डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट @realDonaldTrump से एक पोस्ट शेयर की जिसमें उन्होंने शैवाल (algae) के पक्ष में प्रदर्शन कर रहे एक व्यक्ति को "पागल शैवाल समर्थक" और "संभवतः भाड़े पर लाया गया" बताया। इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी क्योंकि प्रदर्शनकारी की तख्ती पर इतिहास के एक बेहद गंभीर और जाने-माने कथन की परछाईं थी।
प्रदर्शनकारी के साइन पर क्या था?
उस व्यक्ति के हाथ में जो तख्ती थी उस पर लिखा था, "First they came for the algae..." यह वाक्यांश द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के एक बेहद चर्चित कथन की शैली से उठाया गया था जो नाजी जर्मनी में आम नागरिकों की खामोशी और उसके नतीजों को बयान करता है। प्रदर्शनकारी ने इसी ढांचे को शैवाल के बचाव में इस्तेमाल किया।
वह ऐतिहासिक कथन जिसे बनाया गया आधार
ट्रंप ने इस संदर्भ को अपने फॉलोअर्स को समझाते हुए उस मूल ऐतिहासिक कथन का अंश खुद अपनी पोस्ट में उद्धृत किया:
"...Then they came for the Jews, and I did not speak out—because I was not a Jew. Then they came for me—and there was no one left to speak for me."
यह कथन इस बात की याद दिलाता है कि किस तरह लोग एक के बाद एक अलग-अलग समूहों पर होने वाले जुल्म के वक्त चुप रहे और जब उन पर खुद आफत आई तो उनके लिए बोलने वाला कोई नहीं बचा। प्रदर्शनकारी ने इसी सोच को शैवाल के संदर्भ में पेश किया।
ट्रंप का रुख और प्रतिक्रिया
ट्रंप ने साइन के संदेश से कोई बहस नहीं की। उन्होंने इसे सिर्फ एक "पागल शैवाल समर्थक का नमूना" बताया और प्रदर्शनकारी की नीयत पर सवाल उठाते हुए यह भी जोड़ा कि वह व्यक्ति वहां अपनी मर्जी से नहीं बल्कि "संभवतः भाड़े पर" खड़ा था। उन्होंने यह पोस्ट एक उदाहरण के तौर पर अपने फॉलोअर्स के सामने रखी।

















