भारतीय समाज में शिक्षा की अलख जगाने और रूढ़िवादी मान्यताओं के खिलाफ मुखर आवाज उठाने वाले महान समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती के अवसर पर उन्हें देशभर में श्रद्धापूर्वक याद किया गया। 26 सितंबर को उनकी जन्म-जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की और आधुनिक भारत के निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया।
योगी आदित्यनाथ ने संदेश में क्या कहा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर एक महान शिक्षाविद्, प्रखर समाज सुधारक और भारतीय नवजागरण के पथप्रदर्शक थे। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि महिला शिक्षा, सामाजिक समरसता और मानवता के कल्याण के लिए विद्यासागर द्वारा किया गया कार्य अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि उनका यह ऐतिहासिक योगदान भारतीय समाज को हमेशा नई ऊर्जा और सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा देता रहेगा।
कौन थे ईश्वर चन्द्र विद्यासागर
ईश्वर चन्द्र विद्यासागर उन्नीसवीं सदी में बंगाल के सबसे प्रभावशाली दार्शनिकों, शिक्षाविदों और समाज सुधारकों में गिने जाते हैं। उनके बचपन का नाम ईश्वर चन्द्र बन्द्योपाध्याय था। विद्यार्थी जीवन के दौरान ही संस्कृत भाषा और दर्शन में असाधारण विद्वता को देखते हुए उन्हें संस्कृत कॉलेज द्वारा 'विद्यासागर' की सम्मानित उपाधि दी गई थी, जिसका अर्थ विद्या का अथाह सागर होता है। वे केवल एक विचारक ही नहीं, बल्कि सक्रिय लेखक, अनुवादक, मुद्रक, प्रकाशक, उद्यमी और निस्वार्थ परोपकारी भी थे। बंगाल पुनर्जागरण के प्रमुख स्तंभ माने जाने वाले विद्यासागर ने समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने, बालिकाओं के लिए स्कूल खोलने और विधवा पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था।
शिक्षा और सामाजिक समरसता की विरासत
ईश्वर चंद्र विद्यासागर का मानना था कि किसी भी समाज की तरक्की तभी संभव है जब उसकी आधी आबादी, यानी महिलाएं, शिक्षित और आत्मनिर्भर हों। उन्होंने पारंपरिक संस्कृत शिक्षा के दायरे से बाहर निकलकर जनसामान्य और विशेष रूप से बालिकाओं के लिए प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना की। इसके साथ ही, उन्होंने भारतीय समाज में लंबे समय से जड़ जमा चुकी कुप्रथाओं पर कड़े प्रहार किए और मानवीय गरिमा को सर्वोपरि स्थान दिया। आज भी उनके विचार समाज में समानता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नैतिक मूल्यों के प्रसार के लिए प्रासंगिक बने हुए हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री के इस संदेश के बाद आम लोगों ने भी सोशल मीडिया पर ईश्वर चंद्र विद्यासागर के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की और महिला शिक्षा के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान को नमन किया। वहीं कुछ नागरिकों ने इस अवसर पर कानून व्यवस्था तथा स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े अपने जमीनी मुद्दे भी सरकार के समक्ष रखे।

























