भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महान क्रांतिकारियों के योगदान को याद करते हुए देश के प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विशेष संदेश साझा करते हुए क्रांतिकारी जतीन्द्रनाथ दास को उनकी जयंती पर शत-शत नमन किया है। अपने संदेश में उन्होंने देश की आजादी के लिए दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान और संघर्ष को याद किया।
छात्र जीवन से शुरू हुआ था स्वतंत्रता का सफर
जतीन्द्रनाथ दास ने बहुत कम उम्र में ही देश की आजादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू कर दिया था। छात्र जीवन से ही वे स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनों से जुड़ गए थे। उन्होंने देश के युवाओं को संगठित करने और उनके भीतर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांति की अलख जगाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके इस साहसिक कदमों ने देश के युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
लाहौर जेल में 63 दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल
जतीन्द्रनाथ दास ने भारतीय राजनीतिक कैदियों के मानवीय अधिकारों की रक्षा के लिए ब्रिटिश शासन के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया था। अपने इन्हीं अधिकारों और स्वाभिमान की लड़ाई के लिए उन्होंने लाहौर जेल में लगातार 63 दिनों तक ऐतिहासिक भूख हड़ताल की थी। इस लंबी भूख हड़ताल के दौरान जेल अधिकारियों द्वारा जबरन भोजन कराने के प्रयासों के बावजूद वे अपने प्रण पर अडिग रहे और मात्र 24 वर्ष की अल्प आयु में अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।
कौन थे जतीन्द्रनाथ सेनगुप्ता
जतीन्द्रनाथ सेनगुप्ता एक प्रसिद्ध भारतीय बंगाली भाषा के कवि और लेखक थे। उन्होंने अपनी साहित्यिक रचनाओं और लेखन के माध्यम से समाज और साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी कृतियों में बंगाली साहित्य की गहरी छाप देखने को मिलती है और उन्हें उनकी विशिष्ट लेखन शैली के लिए जाना जाता है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस श्रद्धांजलि संदेश के सामने आने के बाद आम नागरिकों और विभिन्न सोशल मीडिया यूजर्स ने भी महान क्रांतिकारी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। लोगों ने उनके बलिदान को याद करते हुए उनके प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया।


























