नागौर के सूखे खेतों में तारामीरा की बंपर पैदावार, कम लागत और कम पानी में रबी की बेहतर कमाईवोट चोरी के आरोपों पर राष्ट्रपति भवन कूच की तैयारी में विपक्ष, संसद से राष्ट्रपति तक मार्च का एलानमणिपुर के कामजोंग में सीमा के नजदीक 27 बम बरामद, सुरक्षा बलों ने नाकाम की बड़ी साजिशअमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से यूरो में मजबूती, लेकिन मंदी का दबाव अब भी हावीएनएससीएन (आईएम) हथियार सौदे में थाई तस्कर विली नारुएनार्टवानिच को छह साल की जेलक्वांटम सुरक्षा के लिए लेयर-1 नेटवर्क बनने की तैयारी में स्टार्कनेट, टोकन में आई 16 फीसदी की उछालचित्रकूट के मानिकपुर में स्थित शबरी आश्रम से जुड़ी हैं रामायण कालीन स्मृतियां, आदिवासी समाज की अटूट आस्था का केंद्रराजस्थान के अलवर में सीजेपी नेता दीपक बालियान को पुलिस ले गई साथ, दिल्ली विरोध से पहले बढ़ा तनावन्यूयॉर्क में गोलीबारी करने वाले आईसीई सुपरवाइजर ब्रेंडन क्यूनी पर अवैध गिरफ्तारियों और हिरासत में हिंसा के गंभीर आरोपमूलांक 7 अंकज्योतिष 9 अक्टूबर 2026: गहरी परख से सुलझेंगे जटिल मसले, जल्दबाजी से बचें
पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी के उपचुनाव नतीजों पर टिकी निगाहें, चार मुख्यमंत्रियों के सियासी रसूख की परीक्षाभारत
9 अक्तू॰ 2026, 9:50 am (2 घंटे पहले)· 1

पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी के उपचुनाव नतीजों पर टिकी निगाहें, चार मुख्यमंत्रियों के सियासी रसूख की परीक्षा

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी की पांच विधानसभा सीटों सहित असम की एक लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे आज घोषित हो रहे हैं, जो चार मुख्यमंत्रियों की लोकप्रियता का पैमाना तय करेंगे।

देश के चार अलग-अलग राज्यों में हुए छह उपचुनावों की मतगणना 9 अक्टूबर को शुरू हो चुकी है, जिसके नतीजे कई कद्दावर नेताओं के सियासी भविष्य और मौजूदा सरकारों की जमीनी पकड़ का स्पष्ट संदेश देंगे। इस चुनावी प्रक्रिया में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी की कुल पांच विधानसभा सीटें शामिल हैं, जबकि असम की नगांव संसदीय सीट पर भी वोटों की गिनती जारी है। हालिया आम चुनावों और विधानसभा मुकाबलों के बाद यह पहला मौका है जब इन क्षेत्रों में जनता के मूड की सीधी पड़ताल हो रही है। चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह साफ होगा कि सत्ता संभालने के बाद सरकार की लोकप्रियता बरकरार है या उसमें कोई कमी आई है। विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों के दो मुख्यमंत्रियों के लिए यह मुकाबला सीधे तौर पर प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है।

चार राज्यों की छह सीटों पर चुनावी गणित

इन सभी छह सीटों पर मतदान 6 अक्टूबर को संपन्न हुआ था, जिसके बाद 9 अक्टूबर को मतगणना के जरिए प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला तय हो रहा है। पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा क्षेत्रों नंदीग्राम और रेजीनगर पर सबकी निगाहें टिकी हैं। दक्षिण भारत की बात करें तो तमिलनाडु में मदुरंतकम और धरापुरम विधानसभा क्षेत्रों के परिणाम सामने आ रहे हैं। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की थट्टनचावडी विधानसभा सीट और पूर्वोत्तर में असम की नगांव लोकसभा सीट पर डाले गए मतों की गिनती की जा रही है। इन सभी सीटों पर चुनावी समीकरण काफी दिलचस्प हैं, क्योंकि इनमें से ज्यादातर सीटें विधायकों और सांसदों के इस्तीफे या दोहरी जीत के चलते खाली हुई थीं।

ये भी पढ़ें

पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी की साख का सवाल

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद यह उपचुनाव पार्टी के लिए सबसे बड़ा इम्तिहान बनकर सामने आया है। राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पिछले विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही हाई-प्रोफाइल सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। संवैधानिक नियमों के तहत एक सीट खाली करने की बाध्यता के कारण उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम सीट से इस्तीफा दे दिया था। इसी कारण नंदीग्राम में दोबारा चुनाव कराना पड़ा, जहां बीजेपी ने हसीरानी रथ को अपना प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा है। मुख्यमंत्री के अपने पुराने क्षेत्र में होने वाले इस मुकाबले के परिणाम से राज्य में बीजेपी के जमीनी प्रभाव और संगठनात्मक ताकत का सटीक अंदाजा मिलेगा।

दूसरी ओर, राज्य की रेजीनगर विधानसभा सीट पर भी बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। यह सीट आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर के दो सीटों पर चुनाव जीतने और बाद में एक सीट छोड़ने की वजह से खाली हुई थी। उनकी पार्टी ने इस उपचुनाव में उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है, जिससे यह लड़ाई पूरी तरह परिवार और पार्टी के सियासी दबदबे की जंग में तब्दील हो चुकी है।

असम की नगांव लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला

असम की नगांव लोकसभा सीट का उपचुनाव पूर्वोत्तर की राजनीति में विशेष महत्व रखता है। यह संसदीय सीट तब रिक्त हुई थी जब यहां के तत्कालीन सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने साल 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में सियासी पाला बदलते हुए वह बीजेपी में शामिल हो गए। इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने दिसपुर सीट से जीत दर्ज की और सांसद पद छोड़ दिया।

इस उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री हिमंता के नेतृत्व में देबाशीष शर्मा को चुनाव मैदान में उतारा गया है। कांग्रेस ने इस सीट पर शिवामणि बोरा पर भरोसा जताया है, जबकि ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल भी खुद चुनावी मैदान में उतरे हैं। इस त्रिकोणीय मुकाबले के नतीजों से यह तय होगा कि क्षेत्र में अल्पसंख्यक राजनीति और राष्ट्रीय दलों का संतुलन किस दिशा में झुक रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता के लिए अपनी पार्टी के उम्मीदवार को जिताना एक बड़ा राजनीतिक दायित्व बन चुका है।

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय और टीवीके की पहली परीक्षा

तमिलनाडु के चुनावी मैदान में मदुरंतकम और धरापुरम विधानसभा सीटों पर मुख्यमंत्री विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम की नजरें टिकी हुई हैं। इन दोनों सीटों पर पहले ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम के विधायक चुनकर आए थे। हालांकि, बाद में इन दोनों विधायकों ने विजय की सरकार को अपना समर्थन दिया और अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर टीवीके में शामिल हो गए। इसके चलते दोनों सीटें खाली हुईं और नए सिरे से चुनाव कराना पड़ा।

मुख्यमंत्री विजय की पार्टी टीवीके ने दलबदल कर आए इन्हीं दोनों नेताओं को दोबारा अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया है। यह चुनाव इसलिए भी बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इससे यह साबित होगा कि सत्ता में आने के बाद विजय की नई पार्टी का प्रभाव जनता के बीच कितना मजबूत हुआ है और क्या मतदाता दलबदलुओं को दोबारा स्वीकार करने के मूड में हैं।

पुडुचेरी में रंगासामी सरकार के लिए जनादेश

केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की थट्टनचावडी सीट का मुकाबला भी मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के राजनीतिक प्रभाव से जुड़ा हुआ है। आम चुनावों में रंगासामी ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन उन्होंने मंगलम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व जारी रखने का फैसला किया और थट्टनचावडी सीट छोड़ दी। इसी वजह से यहां उपचुनाव की नौबत आई।

इस सीट पर ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस, कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम के उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है। इन छह सीटों के समग्र नतीजे चारों राज्यों में विभिन्न राजनीतिक गठबंधनों की ताकत का अहसास कराएंगे। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उपचुनावों के परिणाम किसी भी मुख्यमंत्री की समग्र लोकप्रियता का अंतिम पैमाना नहीं हो सकते, क्योंकि स्थानीय समस्याएं, क्षेत्रीय समीकरण और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि भी मतदाताओं के फैसले में अहम भूमिका निभाती है।

सवाल-जवाब

किन-किन राज्यों में उपचुनाव के वोटों की गिनती हो रही है?
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी की पांच विधानसभा सीटों तथा असम की एक लोकसभा सीट पर मतगणना हो रही है।
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के लिए नंदीग्राम सीट क्यों अहम है?
सुवेंदु अधिकारी ने इस सीट पर जीत के बाद इस्तीफा देकर भवानीपुर सीट रखी थी, इसलिए यहां बीजेपी प्रत्याशी हसीरानी रथ की जीत उनकी प्रतिष्ठा से जुड़ी है।
असम की नगांव लोकसभा सीट पर मुख्य मुकाबला किनके बीच है?
यहां बीजेपी के देबाशीष शर्मा, कांग्रेस की शिवामणि बोरा और एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।
तमिलनाडु में किन सीटों पर उपचुनाव हुआ और वहां कौन सी पार्टी चुनाव लड़ रही है?
तमिलनाडु की मदुरंतकम और धरापुरम सीटों पर उपचुनाव हुआ है, जहां मुख्यमंत्री विजय की पार्टी टीवीके ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं।
पुडुचेरी की थट्टनचावडी सीट क्यों खाली हुई थी?
मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने दो सीटों पर जीतने के बाद मंगलम सीट अपने पास रखी और थट्टनचावडी सीट छोड़ दी थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 3

Ravikash Gupta@ravikash·59 मिनट पहले

नंदीग्राम और असम के इन नतीजों से साफ़ हो जाएगा कि बाज़ार का रुख़ जनता के बीच कितना टिका है। सुवेंदु अधिकारी की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर दांव पर लगी है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

नंदीग्राम और नगांव के नतीजे वाकई दिलचस्प होंगे, इन सीटों पर सियासत गरमाई है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा। नंदीग्राम और नगांव के नतीजे ही तय करेंगे कि इन नेताओं का रुतबा कितना बचा है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp