उत्तर प्रदेश की राजनीति के दिग्गज चेहरे और समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता राम गोविंद चौधरी का लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में निधन हो गया। वह बीते कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती थे। उनके निधन की खबर से समाजवादी पार्टी सहित पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
लंबा संसदीय और संगठनात्मक सफर
राम गोविंद चौधरी उत्तर प्रदेश विधानसभा में आठ बार विधायक चुनकर पहुंचे थे। समाजवादी आंदोलन की जमीनी राजनीति से निकले चौधरी को पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव दोनों का बेहद करीबी व भरोसेमंद माना जाता था। उन्होंने राज्य सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश विधानसभा में उन्होंने नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभाई, जहां वे जनहित के मुद्दों और विपक्ष की आवाज को मुखरता से उठाने के लिए जाने जाते थे। छात्र राजनीति से शुरुआत कर उन्होंने राज्य की मुख्यधारा की राजनीति में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई थी।
अखिलेश यादव ने दी श्रद्धांजलि
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट साझा करते हुए अपने वरिष्ठ सहयोगी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्री राम गोविंद चौधरी का निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की और शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए इस कठिन समय में दुख सहने का संबल मिलने की कामना की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी उनके निधन पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
सपा संगठन के लिए बड़ा नुकसान
पूर्वांचल की राजनीति में राम गोविंद चौधरी का प्रभाव बेहद व्यापक माना जाता था। खासकर बलिया और आसपास के जनपदों में समाजवादी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में उनकी भूमिका केंद्रीय रही। विधानसभा के भीतर नियमों की गहरी समझ और तीखे तर्कों के बल पर सत्तापक्ष को घेरने में उन्हें महारत हासिल थी। उनके जाने को समाजवादी पार्टी के लिए एक वैचारिक और सांगठनिक शून्यता के रूप में देखा जा रहा है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर आम नागरिकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी। लोगों ने उनके दशकों लंबे संघर्ष, सादगी और समाजवादी विचारों के प्रति उनकी निष्ठा को याद करते हुए उनके परिजनों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की।

























