्थानीय स्तर पर संपर्क कर सकते हैं. दरकोट में ऊन का काम अब केवल पारंपरिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्जनों परिवारों के लिए स्वावलंबन और दैनिक आजीविका का ठोस आधार बन चुका है. एक जिला एक उत्पाद जैसी प्रशासनिक पहलों के माध्यम से भी इन उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की कोशिशें की जा रही हैं, जिससे यह शिल्प पहाड़ के स्वाभिमान का प्रतीक बन रहा है.

सवाल-जवाब

मुनस्यारी का कौन सा गांव ऊनी हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है?
पिथौरागढ़ के मुनस्यारी का दरकोट गांव हाथ से बने ऊनी हस्तशिल्प और हथकरघा बुनाई के लिए जाना जाता है.
दरकोट के ऊनी कपड़े बनाने में किस ऊन का उपयोग किया जाता है?
इन कपड़ों में मुख्य रूप से अंगोरा खरगोश की मुलायम ऊन का उपयोग होता है, साथ ही भेड़ और पहाड़ी बकरी की ऊन भी इस्तेमाल की जाती है.
अंगोरा ऊन की क्या विशेषताएं हैं?
अंगोरा ऊन काफी महीन, हल्की और मुलायम होती है, जिससे बने कपड़े पहनने में आरामदायक होते हैं और ठंड में बहुत गर्माहट देते हैं.
दरकोट में तैयार ऊनी उत्पादों की शुरुआती कीमत क्या है?
सामान्य ऊनी टोपी और छोटे उत्पादों की शुरुआती कीमत 700 से 1000 रुपये है, जबकि हाथ से बुने शॉल और स्वेटर हजारों रुपये तक बिकते हैं.
दरकोट गांव जाए बिना इन ऊनी कपड़ों की जानकारी कैसे प्राप्त की जा सकती है?
उत्पादों की उपलब्धता, डिजाइन और कीमत जानने के लिए 7078880336 पर WhatsApp के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है.
स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए कौन सी सरकारी पहल काम कर रही है?
इन पारंपरिक उत्पादों को व्यापक बाजार और पहचान दिलाने के लिए एक जिला एक उत्पाद जैसी पहलों के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं.
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टिप्पणियाँ 5

Tanvi Desai@tanvi-desai·32 दिन पहले

पहाड़ की इन महिलाओं के हाथ की बुनी हुई शॉल और स्वेटर देखकर ही गर्ماहट का अहसास हो जाता है। मशीनों की अंधी दौड़ के बीच इस तरह की पारंपरिक कला को बचाए रखना वाकई कमाल है। क्या इनके बनाए ये गर्म कपड़े ऑनलाइन मंगवाने का कोई सीधा जरिया है?

Ravikash Gupta@ravikash·32 दिन पहले

मुनस्यारी के दरकोट गांव की इन महिलाओं के हाथ का बुना अंगोरा ऊन का सामान खरीदने के लिए क्या सीधे इनसे ऑनलाइन संपर्क करने का कोई तरीका है, या फिर पिथौरागढ़ जाकर ही खरीदना होगा?

Arjun Mehta@arjun-mehta·32 दिन पहले

रवि जी, जब मैं पिछली बार मुनस्यारी गया था, तब दरकोट में इन महिलाओं को खुद करघे पर काम करते देखा था। ऑनलाइन मिलना तो मुश्किल है, वहां जाकर ही असली चीज़ मिलती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·32 दिन पहले

पहाड़ की इन महिलाओं की मेहनत देखकर वाकई बहुत सम्मान जागता है। एक बात समझ नहीं आई कि इतनी दूरदराज की जगहों पर बनने वाले इन गर्म कपड़ों को बेचने के लिए कोई स्थायी बाज़ार या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ढंग की सुविधा मिलती भी है या इन्हें सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही खरीदार तलाशने पड़ते हैं?

Rohan Verma@rohan-verma·32 दिन पहले

करण भाई, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की बात सही है, पर मुझे लगता है कि इतनी आसानी से ये दाम मिलना मुश्किल है जितना लेख में बताया गया है।

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