केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत देते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा को बढ़ाने का ऐतिहासिक फैसला किया है। केंद्रीय कैबिनेट ने इस सीमा को मौजूदा 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद देश के लाखों अतिरिक्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे और उन्हें भविष्य निधि और पेंशन जैसी आवश्यक सुविधाओं का सीधा लाभ मिलेगा।
सामाजिक सुरक्षा के दायरे का बड़ा विस्तार
इस बड़े नीतिगत बदलाव से देश के 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में शामिल होंगे। वर्तमान नियमों के अनुसार, केवल उन्हीं कर्मचारियों के लिए EPFO में योगदान करना अनिवार्य था जिनका मूल वेतन 15,000 रुपये तक था। अब इस सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये करने से उन मध्यम और निम्न-मध्यम आय वर्ग के कर्मचारियों को भी पीएफ और पेंशन का लाभ मिल सकेगा, जो पहले इस अनिवार्य श्रेणी से बाहर थे। इससे न केवल कर्मचारियों की बचत बढ़ेगी, बल्कि उनके सेवानिवृत्ति के बाद का जीवन भी आर्थिक रूप से सुरक्षित होगा।
अमित शाह ने फैसले का किया स्वागत
इस कल्याणकारी निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित शाह ने सोशल मीडिया पर इस कदम की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा जयंती से ठीक एक दिन पहले लिया गया यह निर्णय देश के श्रम बल के लिए एक बड़ा उपहार है। अमित शाह ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस ऐतिहासिक फैसले से 51 लाख से अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत कवच मिलेगा, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा। उन्होंने देश के कामकाजी वर्ग के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता दिखाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार भी व्यक्त किया।
विश्वकर्मा जयंती और श्रमिक कल्याण के सरकारी प्रयास
यह बड़ी घोषणा ऐसे समय में की गई है जब देश भर में विश्वकर्मा पूजा की तैयारियां चल रही हैं, जिसे आमतौर पर 17 या 18 सितंबर को मनाया जाता है। सरकार इस अवसर पर लगातार कारीगरों और श्रमिकों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं लागू करती रही है। इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के वर्धा में आयोजित राष्ट्रीय पीएम विश्वकर्मा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देश के पारंपरिक शिल्पकारों और श्रमिकों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया था। भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री के जन्मदिन से लेकर गांधी जयंती तक सेवा पखवाड़ा भी आयोजित किया जाता है, जिसके तहत समाज के पिछड़े और कामकाजी वर्गों के लिए देश भर में कल्याणकारी गतिविधियों का संचालन किया जाता है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस घोषणा पर देश भर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां एक ओर बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोगों ने सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के फैसले की सराहना की है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने निजी कंपनियों द्वारा न्यूनतम वेतन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने और जमीनी स्तर पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं।



























