समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बस्ती में आयोजित पीडीए मार्च को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा राजनीतिक प्रहार किया है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर बस्ती में निकले इस विशाल जनसैलाब का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि इस कार्यक्रम को देखने के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी दल के होश उड़ गए होंगे। उन्होंने अपने बयान के जरिए पीडीए यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को पूरी तरह सावधान रहने का आह्वान किया है।
बस्ती के पीडीए मार्च पर अखिलेश यादव का बयान
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि पीडीए वर्ग अब पूरी तरह सतर्क और तैयार है। उन्होंने लिखा, 'पीडीए का ऐलान, पीडीए है सावधान!!!' इसके साथ ही उन्होंने बस्ती में आयोजित कार्यक्रम को अभूतपूर्व करार दिया। अखिलेश यादव का कहना है कि बस्ती की सड़कों पर उमड़े इस भारी समर्थन ने उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है और इससे भाजपा खेमे में भारी बेचैनी फैल गई है।
मुख्यमंत्री के वीडियो पर साधा निशाना
सपा अध्यक्ष ने अपने संदेश में राज्य के मुख्यमंत्री पर भी सीधा वार किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के एक पांच सेकंड के वीडियो का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उसमें उनके जाने-पहचाने धमकी भरे अंदाज़ की झलक दिखाई देती है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि उस संक्षिप्त वीडियो के जरिए खुद मुख्यमंत्री ने अपने शासनकाल में पीडीए वर्ग की वास्तविक स्थिति को अनजाने में स्वीकार कर लिया है।
उत्तर प्रदेश के बारे में
उत्तर प्रदेश जनसंख्या के मामले में भारत का सबसे बड़ा राज्य है, जबकि क्षेत्रफल के आधार पर यह देश में चौथे पायदान पर आता है। लखनऊ राज्य की प्रशासनिक और विधायी राजधानी है, वहीं प्रयागराज न्यायिक राजधानी की भूमिका निभाता है। आगरा, कानपुर, वाराणसी और गोरखपुर इस प्रदेश के अन्य प्रमुख शहर हैं। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो राज्य की सीमाएं उत्तर में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तथा पूर्व में बिहार और झारखंड से लगती हैं। इसके अलावा राज्य की उत्तरी सीमा पड़ोसी देश नेपाल से भी जुड़ी हुई है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस बयान के सामने आने के बाद लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई समर्थकों ने बस्ती में जुटी भीड़ को आने वाले समय में बड़े राजनीतिक बदलाव और पीडीए वर्ग के हक की लड़ाई का संकेत बताया, वहीं अन्य उपयोगकर्ताओं ने इसे पुरानी जातीय राजनीति की वापसी करार देते हुए कानून के राज का समर्थन किया।



























