बुजुर्गों के प्रति बढ़ती बेरुखी पर योगी आदित्यनाथ की भावुक अपील, बोले- सूने होते घर और बढ़ते वृद्धाश्रम चिंता का विषयनेता जी
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बुजुर्गों के प्रति बढ़ती बेरुखी पर योगी आदित्यनाथ की भावुक अपील, बोले- सूने होते घर और बढ़ते वृद्धाश्रम चिंता का विषय

विश्व वृद्धजन दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच X पर बुजुर्गों के प्रति समाज के बदलते रवैये पर चिंता जताते हुए सनातन संस्कृति में माता-पिता और गुरु के सम्मान की याद दिलाई।

एक संदेश जिसने छेड़ी संवेदनशील बहस

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने सोशल मीडिया मंच X पर अपने आधिकारिक हैंडल (@myogiadityanath) से एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने समाज में बुजुर्गों के प्रति बदलते व्यवहार को लेकर गहरी पीड़ा व्यक्त की। प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए लिखे गए इस संदेश ने परिवार, संस्कार और बुजुर्गों की देखभाल जैसे मुद्दों पर एक नई चर्चा को जन्म दे दिया।

क्या कहा मुख्यमंत्री ने

अपनी पोस्ट में मुख्यमंत्री ने अपने प्रदेशवासियों को सम्मानपूर्वक संबोधित करते हुए लिखा कि आज के दौर में घर सूने होते जा रहे हैं और वृद्धाश्रमों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने इस वास्तविकता को मन को व्यथित करने वाला बताया और सवाल उठाया कि आखिर यह स्थिति आई ही क्यों।

उन्होंने इस अवसर को रेखांकित करते हुए कहा कि आज विश्व वृद्धजन दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस है और एक संवेदनशील नागरिक होने के नाते हम सभी को इस गंभीर विषय पर ठहरकर विचार करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में सनातन संस्कृति का उल्लेख करते हुए माता-पिता और गुरु के सम्मान की परंपरा की ओर लोगों का ध्यान दिलाया।

संदेश के पीछे की भावना

मुख्यमंत्री के इस संदेश का मूल भाव यह था कि भारतीय परंपरा में जिन माता-पिता और गुरुजनों को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, आधुनिक जीवनशैली में उनके प्रति वही आदर और जिम्मेदारी कहीं पीछे छूटती दिख रही है। बुजुर्गों के अकेलेपन और वृद्धाश्रमों की बढ़ती जरूरत को उन्होंने समाज के लिए आत्ममंथन का विषय बताया।

जनता की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री की इस पोस्ट पर लोगों ने मिलीजुली प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने इसे एक संवेदनशील और सामयिक संदेश बताते हुए सराहा, तो कुछ ने इसके मूल कारणों पर अपने विचार रखे और बुजुर्गों को परिवार में समान सदस्य का दर्जा देने वाले ठोस कदमों व कानूनी प्रावधानों की मांग उठाई। वहीं कुछ उपयोगकर्ताओं ने पेंशन व्यवस्था, स्थानीय समस्याओं और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर भी सवाल खड़े किए।

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