असम के कई हिस्सों में बाढ़ के बढ़ते पानी ने व्यापक तबाही मचा रखी है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। चारों तरफ बहते पानी, डूबते मकानों और टूटी सड़कों के हाहाकार के बीच सिवसागर जिले से सामने आई एक तस्वीर ने हर किसी का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। बामुनपुखुरी इलाके में स्थित एक मंदिर परिसर बाढ़ के प्रचंड वेग में पूरी तरह बह गया, लेकिन वहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा अपने स्थान पर अडिग खड़ी रही। इस दृश्य का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय निवासी और श्रद्धालु पानी में से होकर प्रतिमा तक पहुंच रहे हैं तथा नतमस्तक होकर प्रार्थना कर रहे हैं। भारी आपदा के दौर में यह नजारा लोगों के लिए मानसिक और आध्यात्मिक संबल का जरिया बन गया है।
बाढ़ के प्रलयकारी पानी के बीच अटूट आस्था की तस्वीर
सिवसागर जिले के बामुनपुखुरी क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने से स्थिति बेहद खौफनाक हो गई थी। मलबे और तेज बहाव ने आसपास के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। मंदिर के कोने-कोने को पानी ने अपने आगोश में ले लिया और इमारत का बड़ा हिस्सा बह गया। इसके बावजूद बजरंगबली की प्रतिमा अपने स्थान पर बिना किसी क्षति के खड़ी नजर आ रही है। इस दृश्य को देखकर कई लोगों ने इसे विषम परिस्थितियों में उम्मीद की किरण बताया है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना से जुड़े संदेश तेजी से प्रसारित हो रहे हैं, जहां लोग जय हनुमान और जय बजरंगबली लिखकर आपदा से जूझने का हौसला बढ़ा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि जब सब कुछ पानी में विलीन हो गया, तब भी इस प्रतिमा का अपने स्थान से न हिलना संकट के समय धैर्य और विश्वास का प्रतीक है। हालांकि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसी दृश्य को चमत्कार मानना निजी आस्था का विषय होता है और जमीनी दावों की अपनी पड़ताल होती है, लेकिन इस दृश्य ने आपदा से प्रभावित हजारों परिवारों को एक भावुक सहारा दिया है। जलप्रलय की भयावह खबरों के बीच यह घटना लोगों के मन में आशा और विश्वास जगाने का काम कर रही है।
असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के आंकड़े और 13 जिलों की स्थिति
हनुमान जी की प्रतिमा का यह वीडियो जिस आपदा के दौर में सामने आया है, उसकी भयावहता असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के आधिकारिक आंकड़ों से साफ जाहिर होती है। प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार तक राज्य के 13 जिलों में कुल 1,55,849 लोग बाढ़ के प्रकोप से सीधे प्रभावित हुए हैं। जलभराव और नदियों के उफान के कारण 464 गांवों में पानी घुस चुका है और 33 रेवेन्यू सर्किल पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।
इस साल असम में बाढ़ और उससे जुड़े हादसों के कारण जान गंवाने वाले लोगों का आंकड़ा बढ़कर 98 तक पहुंच गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य में प्रशासनिक टीमों और राहत बलों के सामने बचाव कार्यों को लेकर कितनी बड़ी चुनौती खड़ी है। पानी के तेज बहाव ने लोगों के रहने के ठिकाने छीन लिए हैं और सामान्य जीवन को पूरी तरह ठप कर दिया है। हजारों परिवार इस समय सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं।
सिवसागर, गोलाघाट और जोरहाट जिलों में तबाही की ज़मीनी हकीकत
राज्य के ऊपरी इलाकों में बाढ़ का प्रकोप सबसे अधिक देखा जा रहा है। सिवसागर जिले में बाढ़ के कारण 48,286 लोग बेहद कठिन परिस्थितियों में दिन गुजार रहे हैं। वहीं पड़ोसी जिले गोलाघाट में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां प्रभावित लोगों की संख्या 58,750 दर्ज की गई है। जोरहाट जिला भी इस त्रासदी से अछूता नहीं रहा है और वहां 25,259 लोग जलभराव और तबाही की चपेट में आए हैं।
इन जिलों के दर्जनों गांवों में संपर्क मार्ग पूरी तरह कट चुके हैं। सड़कें पानी में डूब गई हैं और पुलिया बह जाने से आवागमन ठप हो गया है। हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसलें जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय और राज्य आपदा मोचन बल की टीमें स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं और राशन सामग्री का वितरण कर रही हैं।
आपदा के दौर में मानसिक संबल और पुनर्वास की भावी चुनौतियां
बाढ़ जैसी भीषण प्राकृतिक आपदा के समय लोगों को न केवल भौतिक नुकसान उठाना पड़ता है, बल्कि वे मानसिक रूप से भी टूट जाते हैं। ऐसे कठिन समय में आस्था और विश्वास से जुड़ी तस्वीरें लोगों के भीतर हिम्मत बनाए रखने में सहायक सिद्ध होती हैं। सिवसागर में हनुमान जी की मूर्ति का अडिग रहना श्रद्धालुओं को यह संदेश देता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी विकराल क्यों न हों, धैर्य और आत्मबल के सहारे कठिनाइयों पर पार पाया जा सकता है।
हालांकि, आने वाले दिनों में प्रशासन और स्थानीय निवासियों के सामने चुनौतियां कम नहीं होंगी। जब बाढ़ का पानी उतरेगा, तब प्रभावित क्षेत्रों में गाद, कचरा और संक्रमण फैलने की समस्या खड़ी होगी। क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत, सड़कों का पुनर्निर्माण, पेयजल व्यवस्था की बहाली और महामारी से बचाव के लिए बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाने की आवश्यकता होगी। संकट के इस दौर में अडिग खड़ी प्रतिमा की यह तस्वीर लोगों को एकजुट रहने और पुनर्वास की इस लंबी लड़ाई को मजबूती से लड़ने का साहस दे रही है।



















