1 जुलाई 2026 को डिजिटल इंडिया पहल के ग्यारह वर्ष पूरे हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में इस पहल की शुरुआत देश की डिजिटल तस्वीर बदलने और नागरिकों को सशक्त बनाने के लक्ष्य के साथ की थी। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए डिजिटल इंडिया को एक दूरदर्शी पहल बताया, जिसने न सिर्फ शासन को बदला बल्कि आम नागरिक के जीवन को भी नई दिशा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मौके पर कहा कि डिजिटल इंडिया ने दुनियाभर में भारत को एक नई पहचान दिलाई है और इस पहल ने शासन में बदलाव लाने के साथ-साथ नागरिकों को नई ताकत दी है।
UPI ने बनाया भारत को दुनिया का डिजिटल पेमेंट हब
डिजिटल इंडिया की सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरा है यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI। इस प्लेटफॉर्म पर आज हर महीने 14 अरब से ज्यादा लेनदेन होते हैं और यह आंकड़ा दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल भुगतान का 46 प्रतिशत है। दस साल से भी कम समय में भारत वैश्विक डिजिटल भुगतान का केंद्र बन गया, जो एक दशक पहले तक कल्पना के बाहर लगता था। छोटे दुकानदार हों या बड़े व्यापारी, UPI ने सबके लिए कैशलेस लेनदेन को आसान और तेज़ बना दिया है।
जन धन, आधार और मोबाइल की तिहरी शक्ति
डिजिटल इंडिया की असली सामाजिक ताकत जन धन, आधार और मोबाइल के संयोजन में छिपी है। इन तीनों ने मिलकर 52 करोड़ ऐसे लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा जो पहले इससे पूरी तरह बाहर थे। इससे भी बड़ी बात यह है कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सरकार ने 34 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाए, जिससे बिचौलियों की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई। इस कदम ने सरकारी सब्सिडी और कल्याण योजनाओं को पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी बनाया।
कोविन और डिजिलॉकर ने दी स्वास्थ्य और पहचान को नई परिभाषा
जब दुनिया कोविड-19 महामारी से जूझ रही थी, तब भारत की डिजिटल तैयारी काम आई। कोविन ऐप ने 220 करोड़ वैक्सीन डोज़ का प्रबंधन एकल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया और यह उपलब्धि वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनी। दूसरी तरफ डिजिलॉकर पर अब 22 करोड़ उपयोगकर्ता हैं, जो जन्म प्रमाण पत्र से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस तक अपने ज़रूरी दस्तावेज़ डिजिटल रूप में सुरक्षित रख सकते हैं और किसी भी सरकारी काम में तुरंत पेश कर सकते हैं।
27 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, डिजिटल की भूमिका अहम
विश्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 11 वर्षों में भारत में करीब 27 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले हैं। इस उल्लेखनीय बदलाव में डिजिटल इंडिया के जरिए सरकारी योजनाओं की सीधी और पारदर्शी पहुंच की बड़ी भूमिका रही है। तकनीक ने गरीब से गरीब व्यक्ति तक सही समय पर सही मदद पहुंचाना न सिर्फ संभव बनाया बल्कि इसे भरोसेमंद भी बनाया। इस मायने में डिजिटल इंडिया एक सामाजिक न्याय की पहल भी साबित हुई है।
AI और सेमीकंडक्टर: डिजिटल इंडिया का अगला सफर
अब डिजिटल इंडिया अपने अगले और महत्वाकांक्षी चरण में प्रवेश कर रहा है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, भारत 6G का वैश्विक मानकीकरण और विश्व स्तर पर मानकीकृत हाई-स्पीड रेलवे कार्यक्रम जैसी बड़ी योजनाएं इस दिशा में आगे बढ़ रही हैं। AI और सेमीकंडक्टर विनिर्माण में भारत अब एक वैश्विक नेता के रूप में उभरने की तैयारी में है। यह सफर उसी डिजिटल बुनियाद पर टिका है जो पिछले ग्यारह वर्षों में मेहनत से खड़ी की गई है।
जनता की प्रतिक्रिया
डिजिटल इंडिया की 11वीं वर्षगांठ पर सोशल मीडिया पर व्यापक उत्साह देखा गया, जहां नागरिकों ने UPI, डिजिलॉकर और जन धन जैसी सुविधाओं से रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आए बदलावों को साझा किया। साथ ही कई लोगों ने ग्रामीण और दूर-दराज इलाकों में डिजिटल पहुंच को और मज़बूत करने की जरूरत भी उठाई।




















