महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्षी दल के शीर्ष नेता राहुल गांधी के हालिया बयानों की कड़ी आलोचना की है। नागपुर में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि जिस अंदाज में राजनीतिक मंचों पर दूसरों का उपहास उड़ाया जा रहा है, उसके बाद कांग्रेस नेता के लिए स्टैंड-अप कॉमेडी का पेशा चुनना अधिक मुफीद साबित होगा। उन्होंने टिप्पणी की कि उनकी रणनीतियों की वजह से पार्टी पूरी तरह दिशाहीन और प्रभावहीन हो चुकी है, लिहाजा ऐसा रास्ता अपनाने से उन्हें एक नया काम मिल सकता है। यह प्रतिक्रिया इंदौर शहर में आयोजित 'छात्रों की गूंज' नामक सभा के बाद सामने आई, जहां राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली की नकल करने की बात कही गई थी।
पेट्रोल पंपों पर डिजिटल भुगतान विवाद और एमडीआर शुल्क
राजनीतिक बयानबाजी के अलावा मुख्यमंत्री ने डिजिटल भुगतान को लेकर खड़े किए जा रहे विवाद पर भी विस्तार से अपनी बात रखी। दरअसल मुंबई शहर के पेट्रोल पंप डीलरों ने घोषणा की थी कि यदि प्रशासन संशोधित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर को वापस नहीं लेता है, तो वे 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक की राशि के यूपीआई भुगतानों को लेना बंद कर देंगे। इस चेतावनी पर असहमति जताते हुए फडणवीस ने कहा कि व्यापारियों द्वारा ऐसा कड़ा रुख दिखाना बिल्कुल भी जायज नहीं है। उन्होंने रेखांकित किया कि ऑनलाइन माध्यमों के आने से ईंधन स्टेशनों की बिक्री और कामकाज में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।
फडणवीस के अनुसार डिजिटल व्यवस्था ने पेट्रोल पंपों के दैनिक लेन-देन में भारी पारदर्शिता लाने का काम किया है और आज आम नागरिक बेहद सुगमता से इसका उपयोग कर रहे हैं। व्यवस्था के संचालन के लिए जो शुल्क निर्धारित किया गया है, वह बेहद नगण्य है। उन्होंने दो-टूक कहा कि प्रणाली को सुचारू बनाए रखने की मामूली लागत की भरपाई का विरोध करने के बजाय कारोबारियों को इससे मिलने वाले व्यापक लाभ पर गौर करना चाहिए।
संसदीय समिति की भूमिका और नीतिगत पृष्ठभूमि
नियमों की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इस प्रकार का एमडीआर लागू करने का परामर्श जिस संसदीय पैनल ने दिया था, उसमें पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम सहित कांग्रेस दल के तीन अन्य प्रमुख राजनेता भी शामिल थे। ऐसे में इस मामले पर अनावश्यक विवाद खड़ा करना सिर्फ जनता के बीच गलतफहमी पैदा करने की कोशिश है। उन्होंने दोहराया कि यह व्यवस्था सभी प्रकार के भुगतानों पर एकमुश्त लागू नहीं होती, बल्कि यह चुनिंदा और विशेष लेन-देन तक ही सीमित है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था की महत्ता रेखांकित करते हुए फडणवीस ने कहा कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और आर्थिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने में ऑनलाइन तंत्र ने ऐतिहासिक काम किया है। उन्होंने सभी हितधारकों से आह्वान किया कि वे व्यवस्था को बाधित करने के बजाय पारदर्शी व्यवस्था का समर्थन करें और अनावश्यक टकराव से बचें।















