नई दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी दलों द्वारा आयोजित प्रतीकात्मक संसदीय सत्र की तीखी आलोचना की है। पार्टी प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने विश्व बैंक की ओर से जारी हालिया अध्ययन के निष्कर्षों को सामने रखते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था के ताजा आंकड़े विपक्ष की राजनीतिक नौटंकी की कलई खोलने के लिए काफी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब देश में वंचित वर्ग के कल्याण के ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं, तब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सड़क पर बनावटी कार्यवाही चलाना केवल ध्यान भटकाने का प्रयास है।
विपक्षी आयोजन और चुनाव आयोग पर आरोप
विपक्षी दलों के गठबंधन ने मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सवाल खड़े किए थे। इस सिलसिले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक जन अदालत या सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का किरदार निभा रहे एक कलाकार की टिप्पणी पर भी राजनीतिक गलियारों में काफी विवाद पैदा हुआ। भाजपा की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि खराब करने की सोची-समझी रणनीति करार दिया गया।
विश्व बैंक की रिपोर्ट में गरीबी में ऐतिहासिक गिरावट
सुधांशु त्रिवेदी ने विश्व बैंक की इंडिया पावर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के दौर में वंचित तबकों के जीवन में क्रांतिकारी सुधार हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्था के वर्ष 2025 के अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2011 से 2023 के बीच भारत ने बहुआयामी गरीबी के स्तर में तेज कमी दर्ज की है। एक दशक पहले देश की 27 प्रतिशत से अधिक आबादी अत्यंत कठिन अभावों में जीवन यापन कर रही थी, जो अब गिरकर महज 2.6 प्रतिशत पर आ गई है।
इसके अलावा अक्टूबर 2026 की गरीबी और समानता रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए भाजपा सांसद ने जानकारी दी कि 4.20 डॉलर प्रतिदिन की निचली मध्यम आय वाली गरीबी रेखा के पैमाने पर भी बड़ा सुधार दर्ज हुआ है। 2011 में इस दायरे में आने वाली जनसंख्या का अनुपात 57.7 प्रतिशत दर्ज था, जो वर्ष 2023 के आकलन में सिमटकर मात्र 16.1 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट बदलाव जमीनी स्तर पर नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को साबित करता है।
गिनी इंडेक्स में भारत की बेहतर रैंकिंग
आर्थिक विषमता के मोर्चे पर भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए भाजपा नेता ने अगस्त 2025 में विश्व बैंक द्वारा जारी किए गए गिनी इंडेक्स का ब्योरा रखा। इस सूचकांक में भारत का स्कोर 22.5 दर्ज किया गया, जिसके आधार पर भारत विश्व भर में सबसे ज्यादा आर्थिक समानता वाले मुल्कों की सूची में चौथे पायदान पर पहुंच गया। इस पैमाने के अनुसार, जी7 और जी20 के सदस्य देशों की तुलना में भारत के भीतर आर्थिक असमानता का स्तर सबसे कम पाया गया था।
राजनीतिक सोच और दृष्टिकोण का टकराव
प्रेस वार्ता के दौरान सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के पुराने बयानों को याद दिलाते हुए विपक्षी रणनीति पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगस्त 2013 में राहुल गांधी ने गरीबी को केवल एक मानसिक अवस्था बताया था, जबकि पूर्ववर्ती शासन के समय डॉ. मनमोहन सिंह ने टिप्पणी की थी कि पैसे पेड़ों पर नहीं उगते। भाजपा सांसद ने रेखांकित किया कि तत्कालीन यूपीए सरकार के ढुलमुल नजरिए की वजह से देश के 27.6 प्रतिशत लोग अभावों में फंसे रहे, जबकि मौजूदा एनडीए सरकार ने वास्तविक नीतियां लागू कर उन्हें इस चक्रव्यूह से बाहर निकाला है। उन्होंने निष्कर्ष दिया कि एक तरफ सरकार वंचितों के उत्थान में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी खेमा सत्ता से बेदखल होने के बाद अव्यवस्था फैलाने का रास्ता चुन रहा है।
















