प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब से जुड़ा एक निजी अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि जालंधर दौरे के दौरान उनकी मुलाकात एक जाने-माने धार्मिक गुरु से हुई।
जालंधर में हुई मुलाकात
अपने आधिकारिक एक्स हैंडल @narendramodi से पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा कि उन्हें जालंधर में संत निरंजन दास जी से मिलने का सौभाग्य मिला। इस मुलाकात के बारे में मोदी ने कहा कि आध्यात्मिक जागरूकता और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में संत निरंजन दास जी का योगदान बेहद प्रेरणादायक है। पोस्ट के साथ उन्होंने मुलाकात की झलक दिखाने वाला एक लिंक भी साझा किया, हालांकि पोस्ट में जालंधर के भीतर किस जगह मुलाकात हुई, यह किस तारीख को हुई या बातचीत कितनी देर चली, इसका जिक्र नहीं था। मुलाकात में मौजूद किसी और व्यक्ति का नाम भी पोस्ट में सामने नहीं आया और मोदी ने यह भी नहीं बताया कि संत निरंजन दास जी के किन खास कार्यों को देखकर उन्होंने यह टिप्पणी की। पोस्ट में संत निरंजन दास जी की तरफ से मुलाकात को लेकर कोई प्रतिक्रिया या बयान भी शामिल नहीं था।
जालंधर, जहां यह मुलाकात हुई, पंजाब के प्रमुख शहरों में गिना जाता है, लेकिन मोदी की पोस्ट से यह साफ नहीं हो पाया कि यह मुलाकात किसी बड़े दौरे का हिस्सा थी या अकेली यात्रा थी। चूंकि पोस्ट सिर्फ इस मुलाकात और उस पर मोदी की अपनी राय तक सीमित थी, इसलिए इसमें दौरे के बाकी कार्यक्रम, अन्य किसी गणमान्य व्यक्ति से मुलाकात या यात्रा से जुड़ी किसी घोषणा की कोई जानकारी नहीं दी गई।
जनता की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री के वेरिफाइड सोशल मीडिया अकाउंट से आने वाली पोस्ट पर आमतौर पर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं आती हैं और यह पोस्ट भी इसका अपवाद नहीं रही। कुछ ही समय में इस पर अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा के लोगों की टिप्पणियां आने लगीं।
इस पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। कई लोगों ने इस मुलाकात का स्वागत करते हुए कहा कि यह राष्ट्र निर्माण में आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव के महत्व को दिखाती है, वहीं कुछ लोगों ने इसे पंजाब के मौजूदा राजनीतिक माहौल से जोड़ते हुए राज्य में भारतीय जनता पार्टी के कामकाज का समर्थन किया। कुछ यूजर्स ने इस पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक गतिविधियों के आसपास किया गया फोटो अवसर बताया और पूछा कि क्या इससे पंजाब की जनता के लिए किसी असली नीतिगत बदलाव की शुरुआत होगी। कुछ टिप्पणियां प्रधानमंत्री की सीधी आलोचना से जुड़ी असंबंधित राजनीतिक बातों तक भी पहुंच गईं, जबकि कुछ यूजर्स ने मुलाकात पर कोई राय दिए बिना ही प्रधानमंत्री के प्रति अपनी निजी शुभकामनाएं जाहिर कीं। कुल मिलाकर इस पोस्ट पर सराहना, संदेह और असंबंधित राजनीतिक टिप्पणियों का मिला-जुला असर देखने को मिला, किसी एक तरह की राय हावी नहीं रही।

























