केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के कमजोर वर्गों, वृद्धजनों और विशेष आवश्यकता वाले नागरिकों के कल्याण के लिए संचालित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को अगले कई वर्षों तक निरंतर जारी रखने के उद्देश्य से ₹53,428 करोड़ की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की है। इस रणनीतिक निर्णय के तहत राष्ट्रीय स्तर पर चलने वाली सामाजिक सहायता योजनाओं को वर्ष 2031 तक की अवधि के लिए विस्तार दिया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस लंबी अवधि की मंजूरी से देशभर में लगभग 3.20 करोड़ पात्र लाभार्थियों को प्रत्यक्ष तौर पर वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा प्राप्त होगी।
दिव्यांग पेंशन के नियमों में रियायत और सहायता का दायरा
इस बड़े बजटीय आवंटन के साथ ही सरकार ने विशेष आवश्यकता वाले नागरिकों के लिए पात्रता मानकों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इसके तहत दिव्यांग पेंशन प्राप्त करने के लिए निर्धारित दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा को 80% से घटा दिया गया है, जिससे अधिक संख्या में जरूरतमंद लोग इस सुरक्षा घेरे में शामिल हो सकेंगे। पूर्व में अत्यधिक गंभीर दिव्यांगता वाले व्यक्तियों तक सीमित रहने वाले प्रावधानों को उदार बनाकर उन लोगों को भी राहत दी जा रही है जो पहले तकनीकी नियमों के कारण मासिक सहायता से वंचित रह जाते थे।
कल्याणकारी पहलों की निरंतरता और पृष्ठभूमि
देश के वंचित तबकों को बुनियादी सहारा देने के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत पेंशन और अन्न सुरक्षा का लगातार विस्तार किया जाता रहा है। पूर्व में भी दिव्यांग परिवारों को अंत्योदय अन्न योजना के दायरे में लाकर प्रति परिवार 35 किलो अनाज उपलब्ध कराने के स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। विभिन्न राज्यों में भी बुजुर्गों और निराश्रितों के बैंक खातों में नियमित अंतराल पर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से करोड़ों रुपये की पेंशन राशि भेजी जाती रही है। कैबिनेट का नया निर्णय इन सभी जमीनी पहलों को एक संगठित और दीर्घकालिक वित्तीय संबल प्रदान करता है।
अमित शाह ने कल्याणकारी प्राथमिकताओं को रेखांकित किया
इस नीतिगत फैसले की जानकारी साझा करते हुए अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धन, शोषित और दिव्यांग व्यक्तियों की बेहतरी सुनिश्चित करना शासन व्यवस्था के प्रमुख प्राथमिक उद्देश्यों में शामिल रहा है। इसी निरंतरता को बनाए रखने के लिए कैबिनेट ने वर्ष 2031 तक ₹53,428 करोड़ के कोष को अनुमोदित किया है, ताकि 3.20 करोड़ नागरिकों का जीवन स्तर बेहतर बना रहे और उन्हें नियमित सहायता मिलती रहे।
जनता की प्रतिक्रिया
इस निर्णय की घोषणा के बाद आम नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। कई लोगों ने इस वित्तीय सहायता योजना के नियमों और सामान्य वर्ग के निर्धनों के लिए प्रावधानों को लेकर प्रश्न उठाए, जबकि अन्य नागरिकों ने ज़मीनी क्रियान्वयन और पुरानी वित्तीय देनदारियों के त्वरित समाधान की आवश्यकता पर बल दिया।


























