भारतीय जनता पार्टी की संस्थापक सदस्य राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जयंती के अवसर पर अमित शाह ने उन्हें सादर नमन किया। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में राजमाता के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने राजसी सुख-सुविधाओं और वैभव का परित्याग कर आम नागरिकों की सेवा का मार्ग चुना और अपना पूरा जीवन राष्ट्रवादी सोच को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित कर दिया।
अमित शाह ने क्या कहा
सोशल मीडिया मंच X पर अपने संदेश में अमित शाह ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया के ऐतिहासिक योगदान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौर में उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए कड़ा संघर्ष किया था। शाह ने रेखांकित किया कि किस तरह एक प्रतिष्ठित राजघराने से ताल्लुक रखने के बावजूद उन्होंने जनसेवा को प्राथमिकता दी और संगठन निर्माण के शुरुआती दिनों में एक मजबूत आधारशिला रखी।
बीजेपी की नींव और संकटमोचक की भूमिका
राजनीतिक इतिहास में राजमाता विजयाराजे सिंधिया को भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख स्तंभों में गिना जाता है। करीब 46 साल पहले जब संगठन अपने शुरुआती दौर में संसाधनों की कमी से जूझ रहा था, तब उन्होंने महत्वपूर्ण सहयोग देकर पार्टी को संबल प्रदान किया। कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में वे कई बार संकटमोचक बनकर उभरीं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उनके आत्मीय संबंध जगजाहिर रहे, जिन्हें वे धर्मपुत्र मानती थीं और ग्वालियर की सड़कों पर पैदल जनसंपर्क के दौर से ही उनके साथ खड़ी रहीं।
राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के बारे में
राजमाता विजयाराजे सिंधिया की स्मृति और जनसेवा के सम्मान में मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित किया गया है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2008 में की गई थी। यह विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के कृषि क्षेत्र में शोध, आधुनिक तकनीक के प्रसार और उच्च स्तरीय शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निरंतर कार्यरत है, जो क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस संदेश पर नागरिकों ने भी विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। कई उपयोगकर्ताओं ने राजमाता के त्याग, संगठन के प्रति उनके ऐतिहासिक समर्पण और देशप्रेम को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की, जबकि कुछ लोगों ने ऐतिहासिक प्रसंगों और लोकतंत्र में असहमति व संवाद के महत्व पर अपनी राय रखी।



























