केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के परिवहन और लॉजिस्टिक्स तंत्र में बड़े सुधार के तहत एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (ITLA) के गठन के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। इस नए निकाय का मुख्य दायित्व भारत में अलग-अलग परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना और लॉजिस्टिक्स योजना को एक मंच पर लाना होगा। इसी बैठक के दौरान कैबिनेट ने छोटे और मध्यम उद्योगों के सहयोग के लिए 10,000 करोड़ रुपये के SME ग्रोथ फंड को भी स्वीकृति दी, जिससे विनिर्माण और व्यापार को व्यापक बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
10 साल का दीर्घकालिक मास्टर प्लान तैयार करेगा प्राधिकरण
इस फैसले के तहत नवगठित प्राधिकरण देश की भविष्य की ढांचागत जरूरतों का आकलन करने के लिए एक विशेष योजना बनाएगा। यह निकाय कम से कम 10 वर्ष से अधिक की अवधि के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार करेगा, जिससे सड़क, रेल, जलमार्ग और हवाई परिवहन के बीच एकीकृत नेटवर्क तैयार किया जा सके। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि यह नई संस्था दीर्घावधि के मास्टर प्लान तैयार करने और विभिन्न क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे में तालमेल सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होगी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया बड़ा कदम
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस फैसले का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि कैबिनेट द्वारा इस प्राधिकरण को मंजूरी दिया जाना देश के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह नया प्राधिकरण 10 से अधिक वर्षों के मास्टर प्लान के जरिए भविष्य की परिवहन जरूरतों की रूपरेखा तैयार करेगा और समग्र विकास की दिशा तय करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पूरी पहल और विशेष रूप से MSME सेक्टर के लिए स्वीकृत फंड को विकास को तेज गति देने वाला प्रयास बताया।
एक विशेष उद्देश्यीय कंपनी के रूप में होगा गठन
योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार इस प्राधिकरण को एक विशेष उद्देश्यीय कंपनी (SPV) के तौर पर स्थापित करने की तैयारी कर रही है। इससे देश के लॉजिस्टिक्स खर्च में कमी लाने और माल ढुलाई की रफ्तार बढ़ाने में मदद मिलेगी। वर्तमान में अलग-अलग मंत्रालयों के तहत चलने वाली परियोजनाओं को अब एक ही रणनीतिक दृष्टि से जोड़ा जा सकेगा, जिससे परियोजनाओं में होने वाली देरी और अनावश्यक लागत से बचा जा सके।
जनता की प्रतिक्रिया
इस सरकारी घोषणा के बाद आम नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों ने सभी परिवहन माध्यमों को एक एकीकृत योजना के तहत लाने के इस कदम की सराहना की, जबकि कुछ अन्य यूजर्स ने जमीनी स्तर पर टिकटों की कालाबाजारी, बुनियादी सेवाओं की गुणवत्ता और निष्पक्ष क्रियान्वयन को लेकर सवाल भी उठाए।


























