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उत्तराखंड के ऋषिकेश में छिपा 2009 बैच का IRS अफसर गिरफ्तार, रिश्वत मामले में CBI ने पकड़ाभारत
21 सित॰ 2026, 7:15 pm (13 घंटे पहले)· 0

उत्तराखंड के ऋषिकेश में छिपा 2009 बैच का IRS अफसर गिरफ्तार, रिश्वत मामले में CBI ने पकड़ा

बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा हिरासत मंजूर किए जाने के बाद फरार हुए सीजीएसटी के अतिरिक्त आयुक्त विनय कुमार कांठेती को सीबीआई ने ऋषिकेश से दबोच लिया है। यह मामला एक व्यावसायिक फर्म से जुड़े विवाद को निपटाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की घूस मांगने और 40 लाख रुपये में सौदा तय करने से जुड़ा है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो की मुंबई स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने कर वसूली के नाम पर घूसखोरी में लिप्त एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने उत्तराखंड के ऋषिकेश में ठिकाना बनाकर छिपे बैठे केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर के अतिरिक्त आयुक्त विनय कुमार कांठेती को धर दबोचा। वर्ष 2009 बैच का यह भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी अदालत द्वारा हिरासत मंजूर किए जाने के बाद से लगातार फरार चल रहा था। इस पूरे प्रकरण में एक व्यावसायिक फर्म से जुड़े मामले को दबाने के एवज में डेढ़ करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई थी, जिसे बाद में 40 लाख रुपये पर तय किया गया। मुख्य आरोपी अधिकारी की इस गिरफ्तारी के बाद संबंधित महकमे में व्यापक हड़कंप मच गया है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ था मुकदमा

इस कानूनी कार्रवाई की शुरुआत तब हुई जब रायगढ़ स्थित सीजीएसटी खांडेश्वर के अधीक्षक और अतिरिक्त आयुक्त के आचरण के खिलाफ सीबीआई को एक औपचारिक शिकायत प्राप्त हुई। प्रारंभिक तथ्यों की पुष्टि होने पर जांच एजेंसी ने 26 अगस्त 2026 को भ्रष्टाचार का नियमित मामला दर्ज किया। एक फर्म से जुड़े लंबित मामले को रफा-दफा करने के उद्देश्य से अधिकारियों की ओर से भारी-भरकम राशि की अनुचित मांग रखी गई थी। एजेंसी ने शिकायतकर्ता के सहयोग से योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर बिचौलिए को रंगे हाथों पकड़ने की रणनीति तैयार की।

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रंगे हाथों 40 लाख रुपये बरामदगी के साथ जालसाजी का भंडाफोड़

सीबीआई के दल ने पुख्ता खुफिया इनपुट के आधार पर 27 अगस्त 2026 को एक ट्रैप का आयोजन किया। इस योजनाबद्ध कार्रवाई के दौरान कस्टम्स हाउस एजेंट नरिंदर राजपूत को 40 लाख रुपये की नकद रकम प्राप्त करते समय रंगे हाथों दबोच लिया गया। पूछताछ और मौके पर मिले साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि उक्त घूस की रकम सीजीएसटी अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा तथा अतिरिक्त आयुक्त विनय कुमार कांठेती के लिए ही वसूली जा रही थी। इसके तुरंत बाद जांच एजेंसी ने त्वरित कदम उठाते हुए अधीक्षक और प्राइवेट एजेंट सहित तीनों आरोपियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया था।

ठाणे की विशेष अदालत से लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट तक की कानूनी जंग

गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी करने के पश्चात सीबीआई ने सभी आरोपियों को ठाणे स्थित विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। जांच एजेंसी ने पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने के लिए पांच दिन की पुलिस कस्टडी की मांग की थी। हालांकि विशेष अदालत ने 28 अगस्त 2026 को पुलिस रिमांड की अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का फैसला सुना दिया।

निचली अदालत के इस निर्णय के खिलाफ सीबीआई ने बिना विलंब किए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और एक रिवीजन पिटीशन दाखिल की। उच्च न्यायालय ने मामले के तथ्यों और एजेंसी की दलीलों पर विचार करते हुए 16 सितंबर 2026 को निचली अदालत का आदेश पलट दिया। हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपियों को दो दिन की सीबीआई कस्टडी में भेजने का स्पष्ट निर्देश जारी किया।

अदालत के आदेश की अवहेलना और ऋषिकेश से गिरफ्तारी

बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए जांच एजेंसी ने अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा और बिचौलिए नरिंदर राजपूत को तत्काल हिरासत में लेकर सघन पूछताछ की। हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद अदालत ने इन दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। दूसरी तरफ अतिरिक्त आयुक्त विनय कुमार कांठेती अदालत के आदेश की सीधी अवहेलना करते हुए अचानक भूमिगत हो गया।

मुंबई सीबीआई की टीम ने फरार अधिकारी का सुराग लगाने के लिए तकनीकी निगरानी का सहारा लिया और गुप्त सूचनाएं एकत्रित कीं। इन प्रयासों के जरिए एजेंसी को पता चला कि आरोपी अधिकारी उत्तराखंड के ऋषिकेश में छिपा हुआ है। इसके बाद जांच दल ने वहां छापेमारी कर उसे सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया।

सवाल-जवाब

सीबीआई ने ऋषिकेश से किस अधिकारी को गिरफ्तार किया है?
सीबीआई ने सीजीएसटी के अतिरिक्त आयुक्त और 2009 बैच के आईआरएस अधिकारी विनय कुमार कांठेती को ऋषिकेश से गिरफ्तार किया है।
यह मामला कितनी रिश्वत की मांग से जुड़ा हुआ है?
इस मामले में एक व्यावसायिक फर्म से जुड़े विवाद को रफा-दफा करने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की मांग की गई थी, जिसे बाद में 40 लाख रुपये में तय किया गया।
इस केस में बिचौलिए को कब और कैसे पकड़ा गया?
जांच एजेंसी ने 27 अगस्त 2026 को जाल बिछाकर कस्टम्स हाउस एजेंट नरिंदर राजपूत को 40 लाख रुपये का नकद भुगतान लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया था?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को निचली अदालत का जमानत आदेश पलटते हुए आरोपियों को दो दिन की सीबीआई हिरासत में भेजने का निर्देश दिया था।
मामले में नामजद अन्य आरोपियों की वर्तमान स्थिति क्या है?
पूछताछ के बाद अदालत ने सीजीएसटी अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा और बिचौलिए नरिंदर राजपूत को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
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टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·11 घंटे पहले

अनन्या अय्यर के रूप में मेरा मानना है कि भले ही यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है, लेकिन इस तरह के हाई-प्रोफाइल मामले अक्सर वेब सीरीज और क्राइम थ्रिलर कहानियों के लिए बेहतरीन मसाला बनते हैं। एक वरिष्ठ पत्रकार के तौर पर, यह देखना दिलचस्प होगा कि कैसे नौकरशाही और भ्रष्टाचार का यह ताना-बाना आने वाले समय में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर रचनात्मक कंटेंट के रूप में उभरता है।

Ravikash Gupta@ravikash·12 घंटे पहले

वरिष्ठ कर अधिकारियों का इस प्रकार के भ्रष्टाचार में लिप्त होना देश के कॉरपोरेट और व्यावसायिक माहौल के लिए एक गंभीर झटका है। जब कर प्रशासन के शीर्ष स्तर पर ऐसी संलिप्तता सामने आती है, तो यह निवेशकों के विश्वास और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के दावों पर सवालिया निशान लगाती है। आगे चलकर इस मामले की वित्तीय जांच का दायरा बेनामी संपत्ति और हवाला चैनलों तक बढ़ने की पूरी संभावना है, जिससे कई अन्य चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·12 घंटे पहले

यह मामला केवल एक व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का उदाहरण नहीं है, बल्कि कर प्रशासन के आंतरिक निगरानी तंत्र और जवाबदेही पर बड़े नीतिगत सवाल खड़े करता है। जब अखिल भारतीय सेवा के वरिष्ठ अधिकारी इस तरह के सिंडिकेट में शामिल पाए जाते हैं, तो शासन प्रणाली में सुधार और प्रशासनिक नैतिकता के पुनर्मूल्यांकन की सख्त आवश्यकता महसूस होती है।

Rohan Verma@rohan-verma·12 घंटे पहले

वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों द्वारा इस तरह का संगठित भ्रष्टाचार कर प्रशासन की साख को गहरा आघात पहुंचाता है। ऋषिकेश जैसे धार्मिक और दूरस्थ शहर में ठिकाना बनाकर गिरफ्तारी से बचना यह दर्शाता है कि सफेदपोश अपराधियों के पास मजबूत संरक्षण नेटवर्क होता है। हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा निचली अदालत के आदेश को पलटने से जांच एजेंसी को बड़ी कानूनी बढ़त मिली है, लेकिन इस बात की गहराई से जांच होनी चाहिए कि फरार रहने के दौरान आरोपी को किसने और कहां शरण दी थी, ताकि इस पूरे सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचा जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·12 घंटे पहले

अदालत के आदेश के बाद उच्च पदस्थ अधिकारी का इस तरह भूमिगत होना यह स्पष्ट करता है कि कर प्रशासन के भीतर गहरी पैठ वाले नेटवर्क जांच में बाधा डालने की क्षमता रखते हैं। अब जांच एजेंसी के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह उन सभी संपर्कों और सहयोगियों की पहचान करे जिन्होंने इस भगोड़े अधिकारी को उत्तराखंड तक पहुंचने और वहां छिपने में मदद की, ताकि इस आपराधिक तंत्र के सभी मोर्चों को बेनकाब किया जा सके।

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