पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 19 जुलाई को देश का पहला 'म्यूजियम ऑफ वर्ड्स' खुल गया। इस उद्घाटन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद मौजूद रहे और उन्होंने कार्यक्रम की झलकियां व अपडेट अपने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा कीं, जिससे इस आयोजन को लेकर देशभर में चर्चा शुरू हो गई।
क्या है म्यूजियम ऑफ वर्ड्स
यह नया संग्रहालय नेशनल लाइब्रेरी और नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम ने मिलकर तैयार किया है। इसका मकसद भाषा, साहित्य और मानव ज्ञान के क्रमिक विकास की पूरी कहानी को एक ही छत के नीचे प्रदर्शित करना है, ताकि आम दर्शक यह समझ सकें कि दुनियाभर में शब्द, लिपियां और संचार के तरीके सदियों में किस तरह बदलते और विकसित होते रहे हैं। खबरों के मुताबिक इसे देश का पहला ऐसा संग्रहालय बताया जा रहा है जो पूरी तरह से शब्दों, भाषाओं और लेखन की यात्रा को समर्पित है, न कि किसी एक भाषा, राज्य या समुदाय तक सीमित है। इससे पहले नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम मुख्य रूप से विज्ञान व तकनीक पर आधारित प्रदर्शनियों के लिए जाना जाता रहा है।
अमित शाह ने सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट किया
अमित शाह ने अपने एक्स हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा कि वे कोलकाता में नेशनल लाइब्रेरी व नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम द्वारा बनाए गए 'म्यूजियम ऑफ वर्ड्स' के लोकार्पण समारोह से लाइव जुड़े हुए हैं। पोस्ट के साथ उन्होंने कार्यक्रम का एक वीडियो लिंक भी साझा किया, जिसमें वे उद्घाटन समारोह में मंच से अपनी बात रखते हुए नजर आए। इस पोस्ट से साफ है कि केंद्र सरकार इस आयोजन को लेकर गंभीर है और इसे कोलकाता की सांस्कृतिक व शैक्षणिक विरासत से जोड़कर पेश किया जा रहा है। गृह मंत्री का खुद मौके पर पहुंचना और लाइव अपडेट देना इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार इस संग्रहालय को एक बड़ी सांस्कृतिक पहल के तौर पर प्रचारित करना चाहती है।
यह पहल क्यों अहम मानी जा रही है
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का संग्रहालय छात्रों, शोधार्थियों और आम पाठकों के लिए भाषा व लिपियों के इतिहास को समझने का एक नया माध्यम बन सकता है। नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम अब तक ज्यादातर विज्ञान और तकनीक से जुड़े प्रदर्शनों के लिए जाना जाता रहा है, ऐसे में भाषा और संचार के इतिहास को उसी वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से पेश करने की यह कोशिश अपने आप में नई मानी जा रही है। कोलकाता में इसका खुलना खासतौर पर इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि यह शहर लंबे समय से साहित्य, पत्रकारिता और शिक्षा के क्षेत्र में भारत का अगुआ रहा है, और यहां पहले से मौजूद नेशनल लाइब्रेरी जैसी संस्थाएं इस शहर की बौद्धिक विरासत की पहचान रही हैं।
कोलकाता के बारे में
कोलकाता पश्चिम बंगाल राज्य की राजधानी है और भारत के प्रमुख महानगरों में गिना जाता है। यह हुगली नदी के पूर्वी किनारे पर बसा है और बंगाल की खाड़ी के तट से करीब 180 किलोमीटर दूर स्थित है। कोलकाता को भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर और पांचवां सबसे बड़ा बंदरगाह भी माना जाता है। इस शहर का इतिहास काफी पुराना है, और इसका आधुनिक स्वरूप अंग्रेजों तथा फ्रांसीसी उपनिवेशवाद के दौर से जुड़ा हुआ है। महलों के इस शहर को 'सिटी ऑफ जॉय' यानी 'आनंद का शहर' भी कहा जाता है, और यह लंबे समय से भारत में शिक्षा व संस्कृति में आए बदलावों का प्रमुख केंद्र रहा है। यही वजह है कि नेशनल लाइब्रेरी जैसी बड़ी संस्थाएं और अब यह नया संग्रहालय भी इसी शहर में स्थापित किए गए हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
अमित शाह की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने म्यूजियम ऑफ वर्ड्स के विचार की तारीफ करते हुए इसे भाषा और साहित्य की विरासत सहेजने वाला अनोखा और सराहनीय प्रयास बताया। वहीं कई यूजर्स ने इस पोस्ट के जवाब में अलग-अलग मुद्दों पर सवाल और शिकायतें भी दर्ज कीं, जिनका सीधा संबंध म्यूजियम के उद्घाटन से नहीं था। कुल मिलाकर प्रतिक्रियाओं में समर्थन के साथ-साथ आलोचना और असंतोष भी साफ नजर आया।


























