बच्चों के लिए 10 बेहतरीन सब्सक्रिप्शन बॉक्स (2026): एसटीईएम, किताबें, कपड़े और बहुत कुछकानपुर को मिली बड़ी सौगात, 150 करोड़ की लागत से बना सरैंया रेलवे ओवरब्रिज जनता को समर्पितधनतेरस पर 15 सालों में 362% उछला सोना, अगले साल 1.71 लाख रुपये तक जाने का अनुमानधौलपुर में दीपावली से पहले पटाखों की दुकान में लगी भीषण आग, तीन महिलाएं झुलसी और एक की हालत गंभीरत्योहारी सीजन में खाद्य सुरक्षा को लेकर रेखा गुप्ता सरकार सख्त, दिल्लीभर की दुकानों और डेयरियों पर ताबड़तोड़ छापेदीपावली पर करौली में क्यों खास है मिट्टी की हाट भरने की परंपरा, जानिए इसकी पूरी कहानीरूसी तेल प्रतिबंध कानून पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, ओवल ऑफिस में दिए संकेतराजस्थान SET 2026 के नतीजे घोषित, 93 फीसदी से ज्यादा परीक्षार्थी हुए असफलअरुणाचल प्रदेश को केंद्र से मिले 1,476 करोड़ रुपये, त्योहारों के सीजन में मिला कर डिवॉल्व्यूशन का हिस्सादरभंगा में सिर्फ ₹40 में मिल रहे हैं खास मोमोज, देसी मसालों के तड़के ने जीता शौकीनों का दिल
उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित पाषाण देवी मंदिर, जहां कुदरती चट्टान में दिखते हैं मां के नौ रूपउत्तराखंड
17 अक्तू॰ 2026, 2:33 pm (20 दिन पहले)· 0

उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित पाषाण देवी मंदिर, जहां कुदरती चट्टान में दिखते हैं मां के नौ रूप

नैनी झील के तट पर बसा मां पाषाण देवी मंदिर अपनी प्राकृतिक शिला और अनोखी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां श्रद्धालु दूर-दूर से आकर माता के दर्शन करते हैं।

उत्तराखंड के खूबसूरत शहर नैनीताल की ठंडी हवाओं और शांत वादियों के बीच एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जहां देवी की पूजा किसी मानव-निर्मित मूर्ति के रूप में नहीं होती, बल्कि एक प्राकृतिक चट्टान की पूजा की जाती है। नैनी झील के किनारे स्थित मां पाषाण देवी मंदिर अपने अनोखे इतिहास और कुदरती रूप से उभरी हुई आकृतियों के कारण सैलानियों और भक्तों के बीच आकर्षण का मुख्य केंद्र रहता है। देश के कोने-कोने से लोग इस धाम में माता का आशीर्वाद लेने आते हैं।

प्राकृतिक शिला में निहित हैं मां के नौ स्वरूप

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां मौजूद पाषाण यानी पत्थर पर मां भगवती के नौ अलग-अलग स्वरूप स्वतः उभरे हुए नजर आते हैं। पाषाण शब्द का शाब्दिक अर्थ ही पत्थर होता है, और इसी कारण इस पावन स्थल को पाषाण देवी के रूप में जाना जाता है। भक्त यहां आकर इन प्राकृतिक आकृतियों के दर्शन करते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं।

ये भी पढ़ें

नैनी झील से जुड़ी पौराणिक और गहरी मान्यताएं

स्थानीय स्तर पर प्रचलित कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का गहरा नाता नैनी झील के साथ जुड़ा हुआ है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि मां का शेष स्वरूप इसी झील के जल के भीतर निवास करता है। यही रहस्यमय जुड़ाव इस पावन स्थल को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान दिलाता है और भक्तों की आस्था को और अधिक मजबूत करता है।

मंदिर के जल और नवरात्रि का विशेष महत्व

मंदिर परिसर में मिलने वाले जल को लेकर भी श्रद्धालुओं में गहरी आस्था देखने को मिलती है, जिसे कई लोग बेहद पवित्र मानते हैं। हालांकि, इस जल से जुड़ी चमत्कारी रूप से बीमारियां ठीक होने की बातों को लेकर वैज्ञानिक स्तर पर पुष्टि होना अभी बाकी है। इसके अलावा, साल में आने वाले नवरात्रि के पवित्र दिनों के दौरान इस मंदिर में भक्तों का तांता लग जाता है। इन विशेष दिनों में लोग मां दुर्गा की आराधना करने और अपने परिवार के मंगलमय भविष्य के लिए प्रार्थना करने भारी संख्या में पहुंचते हैं।

ठंडी सड़क पर स्थित है यह पावन धाम

नैनीताल की प्रसिद्ध ठंडी सड़क पर यह मंदिर स्थापित है, जिससे यहां पहुंचना पर्यटकों के लिए काफी आसान हो जाता है। नैनी झील के आसपास टहलने आने वाले सैलानी अक्सर इस शांत और आध्यात्मिक स्थल पर अवश्य आते हैं। हालांकि, यात्रा के दौरान स्थानीय परंपराओं का सम्मान करने और साफ-सफाई बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जाता है, ताकि इस प्राकृतिक सुंदरता और पवित्रता को सुरक्षित रखा जा सके।

सवाल-जवाब

पाषाण देवी मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर उत्तराखंड के नैनीताल में ठंडी सड़क पर नैनी झील के तट पर स्थित है।
इस मंदिर को पाषाण देवी क्यों कहा जाता है?
यहां देवी की आकृति प्राकृतिक चट्टान या पाषाण पर उभरी हुई है, इसलिए इन्हें पाषाण देवी कहा जाता है।
मंदिर की शिला पर कितने रूपों के दर्शन होते हैं?
इस मंदिर की शिला पर मां के नौ स्वरूपों के दर्शन की मान्यता है।
इस मंदिर का किस झील से संबंध माना जाता है?
इस मंदिर का संबंध नैनी झील से माना जाता है, और मान्यता है कि मां का शेष स्वरूप झील के भीतर है।
श्रद्धालु यहां सबसे ज्यादा किस समय आते हैं?
नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही काफी बढ़ जाती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·20 दिन पहले

चट्टान में नौ रूप देखना लोगों की अपनी आस्था है, पर विज्ञान इसे कुदरती पैटर्न से ज़्यादा कुछ नहीं मानेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·20 दिन पहले

पिछली बार नैनीताल गया था तो ठंडी सड़क पर चलते हुए इस मंदिर के दर्शन हुए थे। सच में प्राकृतिक चट्टान पर बने उन रूपों को देखना एक अलग ही अहसास कराता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 दिन पहले

रविकेश जी, ठंडी सड़क की वो शांति और झील के किनारे पाषाण देवी के दर्शन वाकई अविस्मरणीय हैं। जब पर्यटन और स्थानीय संस्कृति का ऐसा मेल हो, तो शासन-प्रशासन के लिए भी पर्यावरण और आस्था दोनों का संतुलन बनाए रखना अहम हो जाता है।

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

ठंडी सड़क पर नैनी झील के किनारे प्राकृतिक चट्टान पर मां के नौ रूप दिखना वाकई बहुत अनोखा अनुभव होगा। अगली बार नैनीताल जाना हुआ तो इस मंदिर के दर्शन जरूर करने जाना चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 दिन पहले

रोहन, तुम्हारी बात बिल्कुल सही है! मैं पिछली बार जब नैनीताल गया था, तब ठंडी सड़क पर टहलते हुए इस मंदिर के दर्शन किए थे, वो प्राकृतिक चट्टान देखकर सचमुच बहुत सुकून मिला था।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp