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उत्तराखंड में मौसम का कहर, हरिद्वार को मिलेगी राहत, पिथौरागढ़ में आदि कैलाश यात्रा स्थगितउत्तराखंड
15 सित॰ 2026, 5:23 am (7 दिन पहले)· 2

उत्तराखंड में मौसम का कहर, हरिद्वार को मिलेगी राहत, पिथौरागढ़ में आदि कैलाश यात्रा स्थगित

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तराखंड में भारी बारिश और आंधी-तूफान को लेकर चेतावनी जारी की है, जिससे कई जिलों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। इसके चलते आदि कैलाश यात्रा को भी 20 सितंबर तक टाल दिया गया है।

उत्तराखंड के निवासियों को मौसम के कड़े मिजाज को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को राज्य के विभिन्न हिस्सों में मूसलाधार बारिश और तेज आंधी-तूफान का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार, प्रदेश के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बौछारें तो गिरेंगी ही, साथ ही कुछ खास क्षेत्रों में भारी बारिश का भी अंदेशा है। इस दौरान बादलों की गड़गड़ाहट के साथ बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है, जो विशेष रूप से पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और यात्रा को लेकर चेतावनी

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों और लैंडस्लाइड की आशंका वाले जोन में रहने वाले लोगों को खासी सावधानी बरतनी होगी। सफर के दौरान चालकों और यात्रियों को ज्यादा सतर्क रहने की हिदायत दी गई है, क्योंकि लगातार हो रही बारिश से सड़कों की स्थिति और विजिबिलिटी दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है। आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड में इससे पहले 14 सितंबर को भी अच्छी-खासी यानी 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश दर्ज की गई थी। मौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक 15 और 16 सितंबर को बादलों की जोरदार गर्जना और चट्टानें खिसकने का गंभीर खतरा बना हुआ है, जिसके चलते पहाड़ी हाईवे पर सफर करने वालों को पूरी चौकसी बरतने को कहा गया है।

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हरिद्वार में राहत और आने वाले दिनों का अनुमान

राहत भरी खबर यह है कि 17 सितंबर तक हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे इलाकों में छिटपुट बौछारें पड़ने से मौसम कुछ सुहाना हो सकता है। इसके बाद आगामी 18 और 19 सितंबर को पूरे प्रदेशभर में बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी देखने को मिलेगी। हालांकि, वर्तमान में मौसम के तल्ख तेवर उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के 23 राज्यों को भी प्रभावित कर रहे हैं, जहां 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की आशंका जताई गई है। तेज हवाओं और बारिश के कारण पेड़ों की टहनियां टूटने के साथ-साथ केले, पपीते और सहजन जैसे छोटे पेड़ भी उखड़ सकते हैं, जिसका सीधा असर बागवानी और खड़ी फसलों पर पड़ने की आशंका है।

फसलों और बुनियादी ढांचे को संभावित नुकसान

प्रतिकूल मौसम और मूसलाधार बारिश की वजह से कमजोर ढांचों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। सड़कों पर जलभराव और भारी यातायात प्रभावित होने की पूरी आशंका बनी हुई है। निचले इलाकों में कीचड़ बहने, जमीन धंसने और लैंडस्लाइड जैसी घटनाएं परेशानी बढ़ा सकती हैं। खराब दृश्यता के कारण चालकों को वाहन चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे लगातार बदलते मौसम पर अपनी नजर बनाए रखें और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित ठिकानों का रुख करने के लिए तैयार रहें। खासकर बिजली गिरने के खतरे को देखते हुए पेड़ों के नीचे शरण लेने से सख्त मना किया गया है।

आदि कैलाश यात्रा स्थगित और केदारनाथ मार्ग का हाल

खराब मौसम और कई जगहों पर रास्ते बंद होने के कारण पिथौरागढ़ जिले में होने वाली आदि कैलाश यात्रा के दूसरे चरण को आगामी 20 सितंबर तक के लिए टाल दिया गया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इस चरण की शुरुआत 15 सितंबर से होनी थी। धारचूला के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट आशीष जोशी ने मीडिया को जानकारी दी कि यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए इनर लाइन परमिट जारी करने की प्रक्रिया अब 20 सितंबर से शुरू की जाएगी, हालांकि यह अभी एक संभावित तारीख ही है। उल्लेखनीय है कि इस साल 1 मई को यात्रा शुरू होने के बाद से महज दो महीनों के भीतर रिकॉर्ड 52,441 तीर्थयात्री आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन कर चुके हैं। दूसरी ओर, केदारनाथ पैदल मार्ग पर चीरबासा के पास पिछले कुछ दिनों से हो रहे भूस्खलन के बाद सुरक्षा व्यवस्था को बेहद चाक-चौबंद कर दिया गया है। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के मुताबिक, स्थिति पर नजर रखने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ एसडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीमों को भी तैनात किया गया है। पैदल मार्ग को सुचारू कर दिया गया है, लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर फिलहाल पहले केदारनाथ से वापस लौट रहे श्रद्धालुओं को ही प्राथमिकता के साथ निकाला जा रहा है, जिसके कारण यात्रा पड़ाव सोनप्रयाग में तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ जुटी हुई है।

सवाल-जवाब

उत्तराखंड में भारी बारिश का अनुमान किसने लगाया है?
भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी ने उत्तराखंड में भारी बारिश और आंधी-तूफान की संभावना जताई है।
उत्तराखंड में आदि कैलाश यात्रा को कब तक टाल दिया गया है?
खराब मौसम और रास्ते बंद होने के कारण आदि कैलाश यात्रा के दूसरे चरण को 20 सितंबर तक टाल दिया गया है।
केदारनाथ मार्ग पर सुरक्षा के लिए कौन सी टीमें तैनात हैं?
रुद्रप्रयाग में पुलिस के साथ एसडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं।
इस साल अब तक कितने तीर्थयात्रियों ने आदि कैलाश के दर्शन किए हैं?
इस साल 1 मई को यात्रा शुरू होने के बाद से रिकॉर्ड 52,441 तीर्थयात्री आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन कर चुके हैं।
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