भारत रत्न से सम्मानित नानाजी देशमुख की जयंती के अवसर पर देश भर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। इसी क्रम में अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच X पर एक संदेश साझा करते हुए उन्हें नमन किया और ग्रामीण आत्मनिर्भरता तथा सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान को रेखांकित किया।
अमित शाह ने क्या कहा
अमित शाह ने नानाजी देशमुख को ग्रामोदय से राष्ट्रोदय का प्रणेता और एक महान राष्ट्रसेवी करार दिया। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्कारों को आत्मसात करते हुए उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के कल्याण, ग्रामीण विकास तथा स्वावलंबन के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
नानाजी देशमुख के जीवन दर्शन का मूल आधार यह था कि भारत की वास्तविक प्रगति गांवों के विकास और वहां के निवासियों को आत्मनिर्भर बनाने से ही संभव हो सकती है। उनकी इस दूरदृष्टि को रेखांकित करते हुए संदेश में उनके विचारों को राष्ट्र निर्माण के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया गया।
कौन थे नानाजी देशमुख
नानाजी देशमुख भारत के एक प्रमुख समाजसेवी और विचारक थे, जिन्होंने राजनीति से परे जाकर जमीनी स्तर पर सेवा कार्यों को प्राथमिकता दी। वे आरंभिक दौर में भारतीय जनसंघ से जुड़े रहे और 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने पर उन्हें मोरारजी देसाई के मंत्रिमंडल में मंत्री पद की पेशकश भी की गई थी। हालांकि, उन्होंने यह सिद्धांत प्रस्तुत करते हुए पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि साठ वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को सत्ता से दूर रहकर समाज सेवा में जुटना चाहिए।
राजनीतिक दायित्वों से अलग होने के पश्चात उन्होंने अपना पूरा ध्यान दीनदयाल शोध संस्थान के माध्यम से चलने वाली विभिन्न रचनात्मक परियोजनाओं पर केंद्रित किया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रभावी मॉडल स्थापित किए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान उन्हें राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया था, और उसी दौर में उनके सामाजिक योगदान के लिए उन्हें पद्म विभूषण से भी नवाजा गया। वर्ष 2019 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से उन्हें मरणोपरांत सम्मानित किया गया।
जनता की प्रतिक्रिया
इस संदेश के सार्वजनिक होने के बाद नागरिकों ने मिलीजुली प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। कई उपयोगकर्ताओं ने नानाजी देशमुख के विचारों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी, जबकि कुछ लोगों ने देश की मौजूदा व्यवस्था और शासन प्रणाली को लेकर विभिन्न सवाल भी उठाए।



























