बुंदेलखंड के चित्रकूट इलाके में ठंड की आहट के साथ ही दुधारू मवेशियों के चारे और पोषण को लेकर किसानों की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। सर्दी के मौसम में दुधारू पशुओं को ताजा और पौष्टिक हरा चारा न मिलने पर उनकी सेहत तो गिरती ही है, साथ ही दूध उत्पादन पर भी सीधा प्रतिकूल असर देखने को मिलता है। इस मौसमी समस्या को सुलझाने के उद्देश्य से पशु विभाग ने जिले के किसानों और पशुपालकों के लिए रबी मौसम के हरे चारे की निशुल्क बीज किट बांटने की विशेष पहल शुरू की है। इस योजना का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसान अपनी उपलब्ध जमीन पर पौष्टिक चारा उगाकर पशुओं को समय पर बेहतर आहार दे सकें।
पशुपालकों के लिए बिना खर्च चारा उगाने का विकल्प
चित्रकूट के ग्रामीण इलाकों में पशुपालन से जुड़े परिवारों के लिए यह सरकारी योजना काफी मददगार साबित हो सकती है। सामान्य तौर पर ठंड के दिनों में बाजार से बीज या हरा चारा खरीदना किसानों की जेब पर भारी पड़ता है, लेकिन इस पहल के तहत पात्र किसानों को बीज खरीदने के लिए अपनी ओर से एक भी रुपया खर्च नहीं करना होगा। पशु विभाग की तरफ से मुफ्त में बांटी जाने वाली बीज किट की मदद से किसान अपने खेतों या खाली पड़ी जमीन पर आसानी से हरा चारा तैयार कर सकेंगे। इससे न केवल मवेशियों के लिए पौष्टिक चारे का नियमित प्रबंध होगा, बल्कि बाजार से बार-बार चारा खरीदने की मजबूरी भी खत्म होगी।
जमीन के रकबे के हिसाब से तय होगा मिनी किट का कोटा
चित्रकूट जिले के अपर पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ पीके सिंह ने इस व्यवस्था के बारे में स्पष्ट किया कि सर्दी के मौसम में अक्सर पशुपालक मवेशियों को केवल सूखा भूसा या सूखा चारा खिलाने तक सीमित रह जाते हैं। लगातार सूखा चारा खाने से मवेशियों के शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे उनकी शारीरिक क्षमता और दूध देने की ताकत घट जाती है। ऐसी स्थिति में हरा चारा उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद गुणकारी साबित होता है।
डॉ पीके सिंह के मुताबिक, जिले में 0.1 से लेकर 0.5 हेक्टेयर तक जमीन रखने वाले किसानों को रबी चारे की मिनी किट पूरी तरह निशुल्क दी जाएगी। इस वितरण के तहत 0.1 हेक्टेयर जमीन वाले किसानों को 1 मिनी किट प्रदान की जाएगी, जबकि 0.5 हेक्टेयर कृषि भूमि वाले किसानों को 5 मिनी किट तक उपलब्ध कराई जाएगी। किसान इन बीजों की बुआई करके अपने खेतों में ही भरपूर मात्रा में ताजा चारा तैयार कर सकेंगे, जिससे उन्हें बाजार के महंगे चारे पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज और प्रक्रिया
योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक किसानों को किसी जटिल प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं है। पशुपालक अपने नजदीकी पशु विभाग के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जाकर आवेदन दर्ज करा सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए किसान को कुछ जरूरी कागजात साथ ले जाने होंगे, जिनमें आधार कार्ड, जमीन से जुड़ी खसरा-खतौनी की नकल, पासपोर्ट साइज फोटो और पशुपालन से संबंधित अपनी फोटो शामिल हैं। इन दस्तावेजों को जमा करते ही संबंधित कार्यालय में किसान का पंजीकरण दर्ज कर लिया जाएगा।
पहले आओ, पहले पाओ के नियम पर सीमित आवंटन
पशु विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि निशुल्क बीज किट का वितरण पहले आओ, पहले पाओ की नीति पर किया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि जो पशुपालक समय रहते विभाग के दफ्तर पहुंचकर औपचारिकताएं पूरी करेंगे, उन्हें किट की उपलब्धता के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी। चूंकि बीजों का कोटा सीमित रहता है, इसलिए देरी करने पर वंचित रहने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में चित्रकूट के मवेशी पालकों को सलाह दी गई है कि वे जल्द से जल्द अपने नजदीकी पशु विभाग कार्यालय पहुंचकर पंजीकरण करा लें।



















