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अंबाला कैंट के ऑल वेदर पूल से तैयार हो रहे अंतरराष्ट्रीय तैराक, जानिए किस उम्र से शुरू करें ट्रेनिंगहरियाणा
20 सित॰ 2026, 5:58 pm (49 दिन पहले)· 4

अंबाला कैंट के ऑल वेदर पूल से तैयार हो रहे अंतरराष्ट्रीय तैराक, जानिए किस उम्र से शुरू करें ट्रेनिंग

अंबाला छावनी में 38 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से बने ऑल वेदर स्विमिंग पूल में बच्चों को 3 से 4 साल की उम्र से ट्रेनिंग देकर पेशेवर तैराकी के लिए तैयार किया जा रहा है।

खेल के जरिए बेहतर सेहत के साथ उज्ज्वल करियर तलाशने वाले बच्चों और युवाओं के लिए तैराकी एक शानदार रास्ता बनकर उभर रही है। हरियाणा की लड़कियां पहले ही विभिन्न खेल स्पर्धाओं में देश और दुनिया में अपना परचम लहरा रही हैं, और अब तैराकी में भी राज्य की प्रतिभाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। अंबाला छावनी में खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय स्तर का ऑल वेदर स्विमिंग पूल तैयार किया गया है। करीब 38 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से बना यह परिसर स्थानीय खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो रहा है, जहां वे बिना किसी मौसम की रुकावट के पूरे बारह महीने अभ्यास कर सकते हैं।

सर्दियों में भी नहीं थमती खिलाड़ियों की तैयारी

अक्सर मौसम बदलने और कड़ाके की ठंड पड़ने पर खुले तालों में तैराकी का अभ्यास रुक जाता है, लेकिन अंबाला कैंट के इस आधुनिक परिसर में ऐसी कोई समस्या नहीं आती। यहां पानी के तापमान को नियंत्रित रखने की आधुनिक व्यवस्था की गई है, जिससे कड़ाके की सर्दियों में भी गर्म पानी के कारण खिलाड़ियों का दैनिक प्रशिक्षण बिना किसी बाधा के जारी रहता है। इसके साथ ही परिसर में समय-समय पर विभिन्न स्तरों की तैराकी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। इन प्रतिस्पर्धी आयोजनों में भाग लेने से युवा तैराकों को दबाव के बीच अपने प्रदर्शन को परखने और खुद को निखारने का व्यावहारिक अनुभव मिलता है।

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3 से 4 वर्ष की आयु से शुरू हो सकता है बुनियादी अभ्यास

करीब 15 साल से युवाओं को इस विधा में प्रशिक्षित कर रहे स्विमिंग कोच आशीष चौधरी के मुताबिक, अंबाला का यह ऑल वेदर स्विमिंग पूल हर आधुनिक सुविधा से संपन्न है। उन्होंने बताया कि तैराकी की नींव बहुत छोटी उम्र में ही रखी जा सकती है। जब बच्चा 3 से 4 साल का होता है, तब उसे पानी से परिचित कराकर उसका डर दूर किया जा सकता है और सहजता के साथ बुनियादी प्रशिक्षण दिया जा सकता है। जो बच्चे लगातार अनुशासन के साथ पानी में पसीना बहाते हैं, वे 9 से 11 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते बेहतरीन प्रदर्शन करने लगते हैं। इसके बाद 14 से 15 साल की उम्र में वे राज्य और राष्ट्रीय स्तर की बड़ी खेल प्रतियोगिताओं में ताल ठोकने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं।

8 से 10 साल की कड़ी मेहनत से बनता है अंतरराष्ट्रीय स्तर का सफर

आशीष चौधरी ने तैराकी में करियर की राह समझाते हुए स्पष्ट किया कि एक खिलाड़ी को राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाने के लिए लगभग 8 से 10 साल तक निरंतर और समर्पित तैयारी करनी होती है। इस केंद्र पर पंजीकृत खिलाड़ी हर दिन लगभग 2 से 3 घंटे तक कड़ा अभ्यास करते हैं। कई उत्साही शिक्षार्थी सुबह के समय नियमित रूप से घंटों पानी में तकनीक और गति सुधारने पर काम करते हैं। इस खेल में लड़कियों के लिए भी असीम संभावनाएं मौजूद हैं। आज बड़ी संख्या में छात्राएं अपनी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ पेशेवर तैराकी सीख रही हैं।

पदकों के साथ लाखों रुपये के नकद पुरस्कार

प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तैराकों को केवल पदक और ट्रॉफियां ही नहीं मिलतीं, बल्कि उनका सम्मान नकद पुरस्कारों से भी किया जाता है। कई प्रतिष्ठित खेल प्रतियोगिताओं में विजेताओं को लाखों रुपये तक की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है। 2016 के ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला तैराक शिवानी कटारिया का उदाहरण देते हुए आशीष चौधरी ने कहा कि उनके जैसे सफल खिलाड़ी आज की बेटियों को इस विधा में नई ऊंचाइयों को छूने की प्रेरणा देते हैं। इसके साथ ही उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे बच्चों को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने के लिए किसी न किसी खेल से जरूर जोड़ें, क्योंकि खेल शारीरिक तंदुरुस्ती के साथ जीवन में अनुशासन भी सिखाते हैं।

पढ़ाई के साथ पदक जीतने का सपना संवार रहीं युवा प्रतिभाएं

इस आधुनिक तरणताल में अभ्यास कर रहीं 11वीं कक्षा की छात्रा आस्था बताती हैं कि वह पिछले चार वर्षों से नियमित तैराकी सीख रही हैं। आस्था के अनुसार, किताबों के साथ खेल के मैदान का संतुलन बनाना एक शानदार अनुभव रहा है और उनका अंतिम लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। वहीं दूसरी ओर, 12वीं कक्षा की छात्रा शिवानी पिछले पांच साल से इस खेल में कड़ी मेहनत कर रही हैं। शिवानी रोजाना सुबह लगभग दो घंटे तक तरणताल में अभ्यास करती हैं। वह सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में भाग ले चुकी हैं और अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर कई पदक और नकद पुरस्कार भी हासिल कर चुकी हैं। शिवानी का कहना है कि अंबाला में तैयार हुआ यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का ऑल वेदर पूल स्थानीय खिलाड़ियों के लिए बहुत बड़ी सुविधा है और उनका सपना भी वैश्विक मंचों पर भारत का नाम रोशन करना है।

सवाल-जवाब

अंबाला कैंट के ऑल वेदर स्विमिंग पूल की निर्माण लागत कितनी है?
इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऑल वेदर स्विमिंग पूल को करीब 38 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया है।
बच्चों को किस उम्र से तैराकी की ट्रेनिंग शुरू करवानी चाहिए?
कोच आशीष चौधरी के अनुसार, 3 से 4 साल की उम्र से बच्चे को पानी के अनुकूल बनाकर तैराकी की बुनियादी ट्रेनिंग दी जा सकती है।
एक तैराक को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने में कितना समय लगता है?
राज्य स्तर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए खिलाड़ी को करीब 8 से 10 साल की निरंतर तैयारी की जरूरत होती है।
क्या सर्दियों के मौसम में भी अंबाला के इस पूल में अभ्यास चलता रहता है?
हां, यह ऑल वेदर स्विमिंग पूल है और सर्दियों में गर्म पानी की आधुनिक व्यवस्था होने के कारण अभ्यास सालभर जारी रहता है।
खिलाड़ी प्रतिदिन कितने घंटे अभ्यास करते हैं?
इस केंद्र पर तैराक रोजाना लगभग 2 से 3 घंटे तक नियमित अभ्यास करते हैं, जिसमें कई बच्चे सुबह की शिफ्ट में ट्रेनिंग लेते हैं।
तैराकी प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों को क्या पुरस्कार मिलते हैं?
सफल तैराकों को पदकों और ट्रॉफियों के अलावा कई प्रमुख प्रतियोगिताओं में लाखों रुपये तक की नकद पुरस्कार राशि भी मिलती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·48 दिन पहले

अंबाला कैंट में करीब 39 करोड़ रुपये का यह निवेश खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जमीनी स्तर पर ऐसे अत्याधुनिक केंद्रों का निर्माण केवल खिलाड़ियों को तैयार नहीं करता, बल्कि दीर्घकालिक खेल अर्थव्यवस्था की नींव भी रखता है। चूंकि एक अंतरराष्ट्रीय तैराक तैयार होने में 8 से 10 वर्ष का समय लगता है, इसलिए ऐसे बारहमासी (all-weather) बुनियादी ढांचे में किया गया खर्च भविष्य के लिए एक बड़ा सामाजिक और आर्थिक निवेश है, जो देश को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाएगा।

Priya Sharma@priya-sharma·48 दिन पहले

रविकैश की बात को आगे बढ़ाते हुए, यह बुनियादी ढांचा केवल करियर ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की जीवनशैली और वेलनेस को भी एक स्वस्थ दिशा दे रहा है। कम उम्र से तैराकी सीखने से बच्चों में न सिर्फ शारीरिक मजबूती आती है, बल्कि अनुशासन, मानसिक दृढ़ता और तनाव प्रबंधन जैसे गुण भी विकसित होते हैं। आज के डिजिटल युग में, जहाँ बच्चे स्क्रीन पर अधिक समय बिता रहे हैं, ऐसी बारहमासी सुविधाएँ उन्हें सक्रिय जीवनशैली अपनाने और पढ़ाई के साथ एक स्वस्थ संतुलन बनाने में मदद करती हैं। यह आधुनिक जीवन में वेलनेस और व्यक्तित्व विकास का एक बेहतरीन मॉडल है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·48 दिन पहले

खेल नीति और शासन के दृष्टिकोण से, अंबाला कैंट में 38.68 करोड़ रुपये का यह निवेश सरकारी प्राथमिकताओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। आमतौर पर विश्वस्तरीय खेल बुनियादी ढांचा केवल बड़े महानगरों तक सीमित रहता था, लेकिन इस तरह की अत्याधुनिक परियोजनाओं का छोटे शहरों में विस्तार करना विकेंद्रीकृत विकास की नीति का बेहतरीन उदाहरण है। यह सरकारी नीति न केवल ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को समान अवसर प्रदान करती है, बल्कि भविष्य में सार्वजनिक-निजी भागीदारी और खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के नए रास्ते भी खोलती है।

Rohan Verma@rohan-verma·48 दिन पहले

बुनियादी ढांचे और खेल नीति के दृष्टिकोण से, अंबाला कैंट का यह ऑल-वेदर पूल खेल विकास के विकेंद्रीकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। महानगरों से इतर क्षेत्रीय शहरों में लगभग 38 करोड़ रुपये का सार्वजनिक निवेश यह दर्शाता है कि अब नीतिगत स्तर पर जमीनी प्रतिभाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों के लिए भी यह मॉडल अनुकरणीय है, जहां क्षेत्रीय स्तर पर ऐसी खेल अवसंरचनाएं तैयार कर युवाओं को नए अवसर दिए जा सकते हैं। हालांकि, इस सरकारी संपत्ति की दीर्घकालिक सफलता इसकी निरंतर रखरखाव व्यवस्था और कुशल प्रशिक्षकों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·48 दिन पहले

रोहन की बात को आगे बढ़ाते हुए, सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के नजरिए से भी ऐसे खेल परिसरों का महत्व बहुत अधिक है। युवा पीढ़ी को सही दिशा और सुरक्षित वातावरण प्रदान करना अपराध नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब किशोरों और युवाओं को तैराकी जैसी रचनात्मक और अनुशासित गतिविधियों में व्यस्त रखा जाता है, तो वे असामाजिक तत्वों, नशीले पदार्थों के जाल और आपराधिक गतिविधियों से दूर रहते हैं। खेल के मैदान युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक मार्ग देकर अप्रत्यक्ष रूप से अपराध दर को कम करने और समाज में सुरक्षा की भावना मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

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