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उत्तराखंड में बढ़ी ठंड तो सांस के मरीजों की बढ़ी परेशानी, नैनीताल के डॉक्टर ने बताए बचाव के उपायउत्तराखंड
17 अक्तू॰ 2026, 2:23 pm (20 दिन पहले)· 0

उत्तराखंड में बढ़ी ठंड तो सांस के मरीजों की बढ़ी परेशानी, नैनीताल के डॉक्टर ने बताए बचाव के उपाय

नैनीताल में ठंड बढ़ने के साथ ही अस्थमा और सांस संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। अस्पताल के विशेषज्ञ ने मरीजों को ठंड में खास सावधानी बरतने की सलाह दी है।

उत्तराखंड के नैनीताल में मौसम में बदलाव के साथ ही तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसका सीधा असर अब स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। सुबह और शाम के समय बढ़ती हुई ठंड के कारण सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। खासकर अस्थमा से पीड़ित लोगों को इस ठंडे मौसम में सांस लेने में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय चिकित्सा इकाइयों में ऐसे मरीजों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे स्वास्थ्य चिंताएं भी गहरी होती जा रही हैं।

बीडी पांडे जिला अस्पताल में उमड़ रही मरीजों की भीड़

नैनीताल के प्रसिद्ध बीडी पांडे जिला अस्पताल में इन दिनों सांस की विभिन्न समस्याओं से पीड़ित मरीज उपचार के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। अस्पताल के चेस्ट फिजिशियन डॉ. अभिषेक गुप्ता के अनुसार, मौजूदा समय में रोजाना ओपीडी में 60 से 70 मरीज स्वास्थ्य लाभ के लिए आ रहे हैं। इनमें से करीब 25 से 30 मरीज अकेले अस्थमा की गंभीर समस्या से जूझ रहे होते हैं। इस स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने मौसम के इस बदलाव के दौर में सभी संबंधित रोगियों को विशेष एहतियात बरतने की कड़ी हिदायत दी है।

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ठंड हवाओं से श्वसन नलियों में होती है सिकुड़न

विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों की आहट के साथ ही श्वसन तंत्र से जुड़ी परेशानियां तेजी से उभरने लगती हैं। तापमान में गिरावट आने और सीधे ठंडी हवा के संपर्क में आने से कई मरीजों की श्वास नली में सूजन और संकुचन जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई, लगातार खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेते समय घरघराहट जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिन लोगों को पहले से ही यह पुरानी बीमारी है, उनके लिए यह मौसम अत्यधिक सतर्कता की मांग करता है।

दवाओं और इनहेलर का रखें नियमित ध्यान

चिकित्सकों का कहना है कि अस्थमा एक ऐसी स्थिति है जिसमें श्वसन मार्ग में सूजन पैदा होने से हवा का आवागमन बाधित होता है। हालांकि इसे हमेशा जड़ से समाप्त करना संभव नहीं होता, लेकिन उचित चिकित्सा और नियमित देखभाल के जरिए इसे पूरी तरह नियंत्रण में रखा जा सकता है। मरीजों को सख्त सलाह दी जाती है कि वे बिना चिकित्सक की पूर्व सलाह के अपनी कोई भी निर्धारित दवा या इनहेलर का इस्तेमाल बंद न करें। लक्षण थोड़े कम होते ही दवा छोड़ देना भविष्य में भारी पड़ सकता है।

बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

सर्दियों के इस मौसम में अस्थमा रोगियों को अपनी दिनचर्या में कुछ बुनियादी बदलाव करने की आवश्यकता होती है। जब सुबह और शाम के वक्त तापमान काफी गिर जाता है, तब ठंडी हवा के सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए। घर से बाहर निकलते समय अपने मुंह और नाक को किसी साफ स्कार्फ या मास्क से अच्छी तरह ढक कर रखना चाहिए। इसके अलावा धूल, धुएं तथा अन्य प्रदूषण फैलाने वाले कारकों से भी उचित दूरी बनाकर रखनी चाहिए ताकि सांस लेने में किसी प्रकार की अतिरिक्त बाधा उत्पन्न न हो।

बच्चों में भी नजर आ सकते हैं शुरुआती लक्षण

यह समस्या केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है बल्कि 14 से 15 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों में भी अस्थमा के शुरुआती लक्षण देखने को मिल सकते हैं। यदि किसी बच्चे को बार-बार खांसी की शिकायत रहती है, खेलकूद या दौड़भाग करते समय जल्दी सांस फूलने लगती है या फिर रात के समय सांस लेने में तकलीफ होती है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि ये संकेत अन्य संक्रमणों के भी हो सकते हैं, इसलिए सटीक कारण का पता लगाने के लिए समय पर चिकित्सकीय परीक्षण कराना बेहद आवश्यक माना जाता है।

सवाल-जवाब

नैनीताल के किस अस्पताल में सांस के मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं?
नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल में सांस संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
ओपीडी में रोजाना कितने मरीज सांस की समस्या लेकर आ रहे हैं?
बीडी पांडे जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 60 से 70 मरीज सांस संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
दैनिक ओपीडी में कितने मरीज अस्थमा से पीड़ित बताए गए हैं?
इन 60 से 70 मरीजों में से 25 से 30 मरीज अस्थमा की बीमारी से पीड़ित होते हैं।
नैनीताल अस्पताल के चेस्ट फिजिशियन का क्या नाम है?
अस्पताल के चेस्ट फिजिशियन डॉ. अभिषेक गुप्ता हैं।
कितनी उम्र के बच्चों में अस्थमा के शुरुआती लक्षण दिख सकते हैं?
14 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों में भी अस्थमा के शुरुआती लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·20 दिन पहले

नैनीताल में जब भी पारा गिरता है, मेरी मौसी की अस्थमा की दिक्कत बहुत बढ़ जाती है। ठंडी हवा में निकलते ही उन्हें साँस लेने में तकलीफ होने लगती है, इसलिए इस मौसम में वे घर से बाहर जाने से बहुत बचती हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 दिन पहले

नैनीताल में जब भी नवंबर-दिसंबर की ठंड शुरू होती है, मेरे एक बुजुर्ग पड़ोसी को सांस की दिक्कत तुरंत घेर लेती है। सुबह-शाम बाहर निकलना उनके लिए जोखिम भरा हो जाता है और इस मौसम में इनहेलर हमेशा साथ रखना ही पड़ता है।

Ravikash Gupta@ravikash·20 दिन पहले

अर्जुन जी, सच कहा आपने। क्या आपके पड़ोसी ने इस बार डॉक्टर से मिलकर कोई नया इनहेलर शुरू किया है या पुरानी दवा ही चल रही है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 दिन पहले

सर्दियां आते ही नैनीताल में सांस के मरीजों का अस्पतालों में पहुंचना वाकई चिंता की बात है। डॉक्टर सही सलाह दे रहे हैं कि ठंड से बचना चाहिए। क्या प्रशासन ने इस बढ़ती भीड़ को देखते हुए अस्पतालों में दवाइयों और डॉक्टरों की अतिरिक्त व्यवस्था की है?

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

करण भाई, ठंड तो हर साल बढ़ती है, पर अस्पतालों में भीड़ कोई अचानक तो नहीं आ गई। मुझे लगता है कि मरीज सिर्फ मौसम की वजह से नहीं बल्कि समय पर डॉक्टर के पास न जाने से भी बढ़ते हैं।

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