मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के कामकाज के तौर-तरीकों को लेकर संसद परिसर से लेकर दिल्ली की सड़कों तक सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के घटक दलों ने शुक्रवार को भी अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया है। विपक्षी दलों के सांसदों की तैयारी संसद भवन परिसर से सीधे राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च निकालने की है। इस पूरे शक्ति प्रदर्शन के जरिए विपक्षी दल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में हुई कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी की शिकायतों का पुलिंदा रखना चाहते हैं। इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाने की मांग को भी राष्ट्रपति के समक्ष औपचारिक रूप से उठाने की योजना बनाई गई है।
इस टकराव को और धार देने के इरादे से राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के शीर्ष नेताओं से व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क साधा है। इनमें तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव और शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे शामिल हैं। राहुल गांधी ने इन सभी दिग्गजों से जल्द से जल्द दिल्ली पहुंचने का आग्रह किया है ताकि विपक्षी एकता का एक साझा और कड़ा संदेश केंद्र सरकार तक पहुंचाया जा सके। वहीं दूसरी तरफ, पार्टी के आंतरिक मोर्चे पर कांग्रेस आलाकमान उन सांसदों के रवैये से सख्त नाराज दिखाई दे रहा है जो पिछले तीन दिनों से चल रहे इस अहम आंदोलन से नदारद रहे हैं।
राष्ट्रपति से मिलने की लगातार कोशिशें और मार्च की रूपरेखा
विपक्षी सांसदों का मुख्य मकसद संसद भवन से राष्ट्रपति भवन की ओर कूच करके एक औपचारिक ज्ञापन सौंपना है। विपक्षी खेमे का सीधा आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर धांधली और अनियमितताएं की गई हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी संगठन इन तमाम शिकायतों को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने पेश करना चाहते हैं। विपक्षी नेताओं की मांग सूची में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई और उन्हें पदमुक्त करना प्रमुखता से शामिल है।
हालांकि शुक्रवार के इस प्रस्तावित मार्च का भविष्य पूरी तरह से राष्ट्रपति भवन से मिलने वाले आधिकारिक जवाब और स्थानीय प्रशासन की मंजूरियों पर टिका हुआ है। विपक्षी गठबंधन ने राष्ट्रपति से औपचारिक मुलाकात के लिए बाकायदा समय मांगा है, लेकिन अभी तक बैठक के लिए किसी निश्चित समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। विपक्षी खेमे की ओर से यह प्रयास कोई पहला नहीं है। इससे पहले 2 अक्टूबर को भी राष्ट्रपति सचिवालय को मुलाकात की अर्जी भेजी गई थी। इसके बाद 5 अक्टूबर को प्रमुख विपक्षी नेताओं के नामों की सूची संलग्न करते हुए दोबारा पत्र भेजा गया, जिसमें 7, 8 या 9 अक्टूबर में से किसी एक दिन समय देने का अनुरोध किया गया था। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया था कि विपक्ष ने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है और वे अभी भी आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
INDIA गठबंधन के क्षत्रपों को दिल्ली आने का बुलावा
संसद में अपनी आवाज उठाने के साथ-साथ विपक्षी दल जमीनी और राष्ट्रीय स्तर पर एक संयुक्त मोर्चा पेश करने की कवायद में जुटे हैं। राहुल गांधी की तरफ से ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और उद्धव ठाकरे को दिल्ली आमंत्रित करने के पीछे की मंशा साफ है कि जब राष्ट्रपति से मुलाकात हो, तब देश के सभी प्रमुख गैर-भाजपा दलों के शीर्ष चेहरे एक मंच पर खड़े नजर आएं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी वोट चोरी के गंभीर विषय पर विमर्श करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी का दौरा करने के संकेत दिए थे। समूचा विपक्ष मानता है कि जब तक सभी क्षेत्रीय ताकतें एक साथ आकर आवाज बुलंद नहीं करेंगी, तब तक चुनाव आयोग और सत्तापक्ष पर अपेक्षित राजनीतिक दबाव नहीं बनाया जा सकेगा।
अनुपस्थित सांसदों पर कांग्रेस का कड़ा रुख
सड़क पर सरकार को घेरने के बीच कांग्रेस के भीतर अनुशासन का सवाल भी खड़ा हो गया है। पार्टी नेतृत्व उन सांसदों के ढुलमुल रवैये से खासा असहज है जो दिल्ली में उपस्थित रहने के बावजूद पिछले तीन दिनों के प्रदर्शनों में शामिल नहीं हुए। संगठन की ओर से ऐसे सांसदों की बाकायदा एक सूची तैयार की गई है जिन्होंने धरने-प्रदर्शन से दूरी बनाए रखी। पार्टी के शीर्ष नेताओं के कार्यालयों से इन सभी गैरहाजिर सांसदों को फोन करके उनकी अनुपस्थिति की ठोस वजह पूछी जा रही है।
इस कड़ी में महाराष्ट्र के भी कुछ सांसदों से लिखित और मौखिक स्पष्टीकरण तलब किए जाने की बात सामने आई है। नदारद रहे सभी सांसदों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे फौरन दिल्ली पहुंचें और विरोध कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि चुनाव आयोग के विरोध में आयोजित हो रहे कार्यक्रमों में कांग्रेस सांसदों की संख्या और सक्रियता शत-प्रतिशत दिखाई दे, ताकि संगठन के भीतर किसी भी प्रकार की शिथिलता का संदेश बाहर न जाए।
केसी वेणुगोपाल के दफ्तर से हो रही हर दिन की समीक्षा
विरोध प्रदर्शनों में सांसदों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल का कार्यालय एक विशेष समीक्षा तंत्र चला रहा है। रोजाना के धरने और मार्च की समाप्ति के बाद इस बात का बारीकी से मिलान किया जाता है कि कौन-कौन से सांसद दिल्ली में मौजूद थे और उनमें से कितने लोग सड़क पर उतरे। जो सांसद राजधानी में रहकर भी कार्यक्रमों में नहीं पहुंचे, उनके खिलाफ सीधी जवाबदेही तय की जा रही है। भले ही ऐसे अनुपस्थित सांसदों की सूची और उनसे मांगे गए स्पष्टीकरण का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन पार्टी हलकों में यह साफ हो चुका है कि नेतृत्व इस आंदोलन को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
तीन दिनों से सड़क पर जारी है सियासी घमासान
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का यह आक्रामक रुख मंगलवार से लगातार जारी है। बुधवार को हालात उस वक्त तनावपूर्ण हो गए जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में दर्जनों विपक्षी नेता दिल्ली की सड़कों पर उतर आए। ये तमाम नेता शांगरी-ला होटल के समीप स्थित एक गोल चक्कर पर धरने पर बैठ गए थे। जब विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने जंतर-मंतर की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश की, तो दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया और बाद में सभी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद गुरुवार को भी विपक्षी सांसदों ने संसद भवन में एक अहम बैठक की, जिसमें आगे के कदमों और शुक्रवार को प्रस्तावित राष्ट्रपति भवन मार्च की पूरी रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की गई।
सुरक्षा बंदोबस्त और राजधानी में ट्रेनों की आवाजाही पर असर
राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ जारी इस राजनीतिक तपिश के बीच सुरक्षा व्यवस्था और यातायात को लेकर भी व्यापक कदम उठाए गए हैं। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर के इलाके में CJP के प्रदर्शन के मद्देनजर चप्पे-चप्पे पर CCTV कैमरे लगाए गए हैं और क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 163 लागू कर दी गई है। इसके समानांतर रेलवे प्रशासन ने भी 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर पहुंचने वाली कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने के आदेश जारी किए हैं। रेलवे की ओर से दी गई जानकारी में इन ट्रेनों के निरस्तीकरण का कारण सड़कों पर संभावित भारी जाम बताया गया है। हालांकि रेलवे के इस कदम और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जारी राजनीतिक विरोध के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।





















