केंद्रीय स्तर पर सक्रिय राजनीतिक गतिविधियों के बीच, अमित शाह हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचे जहां उन्होंने ऐतिहासिक लाल किला मैदान का रुख किया। यहां उन्होंने श्री धार्मिक लीला कमेटी की ओर से आयोजित किए जा रहे भव्य रामलीला महोत्सव में हिस्सा लिया और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन दर्शन और आदर्शों को न केवल याद किया बल्कि उत्सव के दौरान सांस्कृतिक माहौल का भी अनुभव किया।
दिल्ली की सांस्कृतिक धड़कन है लाल किला मैदान की रामलीला
राजधानी दिल्ली में लाल किला मैदान के भीतर सजने वाली यह रामलीला किसी एक आयोजन मात्र से कहीं अधिक महत्व रखती है। इसे स्थानीय सांस्कृतिक ताने-बाने की एक अहम धड़कन माना जाता है जहाँ हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु और आम लोग पहुंचते हैं। यहाँ आकर लोग मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों और उनके दार्शनिक पक्षों के प्रत्यक्ष गवाह बनते हैं। आयोजकों द्वारा इस परंपरा को हर वर्ष बड़े पैमाने पर जीवंत रखा जाता है, जिससे यह स्थल उत्सव के दिनों में पूरी तरह भक्तिमय हो उठता है।
लाल क़िला के बारे में
यह पूरा आयोजन देश की राजधानी के उस ऐतिहासिक केंद्र के करीब होता है जिसे लाल क़िला के नाम से जाना जाता है। पुरानी दिल्ली के इलाके में स्थित यह एक बेहद महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मुगल क़िला है जिसके निर्माण की शुरुआत सम्राट शाहजहाँ ने सन् 1638 में अपनी नई राजधानी शाहजहानाबाद के समय कराई थी। इस शानदार किले का निर्माण कार्य साल 1648 में जाकर पूरा हुआ था और आज यह भारतीय इतिहास का एक प्रमुख प्रतीक माना जाता है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में शिरकत करने की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कई लोगों ने प्रभु श्रीराम के आदर्शों को राष्ट्र प्रथम का संकल्प बताते हुए इस उपस्थिति को प्रेरणादायक करार दिया, जबकि कुछ ने सनातन परंपरा और संस्कृति के संरक्षण पर अपने विचार साझा किए।



























