श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय प्रवासी समुदाय के प्रतिनिधियों और नागरिकों के साथ गर्मजोशी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रवासी भारतीयों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि विदेश में रहने वाला भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रवासी भारतीय न केवल अपनी संस्कृति के ध्वजवाहक हैं, बल्कि आपसी विश्वास को बढ़ाने वाली मुख्य शक्ति भी हैं।
भारत और श्रीलंका के बीच 'सेतु' है भारतीय समुदाय
कार्यक्रम के दौरान और अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में राजनाथ सिंह ने प्रवासी भारतीयों को भारत और श्रीलंका के बीच एक वास्तविक 'सेतु' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह समुदाय दोनों पड़ोसी देशों के बीच आपसी तालमेल, व्यापारिक गतिविधियों और सामाजिक संबंधों को गहरा बनाने में निरंतर प्रयासरत रहा है। इसके साथ ही उन्होंने श्रीलंका के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि भारत हर स्थिति में श्रीलंका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मजबूती से खड़ा रहेगा।
कूटनीतिक संबंध और 'पड़ोसी प्रथम' दृष्टि
यह संबोधन भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति और क्षेत्र में साझा समृद्धि की भावना को दर्शाता है। इससे पहले 11 जून 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी श्रीलंका दौरे के समय कोलंबो में भारतीय समुदाय के साथ संवाद किया था और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक व सांस्कृतिक रिश्तों पर बल दिया था। भारत और श्रीलंका के बीच भौगोलिक निकटता के साथ-साथ गहरे व्यापारिक, सामरिक और लोक-केंद्रित संबंध रहे हैं। भारतीय सुरक्षा और आर्थिक परिदृश्य में श्रीलंका का स्थान बेहद महत्वपूर्ण रहा है, और भारत ने हमेशा आपदाओं व आर्थिक चुनौतियों के समय अपने इस पड़ोसी देश की सहायता की है।
प्रवासी भारतीयों का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
कोलंबो में रह रहे भारतीय समुदाय के लोग व्यापार, शिक्षा, तकनीक और समाज सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। रक्षा मंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि प्रवासी भारतीयों का यह निरंतर प्रयास दोनों देशों के बीच व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मददगार साबित होता है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस मुलाकात पर लोगों की विविध प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई नागरिकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने भारत और श्रीलंका के मजबूत पड़ोस और सांस्कृतिक पुल की सराहना की, वहीं कुछ लोगों ने कूटनीतिक बयानों और वास्तविक जमीनी विकास के बीच तुलना करते हुए नीतियां अधिक प्रभावी बनाने पर अपने विचार व्यक्त किए।


























