कम उम्र में जहां अधिकांश बच्चे खिलौनों और प्राथमिक खेलों में रमे रहते हैं, वहीं राजस्थान के केकड़ी की छह वर्षीय बालिका ने फिटनेस और योग की दुनिया में एक अनोखा मुकाम हासिल किया है। दूसरी कक्षा की छात्रा रुद्रांशी राठौड़ ने अपनी असाधारण शारीरिक क्षमता और अनुशासन का परिचय देते हुए सिंगल-आर्म प्लैंक मुद्रा में लगातार 4 मिनट तक शरीर को साधे रखा। केवल एक हाथ के सहारे इतनी देर तक शरीर का पूरा संतुलन बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जिसे रुद्रांशी ने सफलतापूर्वक पूरा कर योगा बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया। इस गौरवशाली पल के बाद से उनके परिवार और स्थानीय इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई है।
जयपुर में हुआ था प्रदर्शन, औपचारिक सत्यापन के बाद मिला प्रमाण पत्र
रुद्रांशी ने इस रिकॉर्ड के लिए अपना शारीरिक परीक्षण राजधानी जयपुर में आयोजित एक विशेष सत्र में दिया था। यह आयोजन 21 जून 2026 को संपन्न हुआ था, जहां उन्होंने निर्णायक समिति और विशेषज्ञों के समक्ष एक हाथ पर प्लैंक का कठिन प्रदर्शन प्रस्तुत किया। इस ऐतिहासिक प्रयास की तकनीकी बारीकियों और समय अवधि की गहन समीक्षा की गई। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद 2 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक रूप से नतीजों का ऐलान किया गया। उसी दिन योगा बुक ऑफ रिकॉर्ड्स संस्था की ओर से रुद्रांशी को विश्व रिकॉर्ड धारक होने का औपचारिक प्रमाण पत्र सौंपकर सम्मानित किया गया। इतने लंबे समय तक एक हाथ पर स्थिरता बनाए रखना उनके कड़े मानसिक और शारीरिक अभ्यास की पुष्टि करता है।
ताइक्वांडो का हुनर और नियमित अभ्यास की दिनचर्या
योग की इस कठिन साधना के साथ-साथ रुद्रांशी मार्शल आर्ट्स के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वह ताइक्वांडो की एक होनहार खिलाड़ी के तौर पर लगातार पसीना बहा रही हैं। इस शारीरिक मजबूती को हासिल करने के लिए उन्होंने जयपुर स्थित लक्षिका एकेडमी का रुख किया था। वहां उन्होंने मुख्य कोच सुरजीत यादव के मार्गदर्शन में योग तकनीकों और फिटनेस के बुनियादी नियमों का गहरा अभ्यास किया। एकेडमी में प्रशिक्षण के तौर-तरीके सीखने के बाद वह घर पर भी नियमित रूप से घंटों अभ्यास करती रहीं। बिना किसी नागा के की गई इसी अनवरत साधना ने उन्हें इस विश्वस्तरीय रिकॉर्ड तक पहुंचाया है।
घर में मिला फिटनेस का माहौल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने की चाह
रुद्रांशी की इस कामयाबी के पीछे उनके परिवार का बड़ा सहयोग रहा है। उनके पिता भूपेन्द्र सिंह राठौड़ एक जिम का संचालन करते हैं, जिसकी वजह से रुद्रांशी को बचपन से ही व्यायाम और फिटनेस के प्रति स्वाभाविक रुचि और प्रेरणा मिली। वहीं उनकी मां पूजा शेखावत, जो एक गृहिणी हैं, अपनी बेटी के खानपान और दिनचर्या का पूरा ध्यान रखती हैं। अपनी बेटी की इस ऐतिहासिक सफलता पर भावुक होते हुए मां पूजा शेखावत ने साझा किया कि उनका लक्ष्य रुद्रांशी को भविष्य में अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों तक पहुंचाना है, ताकि वह वैश्विक स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए तिरंगे का मान बढ़ा सके।


















