वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती के अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनके अदम्य साहस को नमन करते हुए एक बड़ा राजनीतिक संकल्प सार्वजनिक किया है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सरकार के सत्ता में आने पर रिवर फ्रंट पर रानी दुर्गावती की सोने की तलवार से सुसज्जित एक भव्य स्वर्णिम प्रतिमा स्थापित की जाएगी। ऐतिहासिक प्रतीकों और जननायकों के सम्मान को सामाजिक न्याय की राजनीति से जोड़ते हुए दिया गया यह बयान अब व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
प्रतिमा स्थापना को लेकर अखिलेश यादव का संकल्प
अखिलेश यादव ने सार्वजनिक मंच पर अपनी बात रखते हुए वीरांगना के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती हम सबके लिए प्रेरणास्रोत, अदम्य साहस और शौर्य की प्रतीक हैं। उन्होंने उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन करते हुए संकल्प लिया कि सत्ता परिवर्तन के बाद प्रस्तावित रिवर फ्रंट स्थल पर इस विशेष प्रतिमा का निर्माण कराया जाएगा, जिसमें उनकी वीरता को रेखांकित करने वाली सुनहरी तलवार भी शामिल होगी।
सपा प्रमुख का यह कदम राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक हस्तियों को सम्मान देकर सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श को मजबूती देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अपने संदेश में उन्होंने पीडीए समीकरण को रेखांकित करते हुए यह स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी वीरांगना के बलिदान और स्वाभिमान को सार्वजनिक जीवन में प्रमुखता से स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कौन थीं वीरांगना रानी दुर्गावती
रानी दुर्गावती भारत के इतिहास में अदम्य पराक्रम, स्वाभिमान और कुशल नेतृत्व की मिसाल मानी जाती हैं। वे ऐतिहासिक गढ़ा राज्य की शासक महारानी थीं, जिन्होंने अपने पराक्रम से साम्राज्य को सुदृढ़ किया। उनका विवाह गढ़ा राज्य के राजपूत राजा दलपत शाह से हुआ था, जिन्हें गोंड राजा संग्राम शाह ने गोद लिया था। पति के निधन के बाद उन्होंने अत्यंत कुशलता और बहादुरी के साथ राज्य की बागडोर संभाली।
इतिहास में रानी दुर्गावती को मुख्य रूप से मुगल साम्राज्य के आक्रमणों के खिलाफ अपने राज्य की स्वतंत्रता और संप्रभुता की डटकर रक्षा करने के लिए याद किया जाता है। उन्होंने शक्तिशाली सेनाओं का डटकर मुकाबला किया और कभी आत्मसमर्पण नहीं किया। उनका जीवन मातृभूमि की रक्षा और आत्मसम्मान के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की अमर गाथा है, जिसे विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर प्रेरणा के रूप में याद किया जाता है।
जनता की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव के इस वादे पर आम जनता और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई समर्थकों ने वीरांगना के सम्मान में इस कदम को ऐतिहासिक और सराहनीय बताते हुए इसका जोरदार स्वागत किया, जबकि कुछ अन्य लोगों ने बुनियादी विकास प्राथमिकताओं और राजधानी केंद्रित परियोजनाओं को लेकर सवाल भी उठाए।


























