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विष्णु देव साय ने खरीदे मिट्टी के दीये, छत्तीसगढ़ में सेवा संकल्प अभियान की अनूठी शुरुआतछत्तीसगढ़
15 सित॰ 2026, 8:36 pm (9 दिन पहले)· 1

विष्णु देव साय ने खरीदे मिट्टी के दीये, छत्तीसगढ़ में सेवा संकल्प अभियान की अनूठी शुरुआत

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर में सड़क किनारे दीये बेचने वाली महिला से खरीदारी कर 'सेवा संकल्प अभियान' का आगाज किया है। इस पहल के तहत 17 सितंबर को पूरे प्रदेश में घर-घर 'आशीर्वाद का दीया' जलाया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में आगामी 17 सितंबर से आरंभ होने जा रहे 'सेवा संकल्प अभियान' से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील और अनूठा वाकया सामने आया है। राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वयं पहल करते हुए एक स्थानीय महिला से मिट्टी के दीये खरीदे और इस व्यापक अभियान का विधिवत सूत्रपात किया। उनकी इस सादगी भरी कार्यशैली ने पूरे राज्य में जनसेवा और श्रम के सम्मान का एक सशक्त संदेश प्रसारित किया है।

रायपुर में सड़क किनारे बैठी महिला से की मुलाकात

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी व्यस्तचर्या के बीच राजधानी रायपुर के जाने-माने तेलीबांधा मरीन ड्राइव पहुंचे। वहां उन्होंने सड़क के किनारे बैठकर मिट्टी के दीये बेच रही मीरा नाम की एक परिश्रमी महिला को देखा। बिना किसी प्रोटोकॉल के वह सीधे उस महिला के पास गए, उसका कुशलक्षेम जाना और बड़े ही स्नेहभाव से बातचीत की। मुख्यमंत्री के इस मिलनसार और सरल स्वभाव ने वहां मौजूद आम नागरिकों का मन मोह लिया और उनकी यह सहजता सोशल मीडिया पर भी खासी सराहना पा रही है।

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हजार रुपए देकर बढ़ाया हौसला

मुख्यमंत्री ने मीरा के कौशल और उसके कठिन परिश्रम का मोल पहचानते हुए उससे दीये खरीदे। दीयों की तय कीमत चुकाने के बाद उन्होंने प्रोत्साहन राशि के रूप में मीरा को अपने पास से 1000 रुपए भी भेंट किए। स्थानीय दस्तकारों और पारंपरिक कारीगरों के प्रति दिखाई गई इस आत्मीयता का दृश्य इंटरनेट पर भी लोगों का दिल जीत रहा है, जहां हर कोई मुख्यमंत्री के इस कदम की सराहना कर रहा है।

'आशीर्वाद का दीया' बनेगा अभियान की पहचान

मुख्यमंत्री द्वारा खरीदा गया यही विशेष दीया अब 'आशीर्वाद का दीया' के रूप में इस पूरे सामाजिक अभियान का मुख्य प्रतीक बन गया है। आगामी 17 सितंबर से शुरू होने वाले 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत इसी दीये के माध्यम से एक विशेष संकल्प को आगे बढ़ाया जा रहा है। तय कार्यक्रम के अनुसार 17 सितंबर को छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में हर घर के भीतर यह 'आशीर्वाद का दीया' प्रज्वलित किया जाएगा, जो स्थानीय हस्तशिल्पकारों की मेहनत, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सेवा की भावना का प्रतीक बनेगा।

प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़ा है विशेष कार्यक्रम

यह पूरा आयोजन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर विशेष रूप से आयोजित किया जा रहा है, जिससे इस अभियान का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इस प्रकार की अनूठी पहल से न केवल देश में वोकल फॉर लोकल के नारे को वास्तविक बल मिलता है, बल्कि यह सीख भी मिलती है कि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति के श्रम का सम्मान करना ही वास्तव में सच्चा सेवा संकल्प है।

सवाल-जवाब

सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत कब से हो रही है?
छत्तीसगढ़ में सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत 17 सितंबर से होने जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दीये कहां से खरीदे?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर के तेलीबांधा मरीन ड्राइव पर सड़क किनारे दीये बेच रही महिला से खरीदारी की।
महिला का नाम क्या था जिससे दीये खरीदे गए?
दीये बेचने वाली मेहनतकश महिला का नाम मीरा था।
मुख्यमंत्री ने दीये खरीदने के बाद महिला को कितने रुपए दिए?
मुख्यमंत्री ने दीयों की कीमत चुकाने के अलावा प्रोत्साहन के तौर पर मीरा को 1000 रुपए भी दिए।
खरीदे गए दीये को किस नाम से जाना जाएगा?
मुख्यमंत्री द्वारा खरीदा गया यह दीया 'आशीर्वाद का दीया' नाम से इस पूरे अभियान की पहचान बनेगा।
यह अभियान किस विशेष दिन से जुड़ा हुआ है?
यह कार्यक्रम 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर चलाया जा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·9 दिन पहले

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत सड़क किनारे की विक्रेता से दीये खरीदना और प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर को घर-घर 'आशीर्वाद का दीया' जलाने की यह पहल केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं है। यह 'वोकल फॉर लोकल' और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पारंपरिक हस्तशिल्पकारों व कुटीर उद्योगों को आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। इस तरह के जमीनी स्तर के अभियानों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलता है और त्योहारी सीजन से पहले पारंपरिक कारीगरों के वित्तीय समावेशन को भी बल मिलता है।

Sophie Laurent@sophie-laurent·9 दिन पहले

यूरोपीय राजनीति और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से देखें तो, इस प्रकार की नीतियां सीधे तौर पर विकेंद्रीकृत विकास और स्थानीय उत्पादकों को सशक्त बनाती हैं। छत्तीसगढ़ में 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत पारंपरिक कुटीर उद्योगों को जिस तरह से जोड़ा गया है, वह बाजार में मांग और आपूर्ति के स्थानीय संतुलन को मजबूत करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यदि ऐसे अभियानों को नीतिगत समर्थन और निरंतरता मिले, तो यह छोटे कारीगरों की आय में स्थिरता लाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने में अत्यंत मददगार साबित होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·9 दिन पहले

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा सड़क किनारे की महिला से दीये खरीदकर 'सेवा संकल्प अभियान' की शुरुआत करना सिमी रूप से 'वोकल फॉर लोकल' और প্রান্তीय कारीगरों को सीधा आर्थिक संबल देने का एक बेहतरीन उदाहरण है। आगामी 17 सितंबर को प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर 'आशीर्वाद का दिया' जलाए जाने से इस स्थानीय पहल को व्यापक जन-आंदोलन का रूप मिलने की पूरी संभावना है, जिससे पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा मिलेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह देखना अहम है कि प्रतीकात्मक राजनीति और जमीनी कल्याणकारी योजनाओं का यह मेल प्रशासनिक संवाद को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर स्थानीय दस्तकारों को इस तरह सीधे अभियान से जोड़ना, चुनावी और राजनीतिक रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कुटीर उद्योगों को मुख्यधारा की नीति के केंद्र में लाने की एक सोची-समझी रणनीति है। इससे न केवल पारंपरिक कारीगरों की दृश्यता बढ़ती है, बल्कि शासन की कल्याणकारी नीतियां भी सीधे आम जनमानस तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचती हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

मुख्यमंत्री का यह कदम प्रशासनिक और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। जब राज्य का मुखिया बिना किसी प्रोटोकॉल के आम नागरिकों और सड़क किनारे के विक्रेताओं से सीधा संवाद स्थापित करता है, तो इससे जनता और प्रशासन के बीच की दूरी कम होती है। इस तरह की जमीनी पहलें न केवल सामाजिक सद्भाव को मजबूत करती हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और जन-सहयोग के माहौल को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। आगामी 17 सितंबर को 'सेवा संकल्प अभियान' के दौरान पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ इस प्रकार के जन-कल्याण कार्यक्रमों का क्रियान्वयन शांतिपूर्ण ढंग से हो सके।

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