मान्यवर कांशीराम की पुण्यतिथि के अवसर पर उत्तर प्रदेश की सियासत में सामाजिक न्याय और समानता का विमर्श केंद्र में आ गया है। इस मौके पर योगी आदित्यनाथ ने दलित और शोषित तबके के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले इस प्रमुख जननेता के योगदान को शिद्दत से याद किया।
योगी आदित्यनाथ का श्रद्धांजलि संदेश
योगी आदित्यनाथ ने X पर लिखा कि वंचित समाज के अधिकारों को बुलंद आवाज देने वाले कांशीराम का जीवन प्रेरणादायी है। उन्होंने रेखांकित किया कि हाशिए पर खड़े लोगों के सशक्तीकरण और व्यवस्था में उनकी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए किया गया उनका संघर्ष एक समतामूलक समाज बनाने का मार्ग दिखाता है।
सामाजिक न्याय और समानता की सियासत
उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में सामाजिक भागीदारी, संविधान की मर्यादा और दबे-कुचले वर्गों के हकों को लेकर लगातार राजनीतिक हलचल तेज रही है। लखनऊ से लेकर पूर्वांचल के मऊ और बिहार के सीवान तक विभिन्न मंचों पर संविधान सम्मान सम्मेलनों और जनपंचायतों का आयोजन होता रहा है। इन आयोजनों में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों के हक, समानता और लोकतांत्रिक भागीदारी की रक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया जा रहा है।
संविधान और बाबासाहेब के विचारों की प्रासंगिकता
कांशीराम ने हमेशा डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को जमीनी राजनीति का आधार बनाया। उनका स्पष्ट मानना था कि राजनीतिक हिस्सेदारी तभी सार्थक हो सकती है जब वंचितों को सामाजिक और आर्थिक अधिकार मिलें। केंद्र सरकार भी विश्वविद्यालयों में अंबेडकर पीठ स्थापित करने जैसे कदमों से इस विरासत को आगे बढ़ाने की बात कह रही है, जबकि विभिन्न संगठन जनपदों में संगोष्ठियों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव और बराबरी का संदेश प्रसारित करने में जुटे हैं।



























